अंगिका के युगांतरकारी योद्धा थे डॉ.‘चकोर’

कुंदन अमिताभ
लगातार 46 बर्षों  तक अंगिका भाषा की मासिक पत्रिका ‘अंग माधुरी’ का प्रकाशन व संपादन करने वाले संपादक डॉ नरेश पाण्डेय ‘चकोर’ अंगिका भाषा के अन्यतम सेवक और समय से कहीं आगे चलने वाले भाषाविद् और साहित्यकार थे.
कद और चमक में हर उपमा, उपाधि, अलंकरण से ऊपर.  उन्हें अंगिका का भारतेन्दु हरिश्चन्द्र, महावीर प्रसाद द्विवेदी, तुलसी, शेक्सपीयर, कालिदास आदि नामों से भी पुकारा गया.  अंगिका को पूरी जिंदगी अपने सीने से चिपकाये रख कर वह इसके पालन-पोषण और संरक्षण-संवर्द्धन के लिए जूझते रहे.
डॉ नरेश पाण्डेय चकोर का जन्म भागलपुर जिलान्तर्गत सुलतानगंज से 15 किमी दूर देवधा गांव में तीन जनवरी 1938 को हुआ था. पिता का नाम चंद्रमोहन पाण्डेय और माता का नाम प्रजावती देवी था. उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव और आसपास के स्कूलों में जबकि उच्च शिक्षा भागलपुर विश्वविद्यालय के टीएनजे कॉलेज में हुई.
उन्होंने 1963 में बिहार राज्य खादी ग्रामोद्योग बोर्ड, पटना में एक सांख्यिकी पदाधिकारी के रूप में अपनी नौकरी शुरू की और वहीं से 1996 में सेवानिवृत्त भी हुए.  1961 में आधुनिक अंगिका भाषा की पहली प्रकाशित पुस्तक डॉ चकोर कृत ‘किसान क॑ जगाबऽ’ साहित्य जगत के सामने आयी थी.
फिर इसी साल वे ‘अंग भाषा परिषद’ से प्रचार मंत्री के रूप में जुड़कर अंगिका भाषा आंदोलन की यात्रा प्रारंभ कर एक नया इतिहास रचने में लग गये. 1963 में  उनकी एक और पुस्तक ‘सर्वोदय समाज’ प्रकाशित हुई थी . यह अंगिका भाषा की पहली पुस्तक थी, जो किसी सरकारी विभाग द्वारा प्रकाशित हुई थी.  पूरे जीवन काल में डॉ चकोर ने अंगिका व हिंदी की 71 किताबें लिखीं,  जिसमें उनके द्वारा  संपादित आठ पुस्तकें भी शामिल हैं.
डॉ चकोर के उपर विभिन्न विद्वानों द्वारा नौ पुस्तकें भी लिखीं गई हैं.  उन्होंने दिसंबर, 1970 से अंगिका मासिक पत्रिका, अंग माधुरी का प्रकाशन व संपादन प्रारंभ किया था और आजीवन नवंबर, 2015 तक संपादक बने रहे. भाषा के संरक्षण व संवर्द्धन के क्षेत्र में वे अपनी तरह के पहले व अंतिम व्यक्ति नजर आते हैं.
आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी ने केवल 18 बर्षों तक ही सरस्वती का संपादन किया था.  पंडित श्रीराम शर्मा ने लगभग दो दशकों तक ‘विशाल भारत’ हिन्दी मासिक का संपादन किया, जबकि डॉ. चकोर ने अंगिका मासिक ‘अंग माधुरी’ का पूरे 46 बर्षों तक लगातार संपादन किया.
डॉ चकोर ने हमेशा एक सर्वोच्च कोटि के संगठक, आंदोलनधर्मी की भूमिका निभायी थी.  वे अंगिका व िहंदी के विकास के लिए जीवनपर्यंत कार्य करते रहे.  पटना में ‘जाह्नवी अंगिका संस्कृति संस्थान’ के तत्वाधान में वे आजीवन हर साल ‘अंगिका महोत्सव’ का आयोजन करते थे.
हर आयोजन पर अंगिका की पुस्तकों की प्रदर्शनी लगाना नहीं भूलते थे, चाहे इन किताबों को उन्हें अपने माथे पर ही ढोकर आयोजन स्थल तक क्यों नहीं ले जाना पड़ता हो.
उनका पूरा जीवन अंगिका और हिन्दी साहित्य की सेवा करते तथा राम की अराधना में गुजरा.  जिस तरह डॉ चकोर का लोकान्तरण राम-तुलसी संबंधी आलेख का प्रूफ रीडिंग करते-करते हुआ, एक भाषाविद, साहित्य सेवी और रामभक्त के लिए उससे बेहतर तरीके का निधन भी भला क्या हो सकता है ?
यह कैसा महासंयोग है कि वे उन्हीं दो चीजों में तल्लीन रहते अनंत लोक की तरफ प्रस्थान भी कर गये, जिनमें वे आजीवन तल्लीन रहे थे, बिल्कुल उस बेहद सच्चे, कर्मठ और कर्मवीर योद्धा की तरह जो मातृभूमि की रक्षा के लिए रणभूमि में लड़ते सर्वस्व न्योछावर कर वीरगति को प्राप्त कर लेता है.
(http://www.prabhatkhabar.com/news/patna/story/689944.html)

