आधुनिक अंगिका साहित्य

डडीर

डडीर

डडीर — कुंदन अमिताभ — ऐन्जां सं॑ जे लौकै छौं पातरऽ – पातरऽ टांगुर – मांगुर डडीर लगीच गेला पर बनी जाय छै झरना जे जीवन क॑ समेटी क॑ चूरू मं॑ उतरी रहलऽ छै स्वर्ग सं॑ धरती पर झरी – झरी क॑ जीवन बाँचै ल॑ धरती क॑ । डडीर पारलऽ छै जन्न॑ – तन्न॑ भाग्यऽ के खाली पहचानै के जरूरत[Read More...]

झुकै नै देशऽ के धजा

झुकै नै देशऽ के धजा

झुकै नै देशऽ के धजा — कुंदन अमिताभ — कण-कण मं॑ अलख जगाबऽ मानव सं॑ दानव क॑ भगाबऽ फर्ज आपनऽ आपन्है प॑ लादऽ झुकै नै देशऽ के धजा सँभालऽ । पल प्रतिपल नै लोर बहाबऽ समर भूमि मं॑ आगू आबऽ डेग-डेग पर धूल चटाबऽ दुश्मन क॑ रणछोड़ बनाबऽ । विश्वासऽ सं॑ अलग भ॑ रहलै बलिदानऽ सं॑ विलग भ॑ रहलै नव[Read More...]

टंडेल

टंडेल

टंडेल — कुंदन अमिताभ — बसबिट्टी केरऽ छाहरी मं॑ नद्दी लगाँ बंसी ल॑ क॑ बैठलऽ छै गामऽ के छौरा बंसी मं॑ छै मजगूत डोरऽ डोरऽ मं॑ छै चोखऽ खुद्दन खुद्दन मं॑ छै माँटी तरऽ सं॑ निकाललऽ हदियैलऽ जोंकटी जोंकटी केरऽ गंध पानी तरऽ मं॑ सगरे पसरी रहलऽ छै मछरी सूँघी क॑ ऐतै जोंकटी क॑ हपकन मारतै खुद्दन मं॑ खुद बझलऽ चल्लऽ[Read More...]

भकजोगनी

भकजोगनी

भकजोगनी — कुंदन अमिताभ — जूगनू कहऽ चाहे भकजोगनी हरदम जुगजुगाबै छै भक सं॑ भकभकाबै छै जंगल झाड़ी मं॑ घऽर आरू बाड़ी मं॑ जन-मन टटोलै छै सम्हरी-सम्हरी बोलै छै जोहै छऽ बाट भोर होय केरऽ छोड़ऽ इ धात नाश होय केरऽ जोधा बनी क॑ आबऽ जोश भरी लाबऽ जौरऽ होय क॑ आबऽ गुज-गुज अन्हरिया मं॑ सूरज नया उगाबऽ । Angika[Read More...]

अंशऽ बरै छै

अंशऽ बरै छै

अंशऽ बरै छै — कुंदन अमिताभ — हल्ला – गुल्ला नै करऽ हो अंशऽ बरै छै भोकार-ढकार नै पारऽ हो अंशऽ बरै छै । जमीनऽ पर नै, रह॑ द॑ तनी देर सपना मं॑ भरम मौसतऽ के देखी तोरऽ अंशऽ बरै छै । झरखलऽ जाय छै पर बतलाबै छो चरफरऽ जंगल मं॑ बस्ती के रफ्तार देखी अंशऽ बरै छै । हर बाथै[Read More...]

झिंगली केरऽ फूल

झिंगली केरऽ फूल

झिंगली केरऽ फूल — कुंदन अमिताभ — गम – गम गमकी रहलऽ छै झिंगली केरऽ फूल गोधूलि बेला लगीच छै देहरी – भंसा घूमी करी संकेत द॑ रहलऽ छै झिंगली केरऽ फूल । धोरैय ऐतै – बैहारी दन्नं॑ सं॑ चराना बंद करी क॑ माल – जाल क॑ बथानी केरऽ नादी मं॑ जोरी देतै दोले – दोल भरी क॑ राखलऽ छै[Read More...]

ईश्वर – अल्लाह

ईश्वर – अल्लाह

ईश्वर – अल्लाह — कुंदन अमिताभ — मंदिर मस्जिद मं॑ वू अँटै छै कहाँ धरम केरऽ खाना मं॑ बँटै छै कहाँ । वू त॑ सगरे ऐंजाँ-वैंजाँ  जैंजाँ-तैंजाँ कोनो एक्के जग्घऽ प॑ डटै छै कहाँ । बस्ती मं॑ लागलै आगिन उठलै धुआँ नै पता मरतै आय वू कहाँ – कहाँ  । सपना सब्भे मरी गेलै होय क॑ लहुलुहान मस्जिद अजान मंदिर[Read More...]

पूलऽ पर के आदमी

पूलऽ पर के आदमी

पूलऽ पर के आदमी — अचल भारती — ई दुनियाँ एक पूल छेकै जै पूलऽ के दोनों मँहऽ पर लिखलऽ छै — ‘बंद’ उपर छै खाली आकाश नीचें फकत बालू के रेत आरो पूलऽ पर उमड़लऽ छै आदमी रऽ समुंदर आदमी रऽ उड़ै छै मऽन धूरा नाखी उपर आरू आदमी रऽ तपै छै जीवन बालू के रेता नांखीं आरू आदमी[Read More...]

नूनू बूल॑ पाँव-पाँव

नूनू बूल॑ पाँव-पाँव

नूनू बूल॑ पाँव-पाँव —डा. नरेश पांडेय चकोर — नूनू बूल॑ पाँव-पाँव ॥ बुली-बुली क॑ खाय लाय आपन्हौं खाय कौआ खिलाय कौआ बोल॑ काँव-काँव ॥ नूनू बूल॑ पाँव-पाँव ॥ बुललऽ-बुललऽ द्वारी जाय दिय॑ कुतिया क॑ मारी भगाय कुतिया बोल॑ झाँव-झाँव ॥ नूनू बूल॑ पाँव-पाँव ॥ नुनुआ खाय दूध-भात बिल्ली मौंसी कर॑ झात बोल मिठ्ठऽ म्याँव-म्याँव ॥ नूनू बूल॑ पाँव-पाँव ॥ बुललऽ-बुललऽ[Read More...]

गरमैलऽ छै कलम

गरमैलऽ छै कलम

गरमैलऽ छै कलम — विद्याभूषण सिंह ‘वेणु’ — के कहै छै कि इ नरमैलऽ छै कलम । सावधान रे कि इ गरमैलऽ छै कलम । धरती क॑ नञ देख॑ बुरा नजरऽ सें आकाशें, कि जुल्मी क॑ मिटाय ल॑ इ उमतैलऽ छै कलम । मालूम जोंकऽ क॑ कि खून आरो भी छै पीयै वाला, कि रोशनाय सें जादे इ खून पिलैलऽ[Read More...]