डर लगै छै बुढबा से

बासी-टटका (अंगिका कॉलम) / राकेश पाठक

अभी बेसी दिन नै होली घै। धरती पर गिरलऽ खून अभी जॉंच सुखलऽ नै छै। सौंसे देशऽ के कलम जीवी के मनऽ दहशत अभी जॉंच बनलऽ छै। पता नै कखनी केकेरऽ नम्बर आबी जाच गोली के शिकार बनै के। रूक विशेष प्रकार के हत्या के दौर चललऽ छैले देशऽ में। विशेष प्रकार के ईंलेली कि हत्या के इ दौर में जे भी मरलऽ छैले वूलग-मग पैसह से अस्सी बरिस के बूढा छैले। बुद्दिवादी छैले। स्वतंञ विचारक छैले। धार्मिंक रूढीवाद के, धार्मिंक आइम्बर के, अंधविश्वास के विरोधी छैले। विद्वता के उच्च शिखर पर आसीन छैले। पहिले तऽ ओकरा धमकैला गेलै। लिखै से, बीलै से मना करलऽ गेलै। ज बवू सिनी सत्य पथ से नै डिगलै तबे उ सिनी के मुँह बन्द करी देलऽ गेलै गोली मारी के।

               मरै बला में से एक हा अस्सी बरस के वृद्द (नाम अपने सब जानै धियै।) मूर्तिं पूजा के विरोधी छैले। मूर्तिं पूजा के खिलाफ बोलै धेलै। लिखयै छैले। बूढो छैले मतरकी हिम्मत बला छैले। जब जॉच जिन्दा छैले तब जॉच अकेले विरोध करलकैं। मरला पर सरकार, अतिवादी के खिलाफ ऐतना विरोधी खडा करी देलकें कि देश-विदेश में सरकार के नाक कटै लेगलै।

        मूर्तिं पूजा के विरोध मे तऽ कबीरऽ जी खडा धेलात हिन्दू अतिवादी सिनी, धरम के धजा फहराबै बला सरकार के हिन्दू सिनी कबी के दोहा नै पढने छै-”पत्थर पूजे हरि मिलै तो कबीरा पूजे पहाड।” हिन्दू अतिवादी के छै हिम्मत कि कबीर दास के ‘बीजक‘ के जएबे पारै छै छै हिम्मत कि बनारस के कबीर चैरा में जाच के कोच कबीर पंथी के गोली से उडाबै के जदि ऐसनऽ होतै तऽ देश-विदेश के लाखों-करोडो कबीर पंथी सिनी के वू ताण्डन मच है कि ओकरा रोकना सरकार के कूबत से बाहर होच जै तै। भगवावादी जे आज भगवा झंडा उडाय-उडाय के राम मंदिर बनाबै के अलाप लै रहलऽ छै बू कबीर के ईं बानी मै पढने छै -”मन न रंगाये रंगाये जोगी कपए। आसन मारी मंदिर में बैढे। नाम छॉडी पूजन लागे पधरा।”

            जहॉ जॉच मूर्तिं पूजा के बात छ तऽ हमरा सिनी के सामने एक हा नै, कै हा जमीनी सच्चाईं छै। पुल टूटी गेलै छढ पूजा करै लेली जाच बला छढ माच के कत्ते भक्त सिनी के जान चतलऽ गेलै। यहॉ जॉच कि अबोध बुतरू सिनियों पर छढ माच के दया नै ऐलै। छढ माच अपनऽ कीच शक्ति नै देखैलकी। टूटी बला पुल के पत्थर केरऽ पुल में नै बदली देलकी। केदार नाथ घाटी में अचानक बाढ आबी गेलै। केदार बाबा केरऽ सैकडो भक्त जनानी-मर्दांनी, बच्चा-बतढ के अकाल मौत होय गेलै। केदार बाबा पत्थर के मूर्तिं बनलऽ रही गेला। अपनऽ भक्त सिनी के बचाबै लेली बाढ के पानी नै रोकलका। सौंसे केदार घाटी में

सडलऽ मुर्दां के दुर्गंन्ध भरी गेलै। भवान पत्थर के मूर्तिं बनी के बैढले रही जाच घेत, उग्रवादी मंदिर मे धुसी के गोली बरसाथ के भक्त के जाच लै लै छै। भगवान कोच ऐसनऽ चमत्कार नै करै धेत जेकए से उग्रवादी के ए.के.47 खराब होच जाच। भक्त सिनी के जान बची जाच। भगवान मंदिर मे बैढले रही जाच घेत, चोर चोरी करी के हुन्कऽ सोना-चॉदी चोराच लै छै। भगवान चोर के चोरी नै करै के सद्बुद्दि नै दै धेञ, जबे कि गीता में साफ लिखलऽ छै कि भगवान के इच्छा के विसद्द पञा तक नै हिलै छै। राम मंदिर बनाबै वला भगवावादी राम भक्त ईं प्रश्न के उत्तर देवे पारै धेत कि ईं निर्मंम हत्या के बादऽ भगवा न मौन कैहने रही जाच धेत। भक्त के बचाबै ले ली मूर्तिं फाडी के भगवान कैहने नै परगट होय जाच धेत भगवान के मूर्तिं  में सत छै मंदिर में, पत्थर में  भगवान धेत जद्दी मूर्तिं भक्त के बचाबै नै पारेै छै तबे मंदिर के, मूर्तिं के साथे कता की छै एकरा से तऽ नरसिंह भगवान के परगट होच के कथऽ असत्य होय जाच छै।

          आज मूर्तिं पूजा के विरोध करै बला बुद्दिवादी, स्वतंञ विचारक वृद्द करी है के कारण ईं छै कि हिन्दू अतिवादी, भगवावादी सिनी के ईं बुढबा सिनी से डर लगी रहलऽ छै। भगवावादी सिनी धार्मिंक उन्माद भइकाथ के, अंधविश्वास के, धार्मिंक वाह्याडम्कर, मूर्तिं निमोण आरन्दी के सहारा लै के सत्ता के शिखर तक पहुँचलऽ छै। ओकरऽ सत्र। तभि ये जॉच बनलऽ रहतै जब जॉच देश के वोटर धार्मिंक अफीमी के नशा में बेहोश रहतै। जहॉ ओकरा सिनी के भीतर ईं बुद्दिवादी वृद्द सिनी के बात माथा में धुसी जैतै, धार्मिंक अफीमी के नशा उतरी जैतै मूर्तिं पूजा के निरर्धंकता के बारे में सोचे लगतै तम्हिए ईं भगवावादी सत्ता समाप्त होय जैतै। हिन्दू अतिवादी धर्मंर्कं रक्षा नै करी रहलऽ छै। बुद्दिवादी, स्वतंञ चिंतक बुढवा सिनी के मारी के अपनऽ भगवावादी सत्ता के बरकएट रखी रहलऽ छै। जेकरा सिनी से ओकरा डर लगी रहलऽ छै ओकरा खतम करी रहलऽ छै।

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