अंगिका हमारी मातृभाषा है -गायिका इंदु सोनाली

संगीत से सजा उठा छठ पर्व का उत्साह

मनीष चंद्र मिश्र

भोपाल :”भोजपुरी गानों से मेरी पहचान है, लेकिन कुछ साल पहले तक मैं भोजपुरी नहीं जानती थी। भागलपुर से हूं और अंगिका हमारी मातृभाषा है। गायकी की वजह से कई भाषाओं का ज्ञान हो गया है। भोजपुरी भाषा में मैं अपना आदर्श गायिका शारदा सिन्हा को मानती हूं। छठ पर्व के हजारों गाने बने हैं, लेकिन उनके जैसा गाना आज तक किसी ने नहीं गया। उनका गाना जब भी बजता है, सुनकर लगता है छठ के घाट पर जा बैठे हों। मैंने भी छठ के गाने गाए हैं, लेकिन कार्यक्रम में अगर छठ गीत गाना हो तो शारदा जी का गाना ही गाती हूं।’ यह कहना है 500 से अधिक भोजपुरी गीतों में अपनी आवाज देने वाली मशहूर गायिका इंदु सोनाली का। वह रविवार को भोजपुरी महोत्सव में प्रस्तुति देने भोपाल आईं थी। उन्होंने भोजपुरी भाषा में “रेल गड़िया चलाते हैं बलमवा’, “लहरिया लूटे ये राजा”, “कहां जाइब ए राजा नजरिया लड़ाइके’ जैसे कई गाने गाए हैं। उन्होंने भोजपुरी फिल्म और गानों की अभद्रता के बारे में बताया कि “अब पहले की तरह भोजपुरी फिल्मों के गीत अश्लील नहीं रहे। मैं तो कहूंगी अश्लीलता बिल्कुल खत्म हो गई है। एलबम बनाने वाले, जिन पर सेंसर की नजर नहीं है वे अश्लीलता फैला रहे हैं। जिससे भोजपुरी भाषा की बदनामी हो रही है। मैं अपने गानों का मतलब समझकर ही गाती हूं, और खराब मतलब वाले गाने नहीं गाती।’

भोजपुरी उत्सव की दूसरी शाम को भोजपुरी गायिका इंदु सोनाली ने अपने सुरों से सजाया। इस दौरान उन्होंने छठ पर्व से जुड़े कई गाने सुनाए।

(https://www.bhaskar.com/news/MP-BPL-HMU-MAT-latest-bhopal-news-021504-3028424-NOR.html)

भोजपुरी और अंगिका को फिलहाल अष्टम अनुसूची में शामिल करने से केंद्र की कमेटी का इनकार

भोजपुरी और अंगिका को राजभाषा का दर्जा देने से केंद्र की कमेटी ने किया इनकार – दैनिक भास्कर
नई दिल्ली, १४ जुलाई,२०१५ । केंद्र सरकार की एक हाई लेवल कमेटी ने बिहार की दो प्रमुख भाषाओं भोजपुरी और अंगिका को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं करने की सिफ़ारिश की है। यानी उन्हें राजभाषा का दर्जा देने से इनकार किया है। केंद्र के इस फैसले का बिहार के विधानसभा चुनाव पर भी असर पड़ सकता है। ये चुनाव इसी साल के आखिर में होने वाले हैं। बिहार में बोली जाने वाली तीसरी प्रमुख भाषा मैथिली आठवीं अनुसूची में पहले से ही शामिल है।
होती रही है डिमांड
भोजपुरी और अंगिका उन 38 भाषाओं में से हैं, जिन्हें आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग संसद में और दूसरे मंचों पर लगातार उठती रही है। सरकार ने इसी साल जनवरी में इन मांगों की जांच के लिए होम मिनिस्ट्री में अतिरिक्त सचिव बी.के. प्रसाद की अध्यक्षता में एक हाई लेवल कमेटी बनाई थी। इसमें होम मिनिस्ट्री, कल्चरल मिनिस्ट्री, एचआरडी, लॉ मिनिस्ट्री, साहित्य अकादमी, राजभाषा विभाग और केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान और रजिस्ट्रार जनरल ऑफ़ इंडिया के सीनियर अफसर शामिल थे।
क्या कहा गया रिपोर्ट में
पिछले महीने होम मिनिस्ट्री को सौंपी अपनी रिपोर्ट में इस कमेटी ने आठवीं अनुसूची में मौजूद 22 भाषाओं को शामिल करने की प्रक्रिया और मापदंडों को सही नहीं माना। कमेटी ने यह भी कहा कि इन भाषाओं को शामिल करने से हिंदी के विकास पर प्रभाव पड़ेगा।
उचित कार्रवाई होगी -राजनाथ सिंह
केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भास्कर से बातचीत में माना कि समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, लेकिन साथ ही यह भी जोड़ा कि अभी तक उन्होंने उसे देखा नहीं है। “जब रिपोर्ट मेरे सामने लाई जाएगी तो उसकी सिफ़ारिशों पर उचित कार्रवाई की जाएगी”, उन्होंने कहा। चूंकि अभी तक इस मामले पर बनी तीन समितियों की रिपोर्टों की सिफ़ारिशें सरकार ने जस की तस लागू कर दी, माना जा रहा है कि प्रसाद कमेटी की सिफ़ारिशों को भी मूल रूप में ही लागू किया जाएगा। लेकिन बिहार चुनाव में अब महज चार महीने ही बचे हैं, इसलिए लगता है कि केंद्र सरकार राजनीतिक रूप से संवेदनशील इस रिपोर्ट को चुनाव के बाद ही लागू करेगी।
यह भोजपुरी का अपमान है – जद (यू)
जनता दल (यू) के राष्ट्रीय महामंत्री केसी त्यागी का कहना है कि केंद्र की भाजपा सरकार भोजपुरीभाषियों का अपमान कर रही है। भोजपुरी केवल क्षेत्रीय भाषा ही नहीं है, बल्कि पचास से ज्यादा देशों में इस्तेमाल की जाने वाली अंतरराष्ट्रीय भाषा है। भारत के सभी राज्यों में भोजपुरीभाषी लोग रहते हैं। जिस भाजपा ने मैथिल ब्राह्मणों के वोट के लिए 2004 चुनाव से ठीक पहले मैथिली को राजभाषा बना दिया, वही भोजपुरी को यह दर्जा क्यों नहीं देना चाहती। उन्होंने कहा कि हम मैथिली के राजभाषा बनाने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन भोजपुरी के अपमान को चुनावी मुद्दा बनाएंगे।
