झारखंड में अंगिका को मिला द्वितीय राजभाषा का दर्जा

झारखंड में मगही, भोजपुरी, मैथिली व अंगिका को मिलेगा द्वितीय राजभाषा का दर्जा
Publish Date:Thu, 22 Mar 2018 06:35 PM (IST)

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड में मगही, भोजपुरी, मैथिली तथा अंगिका को द्वितीय राजभाषा का दर्जा दिया जाएगा। बुधवार को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में इन्हें द्वितीय राजभाषा घोषित करने के लिए बिहार राजभाषा (झारखंड संशोधन) अध्यादेश, 2018 के प्रारूप को स्वीकृति दे दी गई।

कैबिनेट ने इसके साथ ही 12 प्रस्तावों को अपनी मंजूरी प्रदान की। बैठक के बाद प्रधान सचिव एसकेजी राहटे ने इसकी जानकारी दी। झारखंड में उर्दू समेत 12 भाषाओं को द्वितीय राजभाषा का दर्जा हासिल है। झारखंड में 2001 की जनगणना के अनुसार मगही बोलने वालों की आबादी 18,35,273 (6.82 फीसद) है।

जबकि, भोजपुरी बोलने वालों की आबादी 6,56,393 (2.44 फीसद) और मैथिली बोलने वालों की 1,41,184 (0.52 फीसद) है। अंगिका जनगणना सूची में शामिल नहीं है। कैबिनेट ने राज्य के न्यायिक पदाधिकारियों का सप्तम केंद्रीय वेतन पुनरीक्षण के परिपेक्ष्य में अंतरिम लाभ देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी।

इन्हें हासिल है द्वितीय राजभाषा का दर्जा
र्दू, संथाली, मुंडारी, हो, खड़िया, कुरुख (उरावं), कुरमाली, खोरठा, नागपुरी, पंचपरगनिया, बांग्ला और उड़िया।

मगही बोलने वालों की आबादी 18,35,273 (6.82 प्रतिशत) है, जबकि भोजपुरी बोलने वालों की 6,56,393 (2.44 प्रतिशत) और मैथिली 1,41,184 (0.52 प्रतिशत) है। अंगिका जनगणना सूची में शामिल नहीं है।

(Source – https://www.jagran.com/jharkhand/ranchi-magahi-bhojpuri-maithili-and-angika-will-get-status-of-second-official-language-in-jharkhand-17706687.html)