आधऽ आबादी क॑ पूरा आजादी कब॑

 अबरी दाफी (अंगिका कॉलम) / कुंदन अमिताभ

अंतर्रास्ट्रीय महिला दिवस के लगीच रहला सं॑ महिला हक संबंधी चरचा के जोर पकड़ना लाजिमी ही छै । मीडिया मं॑ पढ़ी-सुनी क॑ आरू आम जीवन मं॑ देखी –सुनी क॑ खुसनुमा एहसास होय छै आरू ऐन्हऽ लौकै छै कि नै खाली भारत म॑ बल्कि पूरे दुनिया मं॑ महिला के हालत मं॑ बड़ा सुधार होय रहलऽ छै आरू महिला ससक्तीकरन के रफ्तार बड़ा तेज छै । ऐन्हऽ लगै छै जे महिला सिनी केरऽ हिस्सा मं॑ निरनायक ताकत आबी रहलऽ छै । महिला सिनी हर वू क्षेत्र म॑ सफलता के परचम फहराय रहलऽ छै जेकरा मं॑ अखनी तलक मरद सिनी के आधिपत्य छेलै । ई कुछ हद तक ही सही छै ।

गौर करला सं॑ पता चलै छै कि पढ़ाय-लिखाय, स्वास्थ्य, रोजगार, सुरक्षा सं॑ ल॑ करी क॑ आमजीवन केरऽ छोटऽ–छोटऽ साधन, सहुलियत, अधिकार के स्तर प॑ मरद आरू जनानी के बीच बहुत बड़ऽ फासला छै ।

मरद बाहुल्य समाज के तरफ सं॑ नित सभ्य समाज आरू सभ्य जीवन सैली केरऽ परिभासा गढ़लऽ जाय छै । आरो ओह॑ परिभासा क॑ औरत के चरित्र आरू जिंदगी केरऽ ऊपर लागू करै के बलजोबरी करलऽ जाय छै । वैन्हऽ सभ्य समाज जेकरा मं॑ जनानी सिनी खुली क॑ जिय॑ सक॑ आज भी एक सपना ही छै । समाज म॑ आपनऽ स्थिति बनाबै रखै लेली भी जनानी सिनी क॑ रोज ब रोज एगो अघोसित लड़ाय लड़ै ल॑ पड़ै छै, हर आपनऽ – परायऽ सं॑ ।

रोज-रोज के घटना ई एहसास दिलाबै ल॑ काफी छै कि बाहर त॑ बाहर आपनऽ घऽर मं॑ भी महिला सिनी असुरक्षित महसूस करै छै । घोर अमानवीय अत्याचार क॑ सहतं॑ हुअ॑ पेट मं॑ पली रहलऽ बच्ची के गर्भ क॑ गिराबै प॑ मजबूर होय ल॑ पड़ै छै । घऽर, दफ्तर सं॑ ल॑ क॑ खेत-खमार प॑, सिनेमाघरऽ सं॑ ल॑ क॑ स्कूल-कॉलेज तक मं॑ असलील हरकत आरू सारीरिक हमला तक के सिकार होय ल॑ पड़ै छै । जेकरऽ खिलाफ नगन्य मामला मं॑ ही कार्रवाई होय छै । अधिकांस मामला म॑ लीपापोती होय क॑ रही जाय छै ।

जहाँ तलक आपनऽ देस के बात छै, प्रधानमंत्री द्वारा घोसित ‘बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ’ कार्यक्रम महिला ससक्तीकरन केरऽ दिसा मं॑ उठैलऽ एगो बड़ऽ महत्वपूर्न कदम छै । वोन्हैं बिहार राज्य मं॑ लड़की सिनी क॑ इसकूल भेजै लेली साईकिल, भोजन व अन्य साधन उपलब्ध कराय क॑ देलऽ जाय रहलऽ प्रोत्साहन भी काबिले तारीफ छै । फिर भी एगो बात समझ सं॑ परे छै कि महिला ससक्तीकरन के लंबा-चौड़ा बात करै वाला राजनीतिक दल सिनी महिला सिनी क॑ ल॑ क॑ जों तनियो टा गंभीर छै, त॑ महिला आरक्षन विधेयक क॑ कानूनी दरजा दिलाय करी क॑ लागू कराय मं॑ एतना विलंब कैहने होय रहलऽ छै ?

