तनी टा हटी क॑ महाकुंभ

तनी टा हटी क॑ महाकुंभ

—  कुंदन अमिताभ —

जोंय तोंय बरसात केरऽ मौसम मं॑ कुंभ मेला देखै के कार्यक्रम बनाय रहलऽ छहो त॑ निश्चित रूप सं॑ इ  महाराष्ट्र केरऽ तीर्थ नगरी नाशिक व त्रयंबकेश्वर मं॑ सिंह राशि मं॑ सूर्य केरऽ प्रवेश के साथ शुरू होय वाला नाशिक कुंभ मेला ही छेकै. सिंह राशि मं॑ सूर्य केरऽ प्रवेश के साथ शुरू हुऐ के चलतें इ मेला क॑ नाशिक कुंभ के अलावा सिंहस्थ कुंभ के नाम सं॑ भी जानलऽ जाय छै.

कुंभ पर्व क॑ आयोजन क॑ ल॑ क॑ दो-तीन पौराणिक कथा प्रचलित छै जेकरा मं॑ सं॑ सर्वाधिक मान्य कथा देव-दानवऽ द्वारा समुद्र मंथन सं॑ प्राप्त अमृत कुंभ सं॑ अमृत बूँद गिरै क॑ ल॑ क॑ छै. इ कथा के अनुसार महर्षि दुर्वासा केरऽ शाप के कारण जब इंद्र आरू अन्य देवता कमजोर हो गेलै त॑ दैत्य सीनी न॑ देवता पर आक्रमण करी क॑ ओकरा परास्त करी देलकै. तब सब देवता मिली क॑ भगवान विष्णु के पास गेलै आरू हुनका सारा वृतान्त सुनैलकै. तब॑ भगवान विष्णु न॑ हुनका सीनीक॑ दैत्यऽ साथें मिली करी क॑ क्षीरसागर केरऽ मंथन करी क॑ अमृत निकालै के सलाह देलकै. भगवान विष्णु के ऐन्हऽ कहला पर संपूर्ण देवता दैत्यऽ साथें संधि करीक॑ अमृत निकालै के यत्न मं॑ लगी गेलै. अमृत कुंभ के निकलथैं देवता सीनी के इशारा सं॑ इंद्रपुत्र ‘जयंत’ अमृत-कलश क॑ ल॑ करीक॑ आकाश मं॑ उड़ी गेलै. ओकरऽ बाद दैत्यगुरु शुक्राचार्य के आदेशानुसार दैत्यसीनी न॑ अमृत क॑ वापस लै लेली जयंत के पीछा करलकै आरू घोर परिश्रम केरऽ बाद बीच रास्तै मं॑ ही जयंत क॑ पकड़ी लेलकै. तत्पश्चात अमृत कलश पर अधिकार जमाबै लेली देव-दानवऽ मं॑ बारह दिन तलक अविराम युद्ध होतं॑ रहलै.

इ परस्पर मारकाट केरऽ दौरान पृथ्वी केरऽ चार स्थानऽ (प्रयाग, हरिद्वार, उज्जैन, नासिक) पर कलश सं॑ अमृत बूँद गिरलऽ रहै. इ शुभ काम मं॑ सूर्य, चंद्र, शनि आरू बृहस्पती (गुरू) न॑ आपनऽ-आपनऽ बडऽ योगदान देनै रहै. कलह शांत करै लेली भगवान न॑ मोहिनी रूप धारण कर यथाधिकार सबक॑ अमृत बाँटी क॑ पिलाय देलकै. इ प्रकार देव-दानव युद्ध के अंत करलऽ गेलऽ रहै. अमृत प्राप्ति लेली देव-दानवऽ मं॑ परस्पर बारह दिन तक निरंतर युद्ध होलऽ रहै. देवता सीनी के बारह दिन मनुष्यऽ के बारह वर्ष के तुल्य होय छै. जोन समय मं॑ चंद्रादिकऽ न॑ कलश के रक्षा करन॑ रहै, वू समय के वर्तमान राशियऽ पर रक्षा करै वाला चंद्र-सूर्यादिक ग्रह जब॑ आबै छै, वू समय कुंभ के योग होय छै अर्थात जोन वर्ष, जोन राशि पर सूर्य, चंद्रमा आरू बृहस्पति के संयोग होय छै, ओहे वर्ष, ओहे राशि के योग मं॑, जहाँ-जहाँ अमृत बूँद गिरलऽ रहै, वहाँ-वहाँ कुंभ पर्व होय छै. इ स्थान छेकै- हरिद्वार, प्रयाग (इलाहाबाद), त्र्यंबकेश्वर आरू उज्जैन.

