अंगिका लोक साहित्य

सरह / सरहपा केरऽ बौद्ध महामुद्रा निर्देश – लामा कुंगा चोऐदक द्वारा पठित

सरह / सरहपा केरऽ बौद्ध महामुद्रा निर्देश – लामा कुंगा चोऐदक द्वारा पठित

 लामा कुंगा चोऐदक द्वारा पठित सरह (सरहपा) केरऽ बौद्ध महामुद्रा निर्देश  Buddhist Mahamudra instruction of Saraha, recited by Lama Kunga Choedak  Reference: https://www.youtube.com/watch?v=1zXfa-ZWvSQ&feature=youtu.be 

अंगिका लोक साहित्य : संस्कार गीत : सोहर

सोहर -1

अंगिका लोक साहित्य : अंगिका संस्कार गीत  Angika Language Folk Literature : Angika Ceremonial Lyrics सोहर -1 जुअवा खेलतें तोहें पिअबा छेका, कि मोरा राजा छेका  हे । पिअवा, एकेगो अमोलवा तों लगैता, कि टिकोलबा हम चाखतें हे ।।1।। भनसा पैसलि तोहों धनि छेका, धनि दुलरैतिन  हे । धनि, एकेगो बलकबा तों बिऐतिहॆ, सोहरबा हम सुनतॆं हे ।।2।। अँगना बोहारइत तोहें[Read More...]

अंगिका लोक साहित्य : संस्कार गीत : सोहर

सोहर : खेलवना -1

अंगिका लोक साहित्य : अंगिका संस्कार गीत Angika Language Folk Literature : Angika Ceremonial Lyrics  सोहर : खेलवना -1 आजु सुमंगल दायक, सब विधि लायक हे । ललना रे, जनमल होरिला, आनंद उर छायल हे ।।1।। दुअरे बाजै बधावा, एँगना गाबै सोहर हे । ललना रे, राजा दसरथ के मन भेल हुलास, नौबत झरै हे ।।2।। होरिला के सुनि के जलम,[Read More...]

गीतिका – धमपा / धर्मपा

गीतिका – धमपा / धर्मपा

गीतिका – धमपा / धर्मपा– कम-कुलिश माँझे भमई लेली । समता जोएँ जलिल चण्डाली ।। डाह डोम्बिधरे लागेलि आगी । ससहर लइ सिंचुहु पाणी।। णउ खरे जाला धूम ण दी सइ । मेरू सिहर लइ गअण पइ सइ ।। दाढइ हरिहर ब्राह्मण नाडा (भठ्ठा) । दाढँइ नव-गुण शासन पाडा (पट्ठा) ।। भणइ धाम फुड़ लेहुरे जाणी । पंचनाले ऊठे (ऊध) गेल[Read More...]

गीतिका – कणहपा

गीतिका – कणहपा

गीतिका – कणहपा– मण तरू पाँच इन्द्रि तसू साहा । आसा-बहल परत फल बाहा ।। वर गुरू वअणों कुठारे छिज्जअ । कणह भणइ तरू  पुणणइजअ।। बढइ सो तरू सुभासुभपाणी । छेवइ विदुजन गुरूपरिमाणी ।। जो तरू छेवइ भेउ ण जाणइ । सडि पडिआँ मुठा ना भव माणइ ।। सुणणा तरूवर गऊण कुठार । छेवई सो तरू मूल ण डाल ।।[Read More...]

गीतिका – शवरपा

गीतिका – शवरपा

गीतिका – शवरपा– ऊचा ऊचा परबत तहि बसहू सबरी बाली । मोरंगि पिच्छ  परिहिण शबरी जीवत गुंजरी माली।। उमत शबरो पागल शबरो माकर गुली गुहाडा । तोहारि पिअ धरिणी नामे सहज सुन्दरी ।। नाना तरूवर मोंउलिल रे गणअत लागें लिडाली । एकेलि सबरी ए वण हिंडइ कर्ण कुंडल वज्रधारी ।। तिअ धाउ खाट पडिला सबेरा महासुहे सेज छाइली । सबर[Read More...]

गीतिका – सरह / सरहपा

गीतिका – सरह / सरहपा

गीतिका – सरह / सरहपा– नाद न बिन्दु न रवि-शशि मंडल चीआ राअ सहावे मूकल । उज्ररे उजु छडि मा लेहु बंक, निउडि बोहिमा जन्हुरे लंक ।। हाथेर कंकण मा लेहुं दप्पण अपने आपा बुझतु निअयण । पार उठ्यारें सोई मजिई, दुज्जण संगे अवसरि जई ।। बाम-दहिण जो खाला दिखाला, सरह भणइ बप । उजु चट भाला ।। Angika Poetry[Read More...]

दोहा – सरह / सरहपा

दोहा – सरह / सरहपा

दोहा – सरह / सरहपा– जाव ण आइ जणिज्जइ, तखम सिस्स करेई। अन्धाँ अन्ध कठाव तिम, वेणण कि कूव पडेई ।। णउतं बाआहि गुरू कहइ, णउतं बु ज्झई सीस । सहजा मिअ-रसु सकल जग, कासु कहिज्जइ कीस ।। Angika Poetry : दोहा (Doha) Poetry from Angika Poetry Book : दोहाकोश (Dohakosh) Poet :सरह / सरहपा  (Sarah / Sarahpa ) Reference Books /[Read More...]

अंगिका भाषा का साहित्यिक परिदृश्य

अंगिका भाषा का साहित्यिक परिदृश्य – कुंदन अमिताभ – Email : kundan.amitabh@angika.com , Mobile : 9869478444 केवल लिखित साहित्य को ही आधार मानें तो अंगिका भाषा में साहित्य निर्माण की समृद्ध परम्परा प्राचीन काल से ही सतत रूप से जारी है, जो प्रामाणिक रूप से पिछले तेरह सौ वर्षों के कालखंडों में बिखरा पड़ा है. महापंडित राहुल सांकृत्यायन के अनुसार[Read More...]