खाय पिन्हैयऽ पर आफत

बासी-टटका (अंगिका कॉलम) / राकेश पाठक

पता नै अच्छा दिन ऐलऽ छै कि खराब दिन । पैहलें कहलऽ जाय छेलै – ‘आप रूप भोजन, पर रूप सिंगार ।’ मतुरकी अब उलटा गेलै । अब तोंय आपनऽ पसंद के खाना नै खाब॑ पारै छ॑ । आपनऽ पसंद के कपड़ा नै पिन्ह॑ पारै छ॑ । यहाँ ताँय कि अपनऽ मऽन मोतबिक बोलैयऽ नै पारै छ॑ । विचार परकट नै कर॑ पारै छ॑ । हम्मं॑ जे खिलैभौं से हे खाय लेली पड़थौं । हम्मं॑ जे कहभौं सेहे पिन्है लेली पढ़थौं । कैन्हें कि हमरऽ राज छै । हम्मं॑ सरकार छियै । हमरा कहला स॑ बाहर तोंय केन्हौं क॑ नै जाब॑ पारै छ॑ । कैहने कि हमरऽ बनैलऽ अच्छा दिन येह॑ छै । तोरा खराब लगै छौं त॑ लगतं॑ रहौं । मुँह बंद करी ल॑ । ठोर सुइया-सूता स॑ सीबी ल॑ खोलभ॑ त॑ मुँहऽ मं॑ गोली भराय जैथौं । डाक्टर बला दबाय के गोली नै । हमरऽ दुनलिया के गोली । गोली अन्दर, दम बाहर बला गोली ।

नै, हमरऽ धरम मास खाय के ‘परमीसन’ नै दै छै । तोंय दोसरा धरम के मानै बला छिखो त॑ की भेलै । तोरऽ धरम मास खाय के परमीसन दै छै त॑ देतें रह॑ । मतुरकी तोंय, हमरऽ धरम के राज मं॑, हमरऽ धरम के शासन स॑ बरौ छ॑ । तोरा हमरऽ हुकुम मानै ल॑ पड़थौं । नै मानभ॑ त॑ मरऽ । या त॑ बात मानऽ या त॑ जग्घऽ छोड़ऽ । दू मं॑ एक त॑ तोरा करैये ले ली पड़थौं । हमरऽ धरम पालन के समय मं॑, हमरऽ पूजा पाठ के समय मं॑ शहर केरऽ एक टा भागऽ मं॑ नै, सौंसे शहर मं॑ सरकार के तरफ स॑ मास बिक्री पर निषेधाज्ञा लागू करी देलऽ जैतै । चाहे देश मं॑ विदेश म॑ एकरा ल॑ क॑ केतनऽ गदाल कैहन॑ नै हुअ॑ । अखनी त खाली मासे पर प्रतिबंध लगैलऽ जाय रहलऽ छै । जदी हमरऽ धरम के राज कायम रहतै तब॑ पियाज, लसून, बैंगन, मसुरी केरऽ दाल आरन्हियऽ पर प्रतिबंध लगैलऽ जैतै, कैहने कि ई सब चीज वैष्णव धरम म॑ नै खैलऽ जाय छै । संत-महात्मा, पंडित-पुरोहित ई सिनी खाय ले ली बारन करै छऽत । तैयार रहऽ हमरऽ धरम के राज मं॑ शासन मं॑ रहना छौं त॑ ई सब खाय के आदत अखनिये स॑ छोड़ी द॑ । सब दिन स॑ खैन॑ ऐलऽ छ॑ त॑ कि होलहौं । अब॑ खाना बंद करऽ । अच्छा दिन हम्मं॑ आनलियै कैहने ? अच्छा खिलाबै, पिलाबै लेली । अच्छा खाना छिकै दूध, दही, घी, गूड़, मधु, खीर । सात्विक भोजन । वेद पुरान म॑ कहन॑ छै, ‘अमृतम क्षीर भोजनम ।’ मांस भक्षण त॑ तामसी भोजन छिकै । हमरऽ वेद, पुराण सासत्रर म॑ लिखलऽ छै कि तामसी भोजन करला स॑ धरम भरस्ट हो जाय छै । देस के जनता हमरा जिताय क॑ गद्दी पर बैठैन॑ छै । धरम के दोहाय द॑ क॑ हम्मं॑ देसऽ के परधाती के कुरसी पर बैठलऽ छियै । हम्मं॑ देस के धरम भरस्ट केना  होब॑ देबै । हम्मं॑ तोरा आरू देसऽ के मांस खाय क॑ धरम भरस्ट ना होब॑ देबै । हरगिज नै । ई लेली हमरा तोरा गोली कैहने नै खिलाबै लेली पड़॑ । कोय बात नै छै । हमरऽ धरम केरऽ राज छै । धरम केरऽ सरकार छै । तो ई ल॑ क॑ गदाल करै छ॑ त॑ करतं॑ रहऽ । सैया भयल कोतवाल, डर काहे का ।