इससे पहले की कमेटियों ने जो मापदंड निर्धारित किए थे, उनमें से किन्हीं दो को पूरा करने वाली भाषा को ही आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया।
ये हैं मापदंड
1. तीन दशकों के जनगणना आंकड़ों के अनुसार इसे कम से कम पांच लाख लोग बोलते हों।
2. कम से कम स्कूली शिक्षा के माध्यम के रूप मे इस भाषा का प्रयोग होता हो।
3. लिखने की भाषा के रूप में पचास सालों से अस्तित्व में होने का प्रमाण हो।
4. साहित्य अकादमी उसके साहित्य का प्रचार-प्रसार करती हो।
5. जनगणना आंकड़ों के मुताबिक़, यह आसपास के इलाक़ों में दूसरी भाषा के रूप में इस्तेमाल की जा रही हो।
6. नए बने राज्यों में राजभाषा का दर्जा मिला हो (मसलन कोंकणी, मणिपुरी)।
7. देश के बंटवारे के पहले किसी राज्य में बोली जाती हो और बंटवारे के बाद भी कुछ राज्यों में इस्तेमाल हो रही हो।
लड़ाई हारने वाली भाषाएं
अंग्रेजी, भोजपुरी, अंगिका, गढ़वाली, राजस्थानी, गुज्जरी, मगही, नागपुरी, कुमायूंनी, भोटी, बुंदेलखंडी, छत्तीसगढ़ी, बज्जिका, बंजारा, हिमाचली, धतकी, गोंडी, हो, कच्छी, कामतापुरी, करबी, खासी, कोडावा (कूर्ग की), कोक बराक, कुडक, कुमाली, लेपचा, लिंबू, मुंदड़ी, पाली, संबलपुरी, शौरसेनी (प्राकृत), सिरायकी, निकोबारी, मिजो, तेनिदी, और तुलू।
कब कौन-सी भाषा संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल हुई
26 नवंबर 1949 को – 14 भाषाएं – हिंदी, तेलुगु, बंगाली, मराठी, तमिल, उर्दू, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, उडि़या, पंजाबी, कश्मीरी, असमिया और संस्कृत।
फिर 63 साल में हुए तीन संविधान संशोधन
1967 में – 21वां संशोधन – सिंधी के लिए
1992 में – 71वां संशोधन – कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली के लिए
2003 में – 91वां संशोधन – मैथिली, संथाली, बोडो और डोंगरी के लिए।
क्या है फ़ायदा आठवीं अनुसूची में शामिल होने का
* यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (यूपीएससी) और अन्य सेंट्रल एग्जाम में में माध्यम।
जिन राज्यों में बोली जाती है, वहां स्डडी मीडियम और सरकारी कामकाज की भाषा बन जाती है।
लोकसभा और विधानसभा में प्रश्न पूछने या भाषण देने का माध्यम यानी अब आप नेपाली, कोंकणी, संथाली, बोडो, डोंगरी और सिंधी में यूपीएससी की परीक्षा दे सकते हैं, लेकिन भोजपुरी, राजस्थानी, हिमाचली, बुंदेलखंडी या छत्तीसगढ़ी में नहीं।
(Source : https://www.bhaskar.com/news/nat-nan-centre-committee-denis-bhojpuri-and-angika-in-eighth-schedule-of-the-constitutio-5052064-nor.html)

