विक्रमशिला में पाषाणकाल से आधुनिक काल तक निरंतरता के मिले प्रमाण

भागलपुर की मिट्टी में दफन हैं 50 ‘विक्रमशिला’

Publish Date:Fri, 04 Aug 2017 03:31 AM (IST) | Updated Date:Fri, 04 Aug 2017 03:31 AM (IST)

जिले के ऐतिहासिक स्थलों में है कहलगांव का विक्रमशिला खोदाई स्थल। खोदाई के बाद निकले ऐतिहासिक विरासतों का इकलौता ‘जीवित’ साक्ष्य, जो इलाके का प्रमुख पर्यटन स्थल है। पर विरासत के तौर पर यह इकलौता नहीं, जिले में ऐसे 50 स्थल और हैं जहां मिट्टी के ढूह (टीले) के नीचे प्राचीन विक्रमशिला विश्वविद्यालय जैसे भवनों की संरचना के पुरावशेष दफन हैं। इन ढूहों को पुरातत्व विभाग बिहार सरकार की खोज टीम ने चिह्नित किया है।

निदेशक सह संयुक्त सचिव पुरातत्व डॉ. अतुल कुमार वर्मा के मार्गदर्शन में करीब चार महीने से बिहार सरकार की टीम इलाके के ऐतिहासिक धरोहरों की खोज में जुटी थी। पुराविद अरविंद सिन्हा रॉय की अगुआई में शोध छात्र पवन कुमार मंडल, मनीष कुमार एवं रोशन कुमार राज की टीम ने अपनी रिपोर्ट निदेशक को सौंपी। इसके मुताबिक टीम ने टीम ने जिले के आबादी वाले 966 गांवों का सर्वे किया। इसमें से 210 स्थलों पर पुरावशेष मिले। इनमें से 50 स्थलों पर मिट्टी के बड़े-बड़े ढूह हैं। हल्की खोदाई के बाद इनके अंदर मोटी-मोटी दीवारें मिली। इस आधार पर टीम ने माना है कि ढूहों के अंदर कभी नगरीय सभ्यता जीवंत रही होगी।

========

इन जगहों पर भवनों की संरचना के पुरावशेष की संभावना

कुरपट डीह, कुरु डीह, दोस्तैनी डीह, कोली डीह, रामपुर डीह, ब्रह्माचारी डीह, झिटका डीह, इटा डीह, बिरनौथ डीह, स्वरूपचक डीह, कोढ़ा डीह, गरहोतिया डीह, अनकिता डीह, बनोखर डीह, टीकाचक डीह, भकरी डीह, सौर डीह, सनोखर डीह, हज्जू डीह, जहांगीरा, धोबिया डीह, माछीपुर डीह, शिवाय डीह, भदेश्वर स्थान, भंडार डीह, उचरिया डीह, लगमा डीह, सबरी डीह, मधुरापुर टीकर, मनसर डीह, खुलनी टीला, मुंजाट टीला, हरनथ टीला, वासुदेवपुर डीह, बनामा स्थान, सिज्जा टीला, देनवारा टीला, टीलाकोठी, कृष्णगढ़, शाहजंगी, ढोल पहाड़ी, अजगवी पहाड़ी आदि

=========

पाषाणकाल से आधुनिक काल तक निरंतरता के मिले प्रमाण

रिपोर्ट के मुताबिक यह इलाका सांस्कृतिक तौर पर काफी समृद्ध रहा है। यहां पाषाणकाल से आधुनिक काल तक निरंतर सभ्यताओं के विकसित होने प्रमाण मिले हैं। 60 हजार साल पुराने पत्थर के हथियार भी मिले तो हर सभ्यता से जुड़े एनबीपीडब्लू (प्राचीन काल के मृदभाड़) भी। कुछ प्राचीन बर्तन के कुछ टुकड़े (पीजीडब्लू) महाभारत काल के प्रतीत होते हैं। ऐसे टुकड़े वैशाली में मिले हैं। इनपर शोध किया जा रहा है। नौ स्थलों पर एनबीपीडब्लू मिले हैं जो वहां नगरीय सभ्यता के विकसित होने का साक्ष्य माना जा रहा है। 22 जगहों पर बीआरडब्लू (मृदभांड) मिले हैं जो पाषाणकाल और नगरीय सभ्यता के बीच के दौर का है। बिहार में कुषाणकाल इकलौता स्तूल जगरिया पहाड़ी पर मिला। कुषाण राजा का प्रभाव भी इस इलाके में रहा है, इसके अन्य प्रमाण भी मिले हैं। टीम द्वारा चिह्नित स्थलों में 40 मुगलकाल के बताए गए हैं।

========

भागलपुर जनपद ऐतिहासिक विरासतों से भरा पड़ा है। खोज टीम की रिपोर्ट भारत सरकार को भेज दी गई है। हम वहां के चयनित स्थलों में से एक दर्जन से अधिक संरक्षित करेंगे। इसका प्रस्ताव भी भारत सरकार को भेज दिया गया है। सरकार से लाइसेंस मिलने के बाद वहां खोदाई का कार्य भी शुरू किया जाएगा। इसमें अभी एक वर्ष लग सकता है।

डॉ. अतुल कुमार वर्मा

संयुक्त सचिव, पुरातत्व विभाग, बिहार सरकार

By Jagran 
(http://www.jagran.com/news/state-historical-news-16489041.html?src=RN_detail-page)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *