क्षेत्रीय व जनजातीय भाषा की उपेक्षा के विरोध में जनाधिकार मंच का धरना 28 को

रांची : आदिवासी-मूलवासी जनाधिकार मंच की प्रेस वार्ता शुक्रवार को रांची स्थित होटल में हुई। जानकारी दी गई कि 28 नवंबर को आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच द्वारा एक दिवसीय धरना दिया जाएगा और झारखंडी मुद्दों को लेकर राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा जाएगा। मंच के अध्यक्ष राजू महतो ने कहा कि झारखंड के आदिवासी-मूलवासी जनता के हितों की अनदेखी करते हुए स्थानीय नीति बनाई गई और अब यहां के पिछड़े-दलित और आदिवासी को मिले संवैधानिक आरक्षण का लाभ से भी वंचित किया जा रहा है। आजसू के अध्यक्ष दीपक महतो ने कहा कि झारखंड के नौ क्षेत्रीय व जनजातीय भाषा को छोड़कर अन्य राज्यों की भाषाओं की झारखंड में भेजा जा रहा है और वर्तमान शिक्षक बहाली में मैथिली, भोजपुरी, मगही, अंगिका, बंगाली, उड़िया सहित अन्य भाषाओं की परीक्षा ली जा रही है। इसका कड़ा विरोध किया जाएगा।

अंगिका को छोड़कर अन्य भाषायें मैथिली, भोजपुरी, मगही, बंगाली, उड़िया आदि झारखंड की मूल भाषा नहीं है । झारखंड के संथालपरगना क्षेत्र के साहेबगंज, पाकुड़, गोड्डा, दुमका, जामताड़ा, गिरीडीह आदि की भाषा अंगिका है ।  मंच के मुख्य संयोजक आजम अहमद ने कहा कि रांची शहरी क्षेत्र में भी जहां होल्डिंग टैक्स, पानी टैक्स, बिजली टैक्स में वृद्धि की गई है और वहीं शहरी क्षेत्र के दुकानदारों व अन्य व्यवसायियों को टैक्स वृद्धि कर परेशान किया जा रहा है। इसका मंच विरोध करेगा। मौके पर संदीप लकड़ा, सागर नाग, रंजन बाड़ा, फ्रांसिस भेंगरा, विक्की टोप्पो, गोपाल महतो, एंचीनी, अंकित सांगा, भागीरथ नायक, विशाल नायक, मोहम्मद अंसजद सहित कई उपस्थित थे।

(http://www.jagran.com/jharkhand/ranchi-ranchi-news-17091726.html एवं अन्य समाचार पत्रों में छपे समाचार पर आधारित )