बिहार के किसानों को क्षेत्रीय भाषाओं में ‘मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड’ उपलब्ध कराया जाएगा

क्षेत्रीय भाषा में किसानों को मिलेगा मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड

Publish Date:Sat, 09 Sep 2017 03:05 AM (IST) | Updated Date:Sat, 09 Sep 2017 03:05 AM (IST)

पटना । बिहार के किस इलाके में कौन सी भाषा प्रचलित है, इसे पता करने का जिम्मा सरकार ने कृषि विभाग के अधिकारियों को सौंपा है। दरअसल सरकार की योजना है कि किसानों को क्षेत्रीय भाषा में ‘मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड’ उपलब्ध कराया जाए। कृषि से संबंधित 58 शब्दों की सूची तैयार की गई है जिसका अनुवाद क्षेत्रीय भाषा में करना है।

राज्य के बांका जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में संथाली भाषा प्रचलित है। संथाल परगना का प्रभाव है। जिले के ही कुछ इलाकों में अंगिका बोली जाती है। इसी तरह कटिहार, किशनगंज और अररिया जिले में बंगाली के साथ सूर्यापूरी भाषा प्रचलित है। सूर्यापुरी की लिपि बिल्कुल अलग है। नेपाल की सीमा से सटे सीतामढ़ी और मधुबनी जिले में मैथिली के साथ ही नेपाली भाषा मिश्रित रूप से बोली जाती है। दरभंगा में मैथिली और तिरहुत क्षेत्र में वज्जिका क्षेत्रीय भाषा है। भागलपुर और मुंगेर के आसपास अंगिका तो मगध प्रमंडल में मगही भाषा प्रचलित है। शाहाबाद और सारण में भोजपुरी क्षेत्रीय भाषा है।

: किन शब्दों का चाहिए अनुवाद :

सरकार ने मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड के लिए जिन शब्दों की सूची भेजी है उसमें उर्वरक, मृदा, सूक्ष्म पोषण तत्व, विश्लेषण परिणाम, भूमंडलीय स्थिति निर्धारण प्रणाली, खेसरा, देशांतर, अक्षांश, क्षेत्रफल, नमूना संग्रहण, जैव उर्वरक, चूना, जिप्सम, कार्बनिक उर्वरक, वर्षाश्रित, एकड़ सहित अन्य शब्द शामिल हैं। हरेक शब्द को क्षेत्रीय भाषा में किसान क्या कहते हैं उसकी सूची कृषि मंत्रालय को भेजनी है।

: किसानों को क्या होंगे फायदे :

मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड क्षेत्रीय भाषा में किसानों को देने के पीछे मकसद कृषि से संबंधित तकनीकी शब्दों का अर्थ समझाना है। वैसे बिहार की सरकारी भाषा देवनागरी लिपि है। परीक्षाएं हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, उर्दू में ली जाती है। संविधान की आठवीं अनुसूची में क्षेत्रीय भाषा में मैथिली भाषा शामिल है।

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क्षेत्र का नाम – क्षेत्रीय भाषा

पटना – हिन्दी

मगध प्रमंडल – मगही

बांका – संथाली और अंगिका

पूर्वी बिहार – सूर्यापूरी

चंपारण – भोजपुरी

शाहाबाद – भोजपुरी

नेपाल की सीमा – नेपाली मैथिली

तिरहुत क्षेत्र – वज्जिका

दरभंगा – मैथिली

भागलपुर व मुंगेर – अंगिका

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किसानों की सुविधा के लिए खेती से जुड़े तकनीकी शब्दों की जगह स्थानीय शब्दों का इस्तेमाल मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड में करने की योजना है। सरकार को जिले और क्षेत्रवार बोलचाल की भाषा में मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

– संजय कुमार, उप निदेशक, कृषि रसायन संस्थान।

http://www.jagran.com/bihar/patna-city-soil-health-card-will-have-terms-in-local-language-16680506.html