हों कपड़ो तोरा हमरे मऽन के मोतबिक पिन्है लेली पड़थौं । देस म॑ बलात्कार होय रहलऽ छै । तों गदाल करी रहलऽ छ॑ । तोंय सुन्हो नै, हमरऽ सरकार के नेता जी बलात्कार के बारे मं॑ की बयान देन॑ छेलै । हुनको साफ कहना छेलै कि बलात्कार लेली छौड़ी सिनी खुद्दे जिम्मेदार छै । वू एत्त॑ कम, एत्त॑ उत्तेजक कपड़ा पिन्है छै कि बलात्कारी आकरसित होय जाय छै । छौड़ी सिनी माथा पर ओढ़नी नै रखै छै येह॑ लेली ओकरऽ बलात्कार होय छै । हमरऽ दल के सरकार के जिम्मेदार मंत्री एतना गैर जिम्मेदाराना बयान केना देतै । छौंड़ी सिनी के, जनानी सिनी के एड़ी स॑ माथा ताँय झाँपी क॑ रक्खऽ । जिन्स टी सर्ट, पिन्है लेली नै दहऽ ।

जनता के की ? जनता त॑ कुछु स॑ कुछु कह॑ पार॑ छै । जनता त॑ यहऽ कह॑ पारै छै कि धरम मं॑ काली माय क॑ निर्वस्त्र कैन्हें छोड़ी देलऽ गेलऽ छै ? कि कोय माय अपनऽ भक्त बेटा के सामने निर्वस्त्र खड़ा होय क॑ पूजा लिय॑ पारै छै ? देवता के, देवी के मंदिर मं॑ काम क्रिड़ा रत मिथुन मूर्ति कैहने ? त॑ भाय ई सब धरम के बात छौं । सासत्तर पुरान मं॑ लिखलऽ छै । एकरा मं॑ मीन मेख निकालै बला तोंय के ? ई सिनी हमरऽ देसऽ के सनातन धरम के बात छै । येह॑ सिनी क॑ बरकरार रखै लेली त॑ हम्मं॑ धरम के दोहाय द॑ क॑ देस के परधानी के कुर्सी पर बैठलऽ छी । हमरा अपनऽ सनातन धरम के रक्षा करना छै ।  तोंय जेकरा पाखंड कहै छ॑,अनैतिक कहै छ॑, व्यभिचार कहै छ॑, ओह॑ भग-लिंग पूजा, मैथुन उपासना, तंत्र साधना के नाम पर मांस, मीन, मैथुन, मदिरा के पंचमकार के प्रयोग करना, सड़लऽ, गललऽ, अधजरलऽ, लहास गंगा मं॑ बहाय क॑ गंगा के जल क॑ प्रदूसित करी क॑ ‘गंगा माय के जय’ बोलना, मरनासन्न क॑ बेह॑ प्रदूसित गंगा जऽल पिलाय क॑ ओकरा आरो मरनासन्न बनाय देना त॑ हमरऽ धरम के आधार छै । हमरऽ धार्मिक कर्म छै । धरम पालन छै । धरम के ई धरती पर येन-केन प्रकारेण धरम के ध्वजा फहराना हमरऽ कर्तब्य छै । हमरऽ देसऽ के ई सनातन धरम कहियऽ नै बदल॑ पारै छै । हम्मं॑ धरम केरऽ देहरी लांघै ल॑ तोरा नै देभौं । तोरऽ खाना-पीना, कपड़ा-लत्ता, सच-विचार पर हरदम नजर रखभौं ।

यह॑ छिकै अच्छा दिन। धरम के दिन स॑ बढ़ी क॑ अच्छा दिन आरू कोन दिन हुअ॑ पारै छै ? तों अपनऽ मनऽ मं॑ गिनतं॑-गुँथत॑ रहऽ । सोचत॑-विचारत॑ रहऽ, अच्छा दिन एैलै कि बुरा दिन ? चाहे तोरऽ खाय पिन्है पर आफत कैहन॑ नै आबी जाय । हमरा एकरा सं॑ कोय फरक पड़ै बाला नै छै । हम्मं॑ अपनऽ अच्छा दिन बनैल॑ रखबऽ ।

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