अंगिका भाषा के विकास और संरक्षण के लिए जल्द किया जाएगा बिहार अंगिका अकादमी का गठन

अंगिका भाषा अकादमी का किया जाएगा गठन – दैनिक भास्कर

पटना,२३ जून,२०१५ । अंगिका भाषा के विकास और संरक्षण के लिए जल्द अकादमी का गठन किया जाएगा। शिक्षा विभाग ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर लिया है। जल्द ही इस प्रस्ताव पर कैबिनेट की स्वीकृति ली जाएगी। कैबिनेट की स्वीकृति के बाद इसके गठन का आदेश जारी कर दिया जाएगा। यह भाषा मुख्य रूप से भागलपुर, बेगूसराय, खगड़िया और मुंगेर आदि जिलों में बोली जाती है। चुनावी वर्ष में इस भाषा की अकादमी का गठन राजनीतिक कारणों से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बिहार के बड़े क्षेत्र में लोग इस भाषा को बोलते हैं। अंगिका भाषा अकादमी के लिए सात पदों का सृजित किए जाएंगे। इनमें अध्यक्ष, निदेशक सह सचिव और सहायक निदेशक का एक-एक पद होंगे। अन्य चार पद होंगे। यह नौवीं भाषायी अकादमी होगी। इनमें संस्कृत, मगही, भोजपुरी, मैथिली, बांग्ला, हिंदी ग्रंथ, दक्षिण भारतीय भाषा और उर्दू अकादमी शामिल हैं।

प्रस्ताव तैयार कैबिनेट से ली जाएगी स्वीकृति

(Source :https://www.bhaskar.com/news/BIH-PAT-HMU-MAT-latest-patna-news-030002-2119745-NOR.html)

झारखंड शिक्षा मंत्री गीताश्री उरांव के बयान पर घटक दलों ने खोला मोरचा, विपक्षी भी उबले

राँची,२२अक्टूबर,२०१३ । शिक्षा मंत्री गीताश्री उरांव ने टेट पास भोजपुरी उम्मीदवारों का रिजल्ट रद्द करने की बात कही है. शिक्षा मंत्री के इस बयान का विपक्ष ने कड़ा विरोध किया है. कहा है कि मंत्री के इस बयान से सामाजिक समरसता बिगड़ेगी और राज्य में एक बार फिर अशांति का माहौल बनेगा.

भाजपा ने इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है. वहीं जदयू ने भी विरोध में शिक्षा मंत्री का पुतला फूंका. इधर, सरकार के घटक दलों में भी मंत्री के  इस बयान के बाद से हलचल मची है. राजद ने आपत्ति जताते हुए कहा है कि गीताश्री के बयान का कोई मतलब नहीं है. सरकार में शामिल लोगों को ऐसे बयान नहीं देने चाहिए.

वहीं गीताश्री के इस बयान पर कांग्रेस की भी परेशानी बढ़ी है. सरकार में शामिल कांग्रेस के मंत्री ददई दुबे भी इस बयान से सहमत नहीं हैं. सरकार को समर्थन दे रहे निर्दलीय विधायक विदेश सिंह भी इस बयान से नाराज हैं. गौरतलब है कि शिक्षा मंत्री ने पूर्व में भी इस तरह के कई विवादास्पद बयान दिये हैं.

– भाजपा

* तरस आती है मंत्री के सोच पर

शिक्षा मंत्री गीताश्री उरांव के बयान पर भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. पार्टी ने कहा है कि मंत्री भाषा के नाम पर लोगों को लड़ाना चाहती हैं. इससे सरकार को इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए,

* सामाजिक समरसता बिगाड़ रहीं हैं मंत्री

पूर्व स्पीकर सीपी सिंह ने शिक्षा मंत्री गीताश्री उरांव के उस बयान पर जिसमें उन्होंने कहा था कि भोजपुरी भाषा से टेट पास करनेवाले छात्रों की पात्रता रद्द की जायेगी, पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. श्री सिंह ने कहा है कि शिक्षा मंत्री राज्य में सामाजिक समरसता बिगाड़ने का काम कर रहीं हैं. राज्य में रहनेवालों को नौकरी के नाम पर लड़ाने का प्रयास हो रहा है. सरकार में शामिल लोग राज्य हित में काम करने के बजाय, समाज तोड़ने में लगे हैं.