ई सही छै कि महिला आरक्षन विधेयक के लागू होला स॑ जादे महिला सिनी क॑ राजनीति सं॑ जुड़ै के सहजता सं॑ मौका मिलतै । जेकरा सं॑ समाज मं॑ बहुत बड़ऽ बदलाव के अपेक्षा छै । जहाँ तलक राजनीति मं॑ महिला सिनी के भागीदारी के बात छै त॑ दुनिया केरऽ बाकी देसऽ के तुलना मं॑ भारत लगातार पिछड़तं॑ जाय रहलऽ छै । संसद मं॑ महिला सिनी के संख्या के मामला मं॑ भारत सन २०१४ ई. मं॑  ११७ वाँ स्थान पर रहै जबकि आजकऽ तारीख मं॑ नीचं॑ गिरी क॑ ई १४४ वाँ स्थान प॑ पहुँची गेलऽ छै । ऐसनऽ तब॑ छै जब॑ अखनकऽ लोकसभा मं॑ महिला सांसदऽ के संख्या अखनी तलक के राजनीतिक इतिहास मं॑ सबसं॑ जादा छै । लोकसभा मं॑ महिला सांसद केरऽ हिस्सा १२ फीसदी छै, जबकि राजसभा मं॑ ई हिस्सा १२.८ फीसदी छै ।  जब॑ कि दुनिया भर मं॑ महिला भागीदारी केरऽ ई औसत २२ छै । भारतीय राजनीति मं॑ महिला केरऽ भागीदारी के नकारात्मक पहलू ई छै कि राजनीति मं॑ वंसवाद आरू वोट पॉलिटिक्स के हिसाब स॑ ही अखनी तलक ई वर्ग क॑ भागीदारी मिललऽ छै नै कि कोनो सरोकार के तहत । आय भी आपनऽ समाज मं॑ महिला केरऽ कोनो स्वतंत्र आवाज नै रहला सं॑ जादातर राजनीतिक दल महिला मुद्दा प॑ जाना-तेना बात करी क॑ खाली खानापूर्ती ही करै छै । नीतिश कुमार न॑ स्थानीय पंचायत व निकाय के चुनावऽ मं॑ जनानी सिनी क॑ पचास फीसदी आरक्षन द॑ करी क॑ एगो ठोस रस्ता जरूर दिखैन॑ छै । जेकरा स॑ महिला नेतृत्व केरऽ एगो नया फौज तैयार होतै । ऐन्हऽ फौज जेकरा कि जमीनी हकीकत सं॑ रूबरू होय क॑ बुलंद हौसला के साथ अपनऽ नेतृत्व क्षमता मं॑ पारंगत होय क॑ रास्ट्रीय आरू राज्यीय स्तर प॑ आगू आबै के मौका मिलतै ।  जमीनी हालत तभिये बदलतै जब॑ लोकसभा, राजसभा, विधानसभा, विधान परिसद, पंचायत आरू हर स्थानीय निकाय के साथ-साथ कानून क॑ मूर्त रूप दै वाला संस्था सिनी मं॑ महिला सिनी के भागीदारी पचास फीसदी तलक सुनिस्चित हुअ॑ ।

वूमेन एमपॉवरमेंट यानि महिला ससक्तिकरन प॑ वृहत स्तर प॑ काम करी चुकलऽ ‘गेट्स फाउंडेसन’ केरऽ ‘मेलिंडा गेट्स’ के मानना छै कि समाज मं॑ फैललऽ कुरीति सब ही महिला ससक्तिकरन केरऽ रस्ता मं॑ सबसं॑ बड़ऽ बाधा छेकै । महिला ससक्तिकरन केरऽ अभियान मं॑ मरद सिनी क॑ साथ रखना जरूरी छै । महिला सब केरऽ हालत मं॑ सुधार तभिये लानलऽ जाब॑ सक॑ छै जब॑ कि कोनो महिला के परिवार के हर पुरूस केरऽ मानसिकता क॑ बदलै मं॑ कामयाबी मिली जाय । मेलिंडा गेट्स के मानना छै कि ससक्त महिला सिनी समाज क॑ बदल॑ सकै छै । लेकिन ससक्तिकरन खाली महिला केरऽ भरोसे नै हुअ॑ सकै छै । अनेक समाजऽ मं॑ महिला केरऽ रस्ता के बाधा बनै वाला सामाजिक कुरीति केरऽ संरक्षक मरद ही होय छै । अपनऽ जीवन केरऽ रोजमर्रा के पहलू प॑ भी महिला केरऽ कोय नियंत्रन नै रहै छै । यहाँ तलक कि सरीर क॑ स्वस्थ रखै वास्तें दू बार गर्भाधारन के बीच अंतर रखै प॑ भी ओकरऽ कोय जोर नै । पति तय करतै कि परिवार केना चलतै । जरा सा भी मतभेद होला प॑ गाली-गलौज, मार-पिटाई के सिलसिला आरंभ होय जाय छै ।

