हिंदी दिवस प॑ चलऽ ‘पुस्तक गाँव’ के सैर प॑

अबरी दाफी (अंगिका कॉलम) / कुंदन अमिताभ

ई हिंदी दिवस प॑ धियान बार-बार महाराष्ट्र केरऽ एगो गाँव दन्न॑ चल्लऽ जाय छै । गाँव के नाम छेकै ‘भिलार’ । मुंबई स॑ कुछ दूरी प॑ एगो बड़ा रमणीक पहाड़ी शहर छै महाबलेश्वर जहाँ स॑ लगीच प॑ ही बसलऽ छै ई गाँव । गाँव नै पुस्तक गाँव – भिलार । एकरा मराठी म॑ ‘पुस्तकांचं गाँव’ नाम देलऽ गेलऽ छै । महाराष्ट्र केरऽ शिक्षामंत्री विनोद तावड़े केरऽ नेतृत्व म॑ राज्य सरकार केरऽ ई पुस्तकांचं गाँव योजना क॑ मराठी भाषा विभाग केरऽ सहयोग स॑ पूरा करलऽ गेलऽ छै । ई गाँव क॑ इंगलैंड केरऽ वेल्स शहर स्थित ‘हे ऑन वे’ कस्बा केरऽ तर्ज प॑ बनैलऽ गेलऽ छै । ई गाँव केरऽ विशेषता छेकै कि ई गाँव केरऽ पच्चीस घरऽ म॑ स॑ हर घरऽ के एगो हिस्सा म॑ खास विषय प॑ पुस्तक रखलऽ गेलऽ छै । विविध विषयऽ प॑ उपलब्ध ई पुस्तकऽ के संख्या पच्चीस हजार के आसपास छै । सबस॑ महत्वपूर्ण बात ई छै कि ई पुस्तक गाँव म॑ जल्दिये हिंदी भाषा मं॑ पुस्तक भी उपलब्ध करैलऽ जैतै ।

ई गाँव क॑ पुस्तक गाँव के रूप म॑ तैयार करै लेली गाँव के चालीस लोगऽ न॑ इच्छा जतैन॑ छेलै, जेकरा म॑ स॑ फिलहाल पच्चीस घरऽ के चयन करलऽ गेलऽ छै । जेकरा म॑ साहित्य, कविता, धर्म, महिला, बूतरू, इतिहास, पर्यावरण, लोक साहित्य, जीवन आरू आत्मकथा विषय केरऽ किताब उपलब्ध छै । जोन घरऽ म॑ जोन विषय स॑ संबंधित पुस्तक रखलऽ छै ओकरऽ बाहर वू विषय स॑ संबंधित साहित्यकारऽ के चित्र भी लगैलऽ गेलऽ छै । मकानऽ म॑ पाठक सिनी क॑ बैठी क॑ पढ़ै केरऽ इंतजाम भी करलऽ गेलऽ छै ।  कुछ मकानऽ म॑ पाठकऽ के ठहरै आरू खाबै के भी इंतजाम छै। गाँव म॑ दू गो रेस्टोरेंट भी छै । यहाँ एगो मिनी थियेटर बनाबै के योजना भी छै । अब॑ सरकार ई गाँव म॑ साहित्य महोत्सव आयोजित करै के योजना बनाय रहलऽ छै । गाँव म॑ डेढ़ लाख किताब उपलब्ध कराबै के योजना छै । आबै वाला दिना म॑ गाँव म॑ ओपन एयर वाचनालय भी शुरू करलऽ जैतै ।

मूल रूप स॑ स्ट्रॉबेरी केरऽ खेती लेली मशहूर ई गाँव क॑ पुस्तक गाँव घोषित करला के बाद यहाँ पर्यटक केरऽ संख्या म॑ बढ़ोत्तरी होलऽ छै । ई गाँव म॑ कुछ किताबऽ के ऑडियो रूप भी उपलब्ध छै ।  ई गाँव म॑ जल्दिये हिंदी केरऽ पुस्तक भी उपलब्ध करैलऽ जैतै । जेकरा स॑ पर्यटन केरऽ दृष्टि स॑ आबै वाला हिंदी भाषी सब क॑ भी पठन-पाठन केरऽ लाभ मिल॑ सक॑ । ई परियोजना वू पर्यटक सब लेली खास बनी गेलऽ छै जेकरा कि भाषा आरू साहित्य स॑ प्रेम आरू विशेष लगाव छै । गांव केरऽ आबादी हजार स॑ जादा नै छै । लेकिन हर साल  स्ट्रॉबेरी फसल स॑ करोड़ों रुपया कमाय वाला ई गाँव केरऽ किताबऽ लेली जुनून ई गाँव क॑ एगो अलग पहचान दै छै ।

हलाँकि महाराष्ट्र केरऽ ग्रामीण इलाका म॑ लाइब्रेरी स्थापित करै के ई पहलऽ प्रयास नै छेकै । एकरऽ पहल॑ भी ग्रामीण व्यवसायी आरू कार्यकर्ता प्रदीप लोखंडे न॑ महाराष्ट्र केरऽ ग्रामीण स्कूलऽ म॑ १२५५ पुस्तकालय बनवाबै म॑ मदद करन॑ छेलै । हर घर पुस्तकालय केरऽ नारा स॑ प्रेरित देश केरऽ पहलऽ पुस्तक ग्राम भिलार दरअसल ई बात क॑ धता बताय रहलऽ छै कि पुस्तक आरू पुस्तक पढ़ै वाला के जमाना अब॑ बीती चुकलऽ छै।

दरअसल ऐसनऽ माहौल अपनऽ अंग प्रदेश म॑ भी बहुत पहिन॑ मौजूद रहै । जब॑ हम्मं॑ बहुत छोटऽ छेलियै त॑ हमरा गामऽ के पुस्तकालय हमरे द्वारी प॑ छेलै । पुस्तकालय के नाँव छेलै – गाँधी पुस्तकालय । ई पुस्तकालय म॑ हिंदी केरऽ प्रमुख साहित्यकारऽ सिनी के अलावा अंग्रेजी भाषा केरऽ भी प्रायः हर प्रसिद्ध लेखक केरऽ किताब मौजूद रहै ।  हर उमर वाला लेली तरह-तरह के किताब रहै छेलै । अध्ययन केरऽ एगो अलग माहौल रहै छेलै । हम्म॑ अपनऽ जिंदगी म॑ जेतना किताब गाँव म॑ रही क॑ ई पुस्तकालय के माध्यम स॑ पढ़लियै ओतना गाँव छोड़ी क॑ शहर आबी क॑ नै पढ़॑ पारलियै ।

आशा छै जे भारत केरऽ पुस्तक आरू पुस्तकालय आंदोलन केरऽ ई नया अध्याय आपनऽ हिंदी व अन्य भारतीय  भाषा व संस्कृति के प्रति अलख जलाय क॑ ज्ञान-समृद्ध व सशक्त समाज केरऽ परिकल्पना क॑ एगो मूर्त रूप दै म॑ कामयाबी हासिल करतै ।