मंत्री भाषा के नाम पर विद्वेष फैलाने का काम कर रहीं हैं. भोजपुरी राज्य में पलामू, उत्तरी छोटानागपुर सहित कई हिस्से में बोले जानेवाली भाषा है. राज्य की बड़ी आबादी का इसके प्रति लगाव है. शिक्षा मंत्री के बयान से राज्य के बड़े वर्ग के सम्मान को धक्का लगा है. मंत्री जैसे जवाबदेही के पद पर बैठे लोग अपने कर्तव्य भूल रहे हैं. छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है. राज्य में इस तरह की बयानबाजी से भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है. शिक्षा मंत्री के बयान के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लोगों में विश्वास पैदा करने के लिए सरकार का पक्ष रखना चाहिए.

* तरस आती है शिक्षा मंत्री के सोच पर

राज्य के पूर्व उप मुख्यमंत्री रघुवर दास ने शिक्षा मंत्री गीताश्री उरांव की उस बयान की आलोचना की है, जिसमें कहा गया है कि टेट में भोजपुरी सहित अन्य गैर जनजातीय भाषा की परीक्षा देकर पास होने वाले अभ्यर्थियों का रिजल्ट रद्द किया जायेगा. श्री दास ने मंत्री के इस बयान को अनुचित करार देते हुए कहा कि इनकी सोच पर तरस आता है. जिस नियमामवली का मंत्री विरोध कर रही हैं, उसे कैबिनेट की मंजूरी मिली हुई है.

सरकार ने क्षेत्रीय और जनजातीय भाषा की सूची में ही बांग्ला, ओड़िया, मगही, भोजपुरी और अंगिका को शामिल किया है.ऐसे में परीक्षा लेने के बाद इस प्रकार की बात कहना समझ से परे है. उन्होंने कहा कि सरकार को पहले स्थानीयता को परिभाषित करना चाहिए. इसके बाद ही स्थानीय लोगों को नौकरी में प्राथमिकता देने की बात करनी चाहिए.

* भाषा के नाम पर लोगों को लड़ा रही

भाजपा रांची महानगर के अध्यक्ष सत्य नारायण सिंह ने शिक्षा मंत्री गीताश्री उरांव की ओर से भोजपुरी भाषा के उम्मीदवारों को अयोग्य करार दिये जाने के बयान पर विरोध जताया है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता इस प्रकार का बयान देकर लोगों को जाति एवं भाषा के आधार पर लड़ाने का काम कर रहे हैं. टेट परीक्षा में भोजपुरी भाषा के अभ्यर्थी नियमसम्मत परीक्षा देकर सफल हुए हैं. ऐसे में उन्हें अयोग्य करार देने की बात कहना न्यायसंगत नहीं है. अगर टेट को आधार मान कर बहाली नहीं की गयी, तो पार्टी सरकार के खिलाफ आंदोलन करेगी.

* सर्वदलीय बैठक बुलाये सरकार

भाजपा ने शिक्षा मंत्री गीताश्री उरांव के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है. प्रदेश प्रवक्ता प्रेम मित्तल ने कहा कि सरकार के  नियमों के तहत टेट परीक्षा ली गयी. इसमें भोजपुरी भाषा के अभ्यर्थी सफल हुए. ऐसे में शिक्षा मंत्री को सोच-समझ कर बयान देना चाहिए. इस राज्य में हजारों छात्रों ने भोजपुरी भाषा में परीक्षा दी है. उन्हें अयोग्य करार देना न्यायसंगत नहीं है.

* कांग्रेस नेता भी नाराज

गीताश्री उरांव के बयान को पार्टी ने भी गंभीरता से लिया है. पार्टी शिक्षा मंत्री के बयान से नाराज है. पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि इससे पार्टी की छवि पर असर पड़ेगा. कांग्रेस क्षेत्रीय दल नहीं है. राष्ट्रीय पार्टी में रह कर इस तरह की बातें नहीं होनी चाहिए. इससे पार्टी कार्यकर्ताओं पर प्रतिकूल असर पड़ेगा. सूचना के अनुसार, कांग्रेस के कई नेता प्रदेश प्रभारी और दूसरे राष्ट्रीय नेताओं तक मंत्री के बयान को पहुंचायेंगे. पूरे मामले में शिक्षा मंत्री से पार्टी स्पष्टीकरण पूछ सकती है. शिक्षा मंत्री के बयान पर पार्टी पदाधिकारी फिलहाल चुप्पी साध रहे हैं.

