भागलपुर : प्रभात खबर दैनिक मॆं हाल केरॊ छपलॊ एगॊ समाचार केरॊ अनुसार संस्कृति सॆं समृद्ध शहर भागलपुर केरॊ संग्रहालय आस्तॆं-आस्तॆं गुमनामी केरॊ अंधार मॆं बिलैलॊ जाय रहलॊ छै. शहर मॆं रहै वाला कॆ मालूमे नै छै कि संग्रहालय कहाँ छै.

Tathagat_Mudgar

तथागत, मुदगर

चंपाकाल केरॊ ढेर-ढेर दुर्लभ मूर्ती , विष्णु पुराण मॆं वर्णित विभिन्न देवी-देवता सीनी के मूर्ती, काला पत्थर के दसभुजी देवी केरॊ प्रतिमा,  ऐन्हे आरू कत्तॆ सीनी दुर्लभ मूर्ति व स्तूपॊ के संग्रह छै आपनॊ भागलपुर शहर मॆं. जाहिर सॆ बात छै कि इ दुर्लभ संग्रह ‘संग्रहालय’ मॆं ही होतै. लेकिन संग्रहालय छै कैन्जां, इ सवाल पर दस मॆं सॆं छह शहरवासी सोच मॆं पड़ी जाय छै. हुनकॊ जवाब एगॊ सवाल के रूपॊ मॆं होय छै- भागलपुर मॆं भी संग्रहालय छै की ? अबॆ एकरा प्रशासनिक उदासीनता कहलॊ जाय या फिर विभागीय उपेक्षा, लेकिन जमीनी हकीकत य़हॆ छेकै.

Bhagalpur_Museum

भागलपुर म्यूजियम

सचमुच्चॆ, कहियॊ  मिनी कोलकाता कहाबै वाला, कला व संस्कृति सॆं समृद्ध शहर भागलपुर केरॊ संग्रहालय आस्तॆं-आस्तॆं गुमनामी केरॊ अंधार मॆं बिलैलॊ जाय रहलॊ छै. कचहरी चौक सॆं लगीच जिला परिवहन कार्यालय केरॊ बगल मॆं स्थित इ संग्रहालय के बारे मॆं आस-पड़ोस के लोग भी ठीक सॆं बताबॆ नै पारै छै. एक माह पूर्व  स्थानीय दैनिक प्रभात खबर द्वारा मुद्दा उठैला पर कला व संस्कृति विभाग, पटना केरॊ क्षेत्रीय उपनिदेशक(अतिरिक्त प्रभार, संग्रहालय) अरविंद महाजन नॆ निदेशालय स्तर पर भागलपुर संग्रहालय केरॊ दौरा करै के बात कहनॆ रहै, लेकिन अखनी तलक सुध नै लेलॊ गेलॊ छै. संग्रहालय केरॊ नियमित रखरखाव नै होला सॆं कला व संस्कृति कर्मियॊ के मनॊ मॆं एकरॊ बिलाय जाय के डर बनी गेलॊ छै.

भागलपुर संग्रहालय मॆं मंदार सॆं प्राप्त गणोश केरॊ दू गॊ विलक्षण प्रतिमा, बांका जिला सॆं प्राप्त काला पत्थर के बनलॊ देवी के दस भुजी प्रतिमा, सीएमएस स्कूल सॆं मिललॊ चतुर्जभुज दुर्गा, विष्णु धर्मोत्तर पुराण मॆं वर्णित विष्णु के विभिन्न मूर्ती, शाहकुंड सॆं मिललॊ यशिणी के प्रतिमा, सुलतानगंज सॆं मिललॊ भगवान बुद्ध के ढेर प्रतिमा, दसमॊ शताब्दी केरॊ काला पत्थर के मनौती स्तूप आदि अवशेष छै.

भागलपुर संग्रहालय केरॊ स्थापना उनचालीस साल पहलॆं  11 नवंबर 1976 कॆ होलॊ रहै. वर्षो पहलॆ तलक यहाँ काफी गहमा-गहमी रहै छेलै. संग्रहालय मॆं तैनात सुनील व गगन के मानलॊ जाय तॆ दू बरस पहले तलक दुर्लभ मूर्तियॊ कॆ देखै वास्तॆं विदेशी पर्यटक भी पहुंचै रहै, लेकिन दू वरस सॆं इ वीरानॊ होय गेलॊ छै. संग्रहालय केरॊ क्यूरेटर(देखरेख करै वाला) 2012 मॆं सेवानिवृत्ति केरॊ बाद दू वरस तलक योगदान देतॆं रहलै, जबकि वर्तमान मॆं संग्रहालय महज दू ठो चतुर्थ श्रेणी केरॊ कर्मचारी केरॊ भरोसे छै. अबॆ कमरा सब मॆ ताला लटकलॊ पड़लॊ छै, आरू दुर्लभ मूर्ती सीनी गरदा फांकी रहलॊ छै.

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