मधेपुरा में हुआ अखिल भारतीय अंगिका कवि महोत्सव का आयोजन

कवि सम्मेलन में अंगिका साहित्य पर चर्चा – जागरण

मधेपुरा,२०नवंबर,२०१६। अखिल भारतीय अंगिका कवि महोत्सव का आयोजन रविवार को चौसा के तुलसीपुर टोला में किया गया। कवि महोत्सव के उद्घाटन बीडीओ मिथिलेश बिहारी वर्मा ने किया। महोत्सव के मौके पर बीडीओ ने कहा कि बिहार के कई जिले में अलग-अलग की भाषा बोली जाती है। इस इलाके में मुख्य रूप से अंगिका भाषा बोली जाती है। कवि सम्मेलन में नशा उन्मूलन पर भी जोर दिया गया। बीडीओं ने कवि सम्मेलन में अपनी एक कविता.कवि मेरे ख्वाब में.कवि देखा नहीं.की प्रस्तुत किया। वहीं अखिल भारतीय अंगिका साहित्य विकास समिति भागलपुर के संस्थापक अध्यक्ष अंगिका भाषा के ध्वनी वैज्ञानिक डॉ. रमेश मोहन शर्मा ने अंगिका साहित्य को लेकर विस्तार से चर्चा की। कवि सम्मेलन में वर्तमान परिवेश में घटनाओं तथा बदलते समाज के परिवेश को कविता के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। कवि सम्मेलन में स्वागत गीत उषा कुमारी और उपेन्द्र कर्मयोगी ने प्रस्तुत किया। सम्मेलन में मुख्य रूप से थानाध्यक्ष सुमन कुमार ¨सह,हीरानंद हरेन्द्र,सुरेश सूर्य,फुल कुमार अकेला,उपेन्द्र शर्मा,योगेंद्र कर्मयोगी,सरयुग महंथ,प्रो. डॉ अर्जुन प्रसाद मंडल,प्राचार्य उतम कुमार,प्रो. नरेश प्रसाद हरिवंशी,हरिलाल मंडल,सियाराम मंडल,रामनंद गुप्त,ह्दय नारायण मंडल,प्रो. प्रमोद भगत,प्रो. अमेन्द्र मंडल,मनीष अकेला आदि कवियों ने कविता के प्रस्तुत किया।कवि सम्मेलन नवल किशोर मंडल के नेतृत्व में आयोजित किया गया था।

(http://www.jagran.com/bihar/madhepura-15068132.html)

बिहारअंगिका अकादमी को अब तक अपना ऑफिस नसीब नहीं

अंगिका अकादमी को निदेशक दिया, दफ्तर नहीं – दैनिक भास्कर

पटना, २० नवंबर,२०१६ । बिहारअंगिका अकादमी को अब तक अपना ऑफिस नसीब नहीं हुआ है। 13 अक्टूबर 2016 को डीबी स्टार में खबर फाइलमें अकादमी, रोड पर अध्यक्ष प्रकाशितहोने के बाद देवशील को अकादमी में निदेशक सह सचिव प्रतिनियुक्त किया गया है। 11 लाख का ड्राफ्ट भी अकादमी को मिल गया है। अब निदेशक सह सचिव अध्यक्ष के नाम से खाता खुलेगा और फिर चेक से पेमेंट होगा। अध्यक्ष को कुछ दिनों में बकाए मानदेय का भुगतान हो जाएगा। इस सब के बावजूद अब तक अकादमी को कार्यालय उपलब्ध नहीं कराया गया है।

बिहार अंगिका अकादमी के अध्यक्ष लखन लाल आरोही ने 06 अप्रैल को शिक्षा मंत्री को पत्र लिख कर कार्यालय उपलब्ध कराने की मांग की है। पत्र में उन्होंने कहा है कि अंगिका अकादमी का गठन हुए दो साल हो चुके हैं लेकिन अब तक कार्यालय संचालन के लिए विभाग से कार्यालय उपलब्ध नहीं कराया गया है। कार्यालय के अभाव में वे सड़क और सचिवालय के गलियारों में घूम रहे हैं। सवाल उठाते हुए अध्यक्ष ने कहा है कि इसे विभागीय उपेक्षा, उदासीनता और संवेदनहीनता के सिवा और क्या कहा जा सकता है? लिखा है कि अकादमी की इस बदहाली से अंगिकाभाषियों में सरकार की छवि प्रभावित हो रही है।

(Source : https://www.bhaskar.com/news/BIH-PAT-HMU-MAT-latest-patna-news-020003-1410550-NOR.html)

अंग प्रदेश का मुख्य इलाका ही अंगिका की शिक्षा से वंचित – लखन लाल आरोही

इंटर के पाठ्यक्रम में शामिल हो अंगिका – जागरण

बांका, १ नवंबर,२०१६। बिहार में अंगिका भाषा की सरकारी उपेक्षा से अंगिका भाषा भाषी पूर्व से आहत हैं।सरकार ने कागजी तौर पर भले ही दो साल पूर्व अंगिका अकादमी गठन की घोषणा के साथ अध्यक्ष का मनोनयन कर दिया। लेकिन, दो साल बाद भी अंगिका की दिशा व दशा में कोई सुधार नहीं हुआ। अब खुद अंगिका अकादमी के अध्यक्ष लखन लाल आरोही ने इस संबंध में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष आनंद किशोर को पत्र लिखा है। इस पत्र में आरोही ने बोर्ड अध्यक्ष से इंटर के पाठ्यक्रम में अंगिका को शामिल कराने की मांग की है। अध्यक्ष ने कहा कि इंटर के छात्र दो अनिवार्य भारतीय भाषा पढ़ते हैं। इसमें उर्दू, संस्कृत के साथ पाकृत, मगही, मैथिली, भोजपुरी आदि भी शामिल है। लेकिन, अंगिका को आज तक इससे दूर रखा गया है। उन्होंने बिहार के कई जिलों में अंगिका भाषा भाषी की बड़ी तादाद होने के कारण इस भाषा के विकास के लिए इसे पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग की है। अध्यक्ष श्री आरोही ने कहा कि भागलपुर विश्वविद्यालय अंगिका की महत्ता को समझ पिछले कई साल स्नातक और स्नातकोतर स्तर पर इसकी पढ़ाई करा रहा है। इसकी डिग्री पर छात्रों को नौकरी मिल रही है, लेकिन, इंटर स्तर पर ही इस भाषा को छात्रों से दूर रखना वाजिब नहीं है। उन्होंने बताया कि पड़ोसी झारखंड सरकार ने भी अंगिका को प्रतियोगी परीक्षा के साथ कक्षा में पढ़ाई में शामिल कर लिया है। जबकि, अंग प्रदेश का मुख्य इलाका ही अंगिका की शिक्षा से वंचित है।

 (Source: http://www.jagran.com/bihar/banka-14963221.html)