* यहां रहनेवाला हर व्यक्ति झारखंडी

ग्रामीण विकास मंत्री ददई दुबे ने कहा है कि गीताश्री उरांव उनकी पार्टी की हैं. सरकार में मंत्री हैं. उनके बयान पर कुछ नहीं कहना है, लेकिन मेरा मानना है कि झारखंड में रहनेवाला हर व्यक्ति झारखंडी है. सभी को समान अधिकार है. किसी के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए. झारखंड में कोई बाहरी-भीतरी का मामला नहीं है. सभी लोग यहां मिल कर रहते हैं. कोई भी मंत्री हो, उसके बोल देने से कुछ नहीं होता है.

– राजद

शिक्षा मंत्री भ्रामक बात न करें

राजद के प्रदेश अध्यक्ष गिरिनाथ सिंह ने कहा है कि शिक्षा मंत्री का बयान राज्य में भ्रम फैलानेवाला है. शिक्षा मंत्री में समझदारी का अभाव है. उनका बयान चिंता का विषय है. मंत्री को इस तरह का बयान नहीं देना चाहिए. राज्य के तीन प्रमंडलों में भोजपुरी बोली जाती है. पलामू, उत्तरी छोटानागपुर और संताल परगना में भोजपुरी बोली जाती है. आजादी के पहले से भोजपुरी भाषा-भाषी यहां रह रहे हैं.

मंत्री को जवाबदेही के तहत काम करना चाहिए. मगही, अंगिका सहित कई भाषा बोलनेवाले लोग भी यहां रहते हैं. छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए. उधर पार्टी उपाध्यक्ष सह प्रदेश प्रवक्ता राजेश यादव ने कहा कि शिक्षा मंत्री को सरकार की ओर से बनायी गयी नीति को देख कर बयान देना चाहिए. टेट की परीक्षा में भोजपुरी के साथ अन्य क्षेत्रीय भाषाओं को शामिल किया गया था. शिक्षा मंत्री ने  सरकार को कठघरे में शामिल करने का काम किया है.

* मंत्री जी ! सरकार ने ही बनायी नियमावली

शिक्षक पात्रता परीक्षा में भोजपुरी भाषा से पास उम्मीदवारों का रिजल्ट रद्दे करने के शिक्षा मंत्री के बयान के बाद चारों तरफ से कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की जा रही है. लेकिन इस पूरे मामले का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि राज्य के किस जिले में कौन सी क्षेत्रीय भाषा होगी यह झारखंड सरकार ने ही तय कर रखी है. शिक्षक नियुक्ति नियमावली में इसका जिक्र है.

सरकार द्वारा इन भाषाओं को शिक्षक पात्रता परीक्षा में शामिल करने की अनुमति दी गयी है. इसके बाद इन भाषाओं को क्षेत्रीय भाषा के रूप में शिक्षक पात्रता परीक्षा में शामिल किया गया है.  ऐसे में शिक्षा मंत्री का बयान समझ से परे है.  हालांकि पूर्व में भी मंत्री ने इस तरह के कई बयान दिये हैं.

गौरतलब है कि क्षेत्रीय भाषाओं को परीक्षा में शामिल करने में झारखंड एकेडमिक काउंसिल की कोई भूमिका नहीं है. परीक्षा को लेकर सभी निर्देश मानव संसाधन विकास विभाग द्वारा दिया गया है. शिक्षा विभाग के निर्देश के अनुरूप ही झारखंड एकेडमिक काउंसिल ने इन भाषाओं को परीक्षा में शामिल किया है. इससे पूर्व वर्ष 2010 में हुई शिक्षक पात्रता परीक्षा में भी क्षेत्रीय भाषा के रूप में इनको परीक्षा में शामिल किया गया था.

