राजकीय और शैक्षणिक स्तर पर संरक्षण के बिना कोई भी भाषा फल-फूल नहीं सकती – पुरातत्ववेत्ता पंडित अनूप कुमार वाजपेयी

अंगिका के संरक्षण पर शुरू होगा गंभीर प्रयास : डॉ. गगन

दुमका : केंद्र सरकार के निर्देश पर विश्व मातृभाषा दिवस पर मंगलवार को संताल परगना महाविद्यालय दुमका के कांफ्रेंस हाल में जनपदीय भाषा अंगिका की वर्तमान स्थिति पर चिंतन गोष्ठी आयोजित हुई।

महाविद्यालय के प्राध्यापक, छात्र-छात्रा एवं शहर के बुद्धिजीवियों ने भाग लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. गगन कुमार ठाकुर ने की। उन्होंने कहा कि अंगिका भाषा पांच हजार वर्ष से भी अधिक पुरानी है। इसके अध्ययन-अध्यापन के लिए यूजीसी को प्रस्ताव भेजा जाएगा।

कहा कि इसके लिए राज्य सरकार और विश्वविद्यालय से भी आग्रह किया जाएगा। प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. सुरेंद्र झा ने कहा कि अंग के इतिहास को जानबूझ कर दबाया और विकृत किया गया है। कहा कि अंग का इतिहास राजा बलि के पुत्र अंग से नहीं अपितु राजा पृथु से आरंभ होता है जिनके नाम पर भू-मंडल का नाम पृथ्वी पड़ा है। पृथु के वंशज आज भी अंग के निवासी हैं। अंग की सीमा कभी बहुत बड़ी थी पर मगध के उत्कर्ष के बाद अंग उसके अधीन हो गया। कहा कि आज का दिन यह संकल्प लेने का है कि अंगिका भाषी अपनी मातृभाषा में ही हमेशा आपस में वार्तालाप करें।

मनोविज्ञान विभाग के प्राध्यापक डॉ. कलानंद ठाकुर ने कहा कि विश्व में साढ़े तीन करोड़ लोग अंगिका भाषी हैं। इतिहास के व्याख्याता डॉ. अमरनाथ झा ने कहा कि भारत की गुलामी के कारण हुए भाषाई प्रहार के फलस्वरूप जनपदीय भाषाएं विलुप्ति के कगार पर पहुंच गई हैं। उन्हें पुन: गौरवमय स्थान दिलाने के प्रयास के लिए भारत सरकार का स्वागत किया जाना चाहिए। समाजसेवी राधेश्याम वर्मा द्वारा यह घोषणा की गई कि अंगिका भाषा के संरक्षण-संव‌र्द्धन के लिए तन-मन से योगदान देने के लिए तैयार हैं।

पुरातत्ववेत्ता पंडित अनूप कुमार वाजपेयी ने अंगिका भाषा की प्राचीनता, अंगिका के मंत्र विज्ञान, प्रकृति विज्ञान पर विशेष रूप से प्रकाश डालते हुए कहा कि राजकीय और शैक्षणिक स्तर पर संरक्षण के बिना कोई भी भाषा फल-फूल नहीं सकती। साथ ही अंगिका को समुचित स्थान दिलाने पर जोर दिया। कहा कि ऋषि दीर्घ तमस, कक्षीवत और घोसा ने ऋगवेद के मंत्रों का दर्शन किया था। इनके अलावा अंग के ऋषि पैप्लाद, कोहल, विभांडक, अष्टावक्र, अगस्त्य ने दुनिया में ज्ञान फैलाया। अंगिका एक बहुत ही प्राचीन भाषा है बावजूद जिसकी अंगी नामक एक लिपी थी जो खो गयी।

हिन्दी के प्राध्यापक डॉ. विनय कुमार सिन्हा ने कहा कि अंगिका का स्वरूप विक्रमशिला विश्वविद्यालय पर आक्रमण के बाद ही बदलने लगा। डॉ. शंभु कुमार ¨सह ने अंगिका के विकास पर चर्चा की। प्रो. प्रशांत ने विश्व मातृभाषा दिवस के इतिहास पर चर्चा करते हुए अंगिका के औचित्य पर प्रकाश डाला। चतुर्भुज नारायण मिश्र, विजय कुमार सोनी, डॉ. अमरेंद्र कुमार सिन्हा, राघवेंद्र कुमार ¨सह, डॉ. धनंजय कुमार मिश्र ने कहा कि अंगिका को सरकार आठवीं अनुसूची में शामिल करे तभी अंगिका का संरक्षण हो सकता है कार्यक्रम में मनोज कुमार घोष, डॉ. रामवरण चौधरी, कमलाकांत सिन्हा, गौरकांत झा, विद्यापति झा, मणिकांत झा विपुल कुमार ने अंगिका में कविता पाठ और गीत प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम में डॉ. खिरोधर प्रसाद यादव, डॉ. सुधांशु शेखर, डॉ. निरंजन कुमार मंडल, मनोज केशरी, आनंद जायसवाल, कुमार, दुष्यंत कुमार, चंदन कुमार, संजय कुमार भगत, जयकांत यादव, रवि कुमार, चंद्रशेखर, विक्की कुमार, अमन कुमार चौधरी, गोपाल कुमार उपस्थित थे। मंच संचालन डॉ. डीके मिश्रा और डॉ. केएन ठाकुर ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. एएन झा ने की। कार्यक्रम के उपरांत कई अहम प्रस्ताव भी मंच से पारित किया गया।

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ये प्रस्ताव हुए पारित

– अंगिका भाषा लुप्त न हो जाए इसके लिए विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय स्तर पर अध्ययन एवं शोध की व्यवस्था हो।

– राज्य सरकार से लेकर यूजीसी तक मांगपत्र भेजा जाए ताकि अंगिका भाषा का संरक्षण एवं संवर्धन हो सके।

– अंगिका के मंत्र, लोकोक्तियां, कहानियों के संरक्षण के लिए महाविद्यालय, विश्वविद्यालय अपने स्तर पर यथोचित कदम उठाया जाए।

(Source – https://www.jagran.com/jharkhand/dumka-15565332.html)