नाशिक महाकुंभ केरऽ अलग छटा

नाशिक महाकुंभ केरऽ अलग छटा

विष्णू पुराण केरऽ अनुसार कुंभ योग चार तरह के होय छै. जब॑ गुरू कुंभ राशि मं॑ होय छै आरू सूर्य मेष राशि मं॑ प्रविष्ट होय छै, तब॑ कुंभ पर्व हरिद्वार मं॑ लगै छै. जब॑ गुरू मेष राशि चक्र मं॑ प्रवेश करै छै आरू सूर्य, चन्द्रमा मकर राशि मं॑ माघ अमावास्या केरऽ दिन होय छै तब॑ कुंभ के आयोजन प्रयाग (इलाहाबाद) मं॑ करलऽ जाय छै. सूर्य आरू गुरू सिंह राशि मं॑ प्रकट होला पर कुंभ मेले के आयोजन नाशिक (महाराष्ट्र) मं॑ गोदावरी नदी केरऽ उद्गम (त्र्यंबकेश्वर) तट पर लगै छै. गुरू कुंभ राशि मं॑ प्रकट होला पर उज्जैन मं॑ कुंभ मेला लगै छै.

ढाई मास तलक चलै वाला इ मेला बाँकी तीन जग्घऽ पर लगै वाला मेला सं॑ कुछ-कुछ मामला मं॑ थोड़ा अलग आरू विशेष छै. प्रयाग (इलाहाबाद), हरिद्वार आरू उज्जैन सं॑ अलग नाशिक मं॑ कुंभ केरऽ आयोजन दू अलग-अलग जग्घऽ पर करलऽ जाय छै. वैष्णव सन्यासी केरऽ अखाड़ा नाशिक मं॑ रहै छै जबकि शैव सन्यासी केरऽ त्रयंबकेश्वर मं॑. नासिक आरू त्र्यंबकेश्वर केरऽ बीच केरऽ दूरी करीब 28 कि.मी. छै. जहाँ इलाहाबाद केरऽ कुंभ 5000 एकड़, उज्जैन केरऽ कुंभ4200 एकड़ आरू हरिद्वार केरऽ कुंभ 4000 एकड़ जमीन पर लागै छै वहीं नाशिक-त्र्यंबकेश्वर केरऽ कुंभ खाली 325 एकड़ जमीन पर ही लागै छै. हरिद्वार आरू प्रयाग (इलाहाबाद) म॑ कुंभ मेला गंगा  तट पर, उज्जैन म॑ क्षिप्रा तट पर जबकि नाशिक-त्र्यंबकेश्वर केरऽ कुंभ गोदावरी केरऽ तट पर लगै छै.

नाशिक-त्र्यंबकेश्वर केरऽ गोदावरी केरऽ तट पर लागै वाला कुंभ बरसात केरऽ मौसम मं॑ लागै वाला एकमात्र कुंभ छेकै, बाकी सब जगह ठंड के मौसम मं॑ कुंभ लागै छै. सीमित मात्रा मं॑ उपलब्ध जमीन – वू भी पहाड़ी जमीन, उपर सं॑ बरसात के मौसम आरू भक्तऽ के संख्या लाखों मं॑ .ऐना मं॑ आयोजकऽ लेली इ बहुत बड़ऽ चुनौती रहै छै कि सब कुछ ठीक-ठाक सं॑ संपन्न होय जाय. कैन्हें कि नासिक के घाटऽ पर कम जग्घऽ रहला के कारण अक्सर हादसा होतं॑ रहै छै. कहलऽ जाय छै कि 1790 ई. मं॑ शाही स्नान क॑ ल॑ क॑ साधु सीनी के बीच विवाद होय गेलऽ रहै, जेकरा चलतें करीब बारह हजार साधू मारलऽ गेलऽ रहै.

हालाँकि 14 जुलाई सं॑ 25 सितंबर – 2015 तलक चलै वाला अबरकऽ सिंहस्थ कुंभ मं॑ तीन लाख साधु क॑ ठहरै लेली साधुग्राम बनैलऽ गेलऽ छै. पर्यावरण क॑ कम सं॑ कम नुकसान पहुँच॑ एकरऽ जागरूकता फैलाबै लेली इ कुंभ क॑ हरित कुंभ केरऽ नाम देलऽ गेलऽ छै. इ कुंभ के सभसं॑ महत्वपूर्ण बात जे हृदय मं॑ नवजीवन केरऽ संचार करै छै – वू छेकै इ कुंभ मं॑ पलास्टिक पर पाबंदी. वैकल्पिक व्यवस्था के तहत हर श्रद्धालु क॑ कपड़ा के थैला मुफ्त मं॑ देलऽ जैतै.

ऐसनऽ महाकुंभ मं॑ भला केकरौ मन नै होतै विश्वास आरू आस्था केरऽ ऐन्हऽ डुबकी लगाबै के जेकरा सं॑ बुराई केरऽ सर्वनाश होय क॑ जीवन मं॑ सौभाग्य केरऽ पदार्पण हुऐ सक॑.

Angika Samvad – Abri Dafi : अंगिका संवाद – अबरी दाफी  : तनी टा हटी क॑ महाकुंभ
Columnist (स्तंभकार) : Kundan Amitabh (कुंदन अमिताभ)