इधर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट) में भोजपुरी भाषा में 4,148 परीक्षार्थी सफल हुए हैं. कक्षा एक से पांच तक की परीक्षा में 618 व छह से आठ तक में 3,530 परीक्षार्थी परीक्षा में सफल हुए हैं. भोजपुरी भाषा को राज्य के तीन जिलों से टेट में क्षेत्रीय भाषा के रूप में मान्यता दी गयी थी. लातेहार, पलामू व गढ़वा जिले के परीक्षार्थियों को भोजुपरी को क्षेत्रीय भाषा के रूप में रखने की अनुमति दी गयी थी. भोजपुरी के अलावा मगही, अंगिका, बांगला व ओड़िया को भी क्षेत्रीय भाषा के रूप में मान्यता दी गयी थी.

* भोजपुरी से टेट में पास हैं 4148 विद्यार्थी

सफल विद्यार्थी

भाषा         एक से पांच    छह से आठ

बांग्ला        1996        3203

ओड़िया        241        373

मगही        3257        5589

भोजपुरी        618        3530

अंगिका        2371        5484

– जिलावार भाषा

* मगही : लातेहार, पलामू, गढ़वा

* भोजपुरी : लातेहार, पलामू, गढ़वा

* अंगिका  : देवघर, गोड्डा, पाकुड़, साहेबगंज, जामताड़ा, दुमका

* बांग्ला : रांची, खूंटी, दुमका, जामताड़ा, साहेबगंज, पाकुड़, सरायकेला-खरसावां

* ओड़िया : प. सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां

विधानसभा में मामला उठायेंगे : विदेश सिंह

निर्दलीय विधायक विदेश सिंह ने कहा है कि राज्य किसी एक का नहीं है. यहां सबको रहने और रोजगार पाने का अधिकार है. भोजपुरी के लिए हम संघर्ष करेंगे. दूसरी भाषाओं को जो अधिकार है, वही अधिकार भोजपुरी को मिलना चाहिए. दूसरे को मान्यता मिलेगी, तो भोजपुरी को क्यों नहीं. पलामू सहित राज्य के कई हिस्से में भोजपुरी बोली जाती है. भोजपुरी के लिए विधानसभा में भी मामला उठायेंगे.

(http://www.prabhatkhabar.com/news/55981-Education-Minister-Geetasri-Oram-Tate-Bhojpuri-candidate-canceled-Result-language-party-meeting.html)

छैला बिहारी नाईट का दर्शकों ने उठाया लुत्फ

निज संवाददाता, समेली (कटिहार) : प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत डूमर दुर्गा मंदिर परिसर में गुरुवार को गायक सुनील छैला बिहारी का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान दिल्ली की ममता राज व कोलकाता की पायल, निशा, मनीषा ने गायन और नृत्य कला का प्रदर्शन किया।

इस दौरान चहेते कलाकारों के नृत्य संगीत से दर्शक झूमते रहे। इस अवसर पर सुनील छैला बिहारी ने कहा कि अंगिका भाषा की पहचान के लिए गीतों के एलबम बनाने के साथ फिल्म निर्माण भी किए जा रहे हैं। अंगिका भाषा की कई फिल्में सिनेमा घरों में आ चुकी है। कार्यक्रम के दौरान पोठिया ओपी अध्यक्ष शशि भूषण कुमार शस्त्र बलों के साथ मौजूद थे। कार्यक्रम संचालन में डूमर के दुर्गा मंदिर पूजा कमेटी के अध्यक्ष अखिलेश साह, उपाध्यक्ष रामदेव राय, सचिव भैरव शर्मा, कोषाध्यक्ष राजकुमार, व्यवस्थापक विजय शर्मा, पूर्व मुखिया बिनोद चौधरी, उमुखिया केदार मंडल, दीपक मंडल, सुबोध मंडल, मनोज मंडल, विजय यादव, अजय चौधरी, सूरज चौधरी, मनीष ठाकुर, सुमन कुमार शर्मा, रमजान अली, भगवान ठाकुर, दिनेश गुप्ता, बमबम आदि ने सक्रिय भूमिका निभाई।

(http://www.jagran.com/bihar/katihar-9790975.html)