भगवान राम की बहन का विवाह अंग देश के ऋषि ऋष्यश्रृंग के साथ हुआ था

आइए जानते है कि श्रीराम की बहन का विवाह किस ऋषि के साथ हुआ…

(दैनिक तरूणमित्र म॑ छपलऽ आलेख)

भगवान श्रीराम के जन्म की कथा तो सभी जानते हैं लेकिन जिस ऋषि ने राजा दशरथ का पुत्रकामेष्ठि यज्ञ करवाया था उनके बारे में कम ही लोग जानते हैं। आज हम उन्हीं के बारे में बता रहे हैं।

30 सितंबर शनिवार को दशहरा है। रामायण के अनुसार भगवान श्रीराम ने इसी दिन रावण का वध किया था।

ऋषि ऋष्यश्रृंग ने करवाया था ये यज्ञ
रामायण के अनुसार ऋषि ऋष्यश्रृंग का जन्म हिरणी के गर्भ से हुआ था। त्रेतायुग में जब राजा रोमपाद के राज्य में भयंकर अकाल पड़ा तब ऋषि ऋष्यश्रृंग के प्रभाव से ही उस राज्य में वर्षा हुई। एक मान्यता ये भी है कि राजा दशरथ की पुत्री शांता का विवाह ऋषि ऋष्यश्रृंग से हुआ था। राजा दशरथ का पुत्रकामेष्ठि यज्ञ भी इन्होंने ही करवाया था जिसके फलस्वरूप श्रीराम भरत, लक्ष्मण व भरत का जन्म हुआ।

ऐसे हुआ था ऋषि ऋष्यश्रृंग का जन्म
ऋषि ऋष्यश्रृंग महात्मा काश्यप (विभाण्डक) के पुत्र थे। महात्मा काश्यप बहुत ही प्रतापी ऋषि थे। एक बार वे सरोवर में स्नान करने गए। वहां उर्वशी नाम की अप्सरा को देखकर जल में ही उनका वीर्यपात हो गया। उस वीर्य को जल के साथ एक हिरणी ने पी लिया जिससे उसे गर्भ रह गया। वास्तव में वह हिरणी एक देवकन्या थी।

किसी कारण से ब्रह्माजी उसे श्राप दिया था कि तू हिरण जाति में जन्म लेकर एक मुनि पुत्र को जन्म देगी तब श्राप से मुक्त हो जाएगी। इसी श्राप के कारण महामुनि ऋष्यश्रृंग उस हिरणी के पुत्र हुए। उनके सिर पर एक सींग था इसीलिए उनका नाम ऋष्यश्रृंग प्रसिद्ध हुआ।

जब ऋषि ऋष्यश्रृंग के आने से होने लगी वर्षा
त्रेतायुग में अंगदेश के राजा रोमपाद थे। उनके राज्य में किसी कारण काफी समय तक बारिश नहीं हुई। इसके कारण वहां भयानक अकाल पड़ गया। जब उन्होंने ब्राह्मणों से इसका उपाय पूछा तो उन्होंने बताया कि- महर्षि विभाण्डक के पुत्र ऋषि ऋष्यश्रृंग हैं उन्हें स्त्री जाति के बारे में कुछ भी पता नहीं है वे यदि यहां आ जाएं तो तुरंत वर्षा होने लगेगी।

राजा रोमपाद ने इसके लिए एक सुंदर वेश्या को नियुक्त किया।
जब महर्षि विभाण्डक आश्रम में नहीं होते तब वह वेश्या ऋषि ऋष्यश्रृंग से मिलने जाती। ऋषि ऋष्यश्रृंग उस स्त्री को मुनि ही समझते थे लेकिन उसका रूप-रंग देखकर वे उसकी ओर आकर्षित हो गए और उसके साथ अंग देश आ गए। उनके आते ही राजा रोमपाद के राज्य में बारिश होने लगी और अकाल समाप्त हो गया। प्रसन्न होकर राजा रोमपाद ने अपनी कन्या शांता का विवाह ऋषि ऋष्यश्रृंग से करवा दिया।

भगवान श्रीराम की बहन थी शांता
जनश्रुति है कि राजा रोमपाद ने अपनी जिस कन्या शांता का विवाह ऋषि ऋष्यश्रृंग से करवाया था वह वास्तव में राजा दशरथ की पुत्री व श्रीराम की बड़ी बहन थीं। राजा रोमपाद व राजा दशरथ अच्छे मित्र थे। एक बार जब राजा रोमपाद अयोध्या आए तो शांता के गुण देखकर उनके मन में विचार आया कि ऐसी ही कन्या मेरी पुत्री हो।

राजा दशरथ ने रोमपाद के मन की बात जान ली और उन्हें वचन भी दे दिया। अपने वचन के चलते ही राजा दशरथ ने रोमपाद को अपनी पुत्री शांता गोद दे दी।

ऋषि ऋष्यश्रृंग ने ही करवाया था पुत्रकामेष्ठि यज्ञ
वाल्मीकि रामायण के अनुसार जब राजा दशरथ जब काफी बूढ़े हो गए तो संतान न होने के कारण वे काफी चिंतित रहने लगे।

तब उन्हें ब्राह्मणों ने पुत्रकामेष्ठि यज्ञ करवाने के लिए कहा। महर्षि वशिष्ठ के कहने पर राजा दशरथ ने ऋषि ऋष्यश्रृंग को इस यज्ञ के लिए आमंत्रित किया। ऋषि ऋष्यश्रृंग के माध्यम से ही ये यज्ञ संपन्न हुआ। इस यज्ञ के फलस्वरूप ही भगवान श्रीराम लक्ष्मण भरत व शत्रुघ्न का जन्म हुआ था।

(Source : https://www.tarunmitra.in/archives/23780)