मशीन त॑ नै छेकै मानव

अबरी दाफी (अंगिका कॉलम) / कुंदन अमिताभ

जिनगी जीत॑-जीत॑ ऐसनऽ लगै छै कि कहीं अपना सब मशीन ऐसनऽ त॑ व्यवहार नै करै लगलियै । खास करी क॑ आजकऽ इंटरनेट केरऽ जमाना म॑ भ्रम जादे पैदा होय रहलऽ छै । व्यवहार म॑ स॑ निच्छलता गायब होय रहलऽ छै । सथ॑ दिमाग म॑ दुविधा जादे मात्रा म॑ जौरऽ होय रहलऽ छै ।

अब॑ फेसबुक या वाट्सएप प॑ रोज जाय क॑ कुछ लाइक करना आरू कुछ पोस्ट लिखना आस्त॑ – आस्त॑ रोजमर्रा केरऽ काम म॑ शामिल होय रहलऽ छै । एकरऽ साथ-साथ ई भी होय रहलऽ छै कि अपनऽ बहुमूल्य समय ई चीजऽ म॑ लगाबऽ कि केकरऽ-केकरऽ केतना नया पोस्ट छै । या कि फिर हर क॑ लाइक आऱू हर प॑ कमेंट करऽ कैन्हेंकि सामने वाला भी करै छै तोरा पोस्ट क॑ । एक हद तक त॑ ई ठीक छै । कुछ अतिप्रतिभाशाली व्यक्ति सब लेली त॑ ई सब ठीक छै । लेकिन भेड़िया धसान ऐन्हऽ सब्भे द्वारा एक्के तरीका अपनाय लेना कहीं न कहीं ई दरसाबै छै कि खुद केरऽ अपनऽ मऽन प॑ जोर नै रही गेलै । अपना सब अनियंत्रित होय रहलऽ छियै ।

फेसबुक या वाट्सएप स॑ परे भी हौले-हौले अपना सब केना मशीन ऐसनऽ व्यवहार करै लगै छियै ओकरऽ पता भी नै चलै छै । कोय तनी टा बड़ाय भर करी दै छै त॑ मऽन खुशी स॑ बाँसों उछल॑ लगै छै । वहीं तनी टा कोय निंदा करै छै त॑ मने-मन कुढ़॑ लगै छै । मऽन छोटऽ होय जाय छै आरू गोस्सा स॑ भरी जाय छै ।

तनी टा ठहरी क॑ सोचला प॑ पता चलै छै कि ई स्वाभाविक तरीका नै छेकै व्यवहार के । वास्तव म॑ अपना सब बेवहरुओ होलऽ जाय रहलऽ छियै । एकरा स॑ उलट हर इंसान क॑ ई आजादी छै कि वू अपनऽ मऽन मुताबिक व्यवहार कर॑ । एकरऽ मतलब ई कि अगर कोय  हमरऽ बड़ाई कर॑ त॑ जरूरी नै छै कि ओकरा स॑ खुश होलऽ जाय ।  ठीक ओन्हैं जों कोय हमरऽ बुराई करै छै त॑ जरूरी नै छै कि दुःख होलऽ जाय ।

हमरा लगै छै कि कोय भी इंसान केकरो द्वारा थोपलऽ गेलऽ हर प्रश्न केरऽ उत्तर दै लेली बाध्य नै छै । दोसरऽ द्वारा करलऽ गेलऽ हर तरह के व्यवहार केरऽ प्रतिक्रिया म॑ कोय न कोय तरह के हरकत करलऽ जाय, ई जरूरी नै छै । तनी देर लेली आज स॑ बीस साल पहलकरऽ जमाना म॑ लौटी जाय के जरूरत छै । जब॑ मोबाईल आरू इंटरनेट नै छेलै । केकरो क्रिया प॑ दोसरो द्वारा प्रतिक्रिया देना ओतना आसान नै रहै । लेकिन संबंध म॑ प्रगाढ़ता आरू मिठास बनलऽ रहै छेलै ।

जिनगी खाली क्रिया-प्रतिक्रिया केरऽ ही नाम नै छेकै । जिनगी खाली प्रश्न आरू उत्तर केरऽ ही नाम नै छेकै । जिनगी एकरा स॑ परे एगो ऐन्हऽ रस्ता प॑ चलतें-चल्लऽ जाय के नाम छेकै जहाँ बिना बोललें भी बहुत कुछ सुनाई परै छै, आरू बिना कुछ रहलें भी सब कुछ दिखाई परै छै ।