पटना । आपनऽ स्थापना केरऽ दू साल पूरा होला के बाद भी सरकार द्वारा बिहार अंगिका अकादमी क॑ अखनी तलक कार्यालय उपलब्ध नै करैलऽ गेलऽ छै । ई तथ्य लोगऽ सिनी के ई आरोप क॑ प्रमाणित करी रहलऽ छै कि नीतिश सरकार क॑ करोड़ों अंगिका भाषा भाषी केरऽ भावना के कोय खयाल नै छै । एकरा स॑ जहाँ बिहार सरकार केरऽ आपनऽ भाषा-संस्कृति केरऽ संरक्षण के प्रति जारी घोर संवेदनहीन रवैया के भी पता चलै छै । वहीं ई आरोप भी अब॑ सही साबित होय रहलऽ छै कि पिछला विधानसभा चुनाव के ठीक पहिन॑ खाली वोट केरऽ राजनीति के तहत  बिहार अंगिका अकादमी केरऽ गठन केरऽ घोषणा करी देलऽ गेलऽ रहै ।

बिहार अंगिका अकादमी के नाम प॑ लौकै छै त॑ बस खाली एकरऽ अध्यक्ष डॉ. लखन लाल सिंह “आरोही”। जे ८२ साल केरऽ उमर पार करी चुकला के बाद भी  जवान आदमी जकाँ राजधानी केरऽ सड़कऽ प॑ विभिन्न सरकारी दफ्तर केरऽ चक्कर लगैते रहै छै । ई आश म॑ कि सरकार द्वारा जल्दिये अंगिका अकादमी क॑ कार्यालय उपलब्ध करैलऽ जैतै । लेकिन हुनकऽ हौसला भी तब॑ टूट॑ लगै छै जब॑ आला अधिकारी द्वारा मुख्यमंत्री सचिवालय केरऽ आदेश के पालन के जग्घऽ प॑ अवहेलना हुअ॑ लगै छै । डॉ. आरोही केरऽ भाग दौड़ केरऽ एतने टा नतीजा निकललै कि अकादमी के प्रभारी निदेशक केरऽ नियुक्ति होय गेलै । अकादमी क॑ चलाबै लेली  कामचलाऊ फंड क॑ भी स्वीकृति मिली गेलै । लेकिन अखनी तलक कार्यालय नै देलऽ गेलऽ छै । सबस॑ अहम त॑ ई बात छै कि  मुख्यमंत्री सचिवालय केरऽ निर्देश क॑ अब तक लागू नै करलऽ गेलऽ छै । जबकि मुख्यमंत्री सचिवालय केरऽ ई साफ-साफ आदेश छेलै कि पंद्रह दिना के भीतर अंगिका अकादमी क॑ कार्यालय उपलब्ध करैलऽ जाय ।

डॉ. लखन लाल सिंह आरोही, अध्यक्ष, बिहार अंगिका अकादमी

डॉ. लखन लाल सिंह आरोही, अध्यक्ष, बिहार अंगिका अकादमी

बिहार अंगिका अकादमी केरऽ अध्यक्ष डॉ. लखन लाल सिंह “आरोही” केरऽ चिन्ता बेवजह भी नै छै । हुनी बिहार केरऽ आरू सब भाषा अकादमी केरऽ बदहाल स्थिति स॑ बहुत अच्छा सं॑ परिचित छै । मुश्किल सं॑ १० फीट लंबा आरू १० फीट चौड़ा रकम साँकरऽ कोठरी मं॑ बिहार केरऽ भाषा सिनी के अकादमी चली रहलऽ छै । तीन साल केरऽ कार्यकाल केरऽ महत्वपूर्ण दू साल गुजरी चुकलऽ छै खाली सरकार दन्न॑ टकटकी लगैतं॑ । के जाने छेलै कि जे सरकार अंगिका अकादमी के गठन करलकै वहीं एकरा दफ्तर दै मं॑ एत्त॑ नखरा करतै । करोड़ों अंगिका भाषी केरऽ सब्र केरऽ बाँध टूटी रहलऽ छै । सरकार स॑ एत्त॑ अपेक्षा त॑ छेलबे करलै कि दुबारा सत्ता मं॑ ऐला के बाद तुरंत अंगिका अकादमी क॑ ऑफिस देलबैलऽ जैतियै । लोगो के जे गुस्सा सरकार प॑ उतरना चाहियऽ वू ढाल के रूप मं॑ डॉ. लखन लाल सिंह “आरोही” आपनऽ उपर उतरवाय रहलऽ छै । राजधानी मं॑ कार्यालय व आवास  आरू फंड के अभाव मं॑ भी कहिय्यो पटना, त॑ कहिय्यो भागलपुर, त॑ कहिय्यो गाँव, त॑ कहिय्यो अंगिका भाषी क्षेत्र केरऽ कोनो न कोनो इलाका के दौरा करी क॑ साहित्यकार व लोक कलाकार केरऽ सहयोग स॑ अंगिका भाषा व अंग क्षेत्र केरऽ लोक संस्कृति के कार्यक्रम आयोजित करवाय क॑ आरोही जी सरकार केरऽ लाज बचाबै के भरसक कोशिश करतं॑ रहै छै । ई सब स॑ हुनका अंगिका सेवा केरऽ संतुष्टि नै मिलै छै ।

अंगिका.कॉम सं॑ एगो बातचीत मं॑ डॉ. लखन लाल सिंह “आरोही” न॑ कहलकै कि चाही क॑ भी हुनी अकादमी केरऽ काम करै म॑ असमर्थ छै ।  मुख्यमंत्री सचिवालय स॑ आदेश पारित होला के बावजूद कार्यालय उपलब्ध नै करैलऽ गेलऽ छै । हुनकऽ जानकारी के अनुसार २५ अप्रैल २०१७ क॑ मुख्यमंत्री सचिवालय स॑ विभाग क॑ पत्र लिखलऽ गेलऽ छै। जोन उद्देश्य लेली अकादमी के स्थापना करलऽ गेलऽ रहै, ओकरऽ पूर्ति नै हुअ॑ पाबी रहलऽ छै। कार्यालय आरू कर्मचारी केरऽ कमी के वजह स॑ अकादमी केरऽ कार्य योजना पूरा नै हुअ॑ पाबी रहलऽ छै। हुनकऽ अनुसार हुनी लगातार आग्रह करै म॑ लागलऽ छै कि अंगिका अकादमी क॑ जल्दी सं॑ जल्दी दफ्तर देलैलऽ जाय ।

बिहार अंगिका अकादमी केरऽ अध्यक्ष डॉ. लखन लाल सिंह “आरोही” न॑ मुख्यमंत्री क॑ पत्र लिखी क॑ अपनऽ व्यथा रखन॑ छेलै कि कार्यालय नै मिलला के कारण अकादमी अपनऽ उद्देश्य पूरा नै कर॑ पाबी रहलऽ छै । एकरऽ बाद मुख्यमंत्री केरऽ निर्देशानुसार हुनकऽ अवर सचिव अमरेन्द्र कुमार न॑ शिक्षा विभाग केरऽ प्रधान सचिव आर.के. महाजन क॑ लिखलकै कि पंद्रह दिना के अंदर कार्यालय उपलब्ध करैलऽ जाय । २४ अप्रैल २०१७ क॑ ई चिट्ठी देलऽ गेलऽ छेलै । एकरऽ बाद शिक्षा विभाग केरऽ प्रधान सचिव न॑ ५ मई २०१७ क॑ एकरा जन शिकायत विभाग क॑ भेजलकै आरू फेरू जन शिकायत स॑ ई पत्र उच्च शिक्षा केरऽ निदेशक क॑ २२ जून क॑ मिललै । सरकार द्वारा १५ दिन म॑ ज॑ कार्यालय देलवाना छेलै, अखनी तलक नै देलबैलऽ गेलऽ छै ।

एकरऽ पहिन॑ शिक्षा विभाग केरऽ प्रधान सचिव न॑ कार्यालय लेली अंगिका अकादमी केरऽ अध्यक्ष क॑ मकान भाड़ा पर देखै लेली कहन॑ छेलै । हुनी मकान देखलकै भी, लेकिन दू महीना के इंतजार के बाद भी जब॑ एग्रीमेंट नै होलै त॑ मकान मालिक न॑ मकान दोसरा क॑ द॑ देलकै । शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी न॑ कार्यालय लेली शीघ्र कार्रवाई करै के भी निर्देश देन॑ छेलै । उच्च शिक्षा केरऽ निदेशक न॑ बिहार हिन्दी ग्रंथ अकादमी आरू बिहार राष्ट्रभाषा परिषद् क॑ पत्र लिखी क॑ पूछन॑ छेलै कि अंगिका अकादमी के कार्यालय लेली हुनका ऐंजां जग्घऽ छै कि ? एकरऽ जवाब म॑ य़ह॑ कहलऽ गेलऽ छेलै कि हुनका लगाँ कोय भी अतिरिक्त जगह नै छै ।

बिहार अंगिका अकादमी केरऽ दफ्तर वास्तं॑ राजधानी पटना केरऽ सड़कऽ प॑ बिहार अंगिका अकादमी केरऽ अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) लखन लाल सिंह आरोही के कदमताल जारी छै। साथ ही ३० जून क॑ अंगिका अकादमी केरऽ स्थापना केरऽ दू बर्ष पूरा होला प॑ ‘अंगिका दिवस पखवाड़ा’ मनाबै के घोषणा भी हुनका तरफऽ स॑ करलऽ गेलऽ छै । ई बीच हुनका मार्च तक के मानदेय मिली गेलऽ छै । अगस्त २०१५ म॑ हुनी अंगिका अकादमी केरऽ अध्यक्ष पद पर ज्वाइन करन॑ छेलै । एकरऽ बाद स॑ लगातार मानदेय बकाया छेलै । आपने खरचा प॑ सब गिविधि चलाय रहलऽ छेलै । अब॑ हुनका 20 महीना के मानदेय अन्य खर्च सहित १० लाख ८० हजार देलऽ गेलऽ छै । ५०  हजार रुपया मासिक मानदेय निर्धारित छै । सरकार न॑ हिनका मानदेय त॑ द॑ देलकै , अंगिका अकादमी क॑ कार्यालय कहिय्या देतै ?

 ( डॉ. लखन लाल सिंह आरोही, अध्यक्ष, बिहार अंगिका अकादमी, स॑ फोन पर बातचीत पर आधारित )

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