महिला के ससक्त होला स॑ ओकरा उपर कोनो तरह के बलजोबरी होय के संभावना कम रहै छै ।

जाहिर छै महिला सिनी क॑ ससक्त बनाबै लेली ओकरा उचित सम्मान देना आरू ओकरऽ अधिकार के रक्षा करना जरूरी छै । तभिये ओकरा मं॑ आत्मविस्वास पैदा हुअ॑ सकतै आरो उचित नेतृत्व क्षमता पैदा हुअ॑ सकतै ।

मुंबई मं॑ लगभग दस साल पहलं॑ प्रारंभ करलऽ गेलऽ ‘जेंडर इक्वलिटी मूवमेंट इन स्कूल्स ’ ई बात केरऽ बहुत बड़ऽ उदाहरन छै कि जब॑-जब॑ लड़का-लड़की सिनी आपनऽ उपर थोपलऽ गेलऽ गलत समाजिक प्रथा के मिली क॑ विरोध करै छै त॑ केतना बड़ऽ बदलाव आबी जाय छै । लड़की केरऽ सादी केरऽ की उमर होना चाहियऽ, घऽर के कामऽ मं॑ मरदं॑ हाथ बँटाब॑ या नै बँटाब॑, घरेलू हिंसा केरऽ प्रतिरोध केना करना चाहियऽ, ऐन्हऽ बहुत तरह के मुद्दा प॑ ओकरा सिनी के बीच जागरूकता ऐलऽ छै । ई उपलब्धि तब॑ आरू बड़ऽ लग॑ लागै छै जब॑ अपना सब ई कड़वा हकीकत सं॑ रूबरू होय छियै कि भारत जैसनऽ देस मं॑ ४३ फीसदी युवक के ई मानना छै कि कभी-कभी महिला सिनी के पिटाई होना ही चाहियऽ ।

यहाँ तलक कि प्रायः सास व ननद के रूप मं॑ एगो महिला भी खुद दोसरऽ महिला के आजादी क॑ छिनी लै लेली तत्पर होय जाय छै । दोसरा यहाँ सं॑ आपनऽ घऽर मं॑ ऐलऽ बहू क॑ तरह-तरह सं॑ प्रताड़ित करना ओकरऽ स्वभाव बनी जाय छै । बहू क॑ मानसिक आरू सारीरिक रूप स॑ जलील करना, ओकरा प॑ दोसारोपन करी क॑ गुलाम जैसनऽ जिंदगी जियै प॑ मजबूर करना कोनो-कोनो सास के सहज स्वभाव बनी जाय छै, जे पुस्त दर पुस्त कब॑ पारिवारिक संस्कार केरऽ हिस्सा बनी जाय छै, पता भी नै चल॑ सक॑ छै ।

घूमी–फिरी क॑ अहम सवाल अनुत्तरित ही रही जाय छै कि समाज क॑ अपेक्षाकृत जादे मानवीय आरू व्यवहारिक बनाबै लेली महिला केरऽ हर क्षेत्र मं॑ समुचित भागीदारी व सम्मान द॑ क॑  ससक्त बनाबै के मोकाम हासिल करना आखिर के सुनिस्चित करतै ? अपना सब हर बात लेली सरकार प॑ ही कैन्हें निर्भर होय जाय छियै ? कि खाली सरकार के चाहला-करला सं॑ ही सब सामान्य होय जैतै ?  ऐन्हऽ सोचना वास्तव मं॑ समस्या केरऽ मूल निदान सं॑ पलायन केरऽ मनोवृत्ति क॑ ही परिलक्षित करै छै ।

जरूरत छै खुद आगे आबै के । अपना सब क॑ हर स्थिति मं॑ ऐसनऽ माहौल बनाना चाहियऽ कि हर महिला क॑ मरद सदृस समान रुप स॑ सामाजिक, धार्मिक आरू सार्वजनिक गतिविधि मं॑ भाग लै के अवसर मिल॑, समाज मं॑ बराबर के सामाजिक स्थिति म॑ रह॑, सिक्षा केरऽ समान अवसर मिल॑, समान रोजगार केरऽ अवसर मिल॑, समान वित्तीय व आर्थिक विकल्प केरऽ अधिकार, समान सामाजिक आरू आर्थिक न्याय केरऽ अधिकार, सुरक्षित आरू आरामदायक काम के माहौल मिल॑, सम्मान आरू गरिमा के साथ आपनऽ इच्छा उनपरूप जीवन जिअ॑ सक॑ । एगो मरद के रूप मं॑ आरू एक महिला के रूप म॑ भी अपना सब के प्रयास ई होना चाहियऽ कि आपनऽ आचरन, व्यवहार आरू मापदंड ऐन्हऽ राखँऽ जेकरा सं॑ घऽर व बाहर के हर महिला क॑ एक सचमुच के आजाद इंसान ऐसनऽ जिंदगी जिऐ  के अवसर मिल॑ । ऐकरा स॑ अंततः हर परिवार, समाज आरू देस के ही भला छै ।