सुखरात म॑ आतिशबाजी स॑ निजात

अबरी दाफी (अंगिका कॉलम) / कुंदन अमिताभ

हर साल जब॑ सुखरात (दिवाली) आबै वाला रहै छै आरू आबी क॑ चल्लऽ जाय छै, इ मुद्दा चरम चर्चा म॑ रहै छै कि आतिशबाजी आरू आतिशबाजी जनित प्रदूषण स॑ केना निजात पैलऽ जाय। तरह-तरह के तर्क-वितर्क, तरह-तरह के बयानबाजी, तरह-तरह के पाबंदी के दौर चलै छै। तमाम तरह के विनम्र आग्रह भी करलऽ जाय छै। शुरू म॑ एन्हऽ प्रतीत होय छै कि शायद अबरी दाफी आतिशबाजी नियत्रण म॑ रहतै। एन्हऽ भी अनुमान लगै छै कि बढ़त॑ मँहगाई के चलत॑ एकरा पर कुछू लगाम लगतै। धीर मऽन अधीर होय जाय छै जब॑ सब चीज क॑ धता बतलैत॑ छोटी दिवाली के रात स॑ ही आतिशबाजी केरऽ अतहीन स॑ नजर आबै वाला दौर शुरू होय जाय छै। करोङऽ रूपया आगिन म॑ झोकी देलऽ जाय छै। भारतीय क्रिकेट टीमऽ द्वारा विभिन्न अन्तराष्ट्रीय, राष्ट्रीय, आय।पी। एल। मैच जीतला पर आतिशबाजी केरऽ प्रदर्शन त॑ होतै छै,  पर दिवाली म॑ आतिशबाजी आपनऽ चरम पर रहै छै।
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एकरा स॑ कि ई बात  साफ होय  छै कि आतिशबाजी आरो आतिशबाजी जनित वायु तथा ध्वनि प्रदूषण के रोकथाम लेली सामाजिक आरू सरकारी स्तर पर होय रहलऽ प्रयास  के प्रति जनमानस कुछ खास सवेदनशील नै छै ?  मतलब जनमानस पर्यावरण के सुरक्षा के प्रति जागरूक नै छै ? या कि जागरूक रहत॑ हुऎ भी दिवाली केरऽ उत्सव क॑ समर्पित आरू   श्रद्धा  भाव स॑ मनाबै के मजबूर मानसिकतावश आतिशबाजी लेली विवश होय जाय छै ?

धन अपव्य्य आरू प्रचुर वायु तथा ध्वनि प्रदूषण के अलावा आतिशबाजी मानव स्वास्थय पर काफी गभीर प्रभाव छोङै छै। सुप्रीम कोर्ट के सख्त हिदायत छै कि आतिशबाजी  केरऽ तीव्रता १२५ डेसीबल ताँय सीमित राखलऽ जाय, पर खुला उल्लघन बदस्तूर जारी रहै छै। आखिर की वजह छै कि पर्यावरण के सुरक्षा के प्रति जागरूक रहते हुऎ भी जनमानस दिवाली ऐत॑-ऐत॑ आतिशबाजी लेली मजबूर होय जाय छै। कि सामान्यत: समाज केरऽ धनाढ्य वर्ग जेकरऽ एकरा म॑ जादे योगदान छै आरू जिनका लेली आतिशबाजी एगऽ स्टेटस सिबल बनी चुकलऽ छै, ही एकरा लेली मुख्यरूपेण जिम्मेवार छै? आखिर  कैन्ह॑ दीपावली आज पटाखावली बनी क॑ रही गेलऽ छै ? आखिर जागरूकता अभियान केरऽ विफलता  के की वजह छै? तह म॑ जाना जरूरी नै छै ?

आतिशबाजी स॑ जुङलऽ सख्त कानून केरऽ अभाव, पारपरिक पटाखा केरऽ पर्याय पर्यावरण-अनुकूल पटाखा केरऽ घोर अनुपलब्थता आरऽ अपर्याप्त सरकारी सरक्षण तथा अपर्याप्त प्रचार-प्रसार,  अपर्याप्त योजनाबद्ध जागरूकता अभियान आदि ऐन्हऽ अनेक वजह छै जेकरा चलत॑  जनमानस चाही करी क॑ भी पारपरिक पटाखा के त्याग नै कर॑ पाबी रहलऽ छै।

सबस॑ महत्वपूर्ण छै सही तथ्य क॑ जानना, ओकरा  मानना, आरू मानी करी क॑ सही दिशा क॑ अख्तियार करना। जरूरत छै पारपरिक पटाखा केरऽ पर्याय पर्यावरण-अनुकूल पटाखा क॑ अपनाबै के। पारपरिक पटाखा  के विपरीत पर्यावरण-अनुकूल  पटाखा कोय धुँआ या आग नै निकालै छै। पर्यावरण-अनुकूल  पटाखा , वैक्यूम कम्बशन टेकनीक आधारित होय छै, जेकरा स॑ कोय धुँआ या आग नै निकलै छै आरू इ लेली स॑ इ एगऽ छोटऽ बच्चा लेली भी सुरक्षित छै। वैक्यूम कम्बशन टेकनीक आधारित पर्यावरण-अनुकूल  पटाखा क॑ घर के अन्दर भी छोङलऽ जाब॑ सक॑ छै कैन्ह॑ कि एकरा स॑ निकलै छै खाली आवाज आरऽ रग-बिरगा कागजऽ के टुकङा। एकरऽ दाम भी पारपरिक पटाखा स॑ बहुत कम रहै छै।

कि पश्चिम देश ऐन्हऽ यहाँ भी  जब तलक आतिशबाजी सबधी कानून सख्त  नै बनी जाय छै, आरू सख्ती स॑ लागू नै होय जाय छै, आतिशबाजी पर लगाम लगाना नामुमकिन छै? दीपावली पर्व छेकै मधुर शब्द आरू भावना क॑ मिठाई जैन्हऽ लोगऽ म॑ बाटे के जेकरा स॑ राग आरू द्वेष  जीवन स॑ पटाखा जैन्हऽ बिलाय जाय। दीपावली अवसर छेकै पुरानऽ गलतफहमियऽ क॑ भूली करी मिलीक॑ उत्सव मनाबै के। अपना क॑ अनुसरण करना छै ऐन्हे परिपाटी क॑ जेकरा स॑ पटाखा के चलत॑ इ धरती आरू जीवन बिलाबै स॑ बचलऽ रह॑। आबऽ ज्ञान और प्रज्ञा केरऽ दीप जलैलऽ जाय। दिवाली के उत्सव मनैलऽ जाय आरू जीवन क॑ उत्सव बनैलऽ जाय।  आबऽ प्रण ल॑ शान्ति फैलाबै के, लोगो क॑ प्रेम आरू उत्साह म॑ जोड़ै के आरू समृद्धि लान॑ के। आबऽ पर्यावरण-अनुकूल पटाखा  अपनाय क॑   दीपावली पर्व क॑ पर्यावरण सुरक्षा के महापर्व के रूपऽ म॑ मनाना शुरू करै के दिशा म॑ एगऽ डेग भरलऽ जाय।

– कुंदन अमिताभ

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