मुंबई । अपनऽ साहित्य म॑ अंगिका भाषा व अंग क्षेत्र केरऽ आंचलिकता के सौंदर्यता व छुअन क॑ बरकरार रखै वाला हिंदी साहित्य केरऽ सुप्रसिद्ध कथाकार फणीश्वरनाथ रेणु केरऽ कालजयी कहानी ‘पंचलाइट’ पर आधारित फिल्म ‘पंचलैट’रिलीज लेली तैयार छै । खबर के अनुसार ई फिल्म आगामी १७ नवंबर,२०१७ क॑ रिलीज होतै ।

बरसों पहल॑ दूरदर्शन ई ‘पंचलाइट’ कहानी प॑ यह॑ शीर्षक स॑ टेलीफ़िल्म बनाय चुकलऽ छै । रेणु जी केरऽ ‘तीसरी कसम’ के बाद ई हुनकऽ दोसरऽ कहानी छेकै, जेकरा प॑ कोय फिल्म बनी रहलऽ छै । ई फिल्‍म क॑ ल॑ क॑ दर्शक म॑ काफी उत्‍सुकता छै ।

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फिल्म इंडस्ट्री केरऽ चर्चित चेहरा सब एकरा म॑ किरदार निभाय रहलऽ छै । फिल्म दबंग म॑ छोटऽ रकम के किरदार के भूमिका म॑ रहलऽ अमितोष नागपाल नायक व अनुराधा मुखर्जी नायिका के भूमिका म॑ छै । फिल्म केरऽ अधिकांश शूटिंग अंग क्षेत्र केरऽ देवघर व दुमका म॑ होलऽ छै । कईएक धारावाहिक व वृत्तचित्र बनाय चुकलऽ फिल्म केरऽ निदेशक प्रेम मोदी केरऽ अनुसार एकरऽ पटकथा पर बीतलऽ आठ साल स॑ काम जारी छेलै । कहानी केरऽ पृष्ठभूमि के हिसाब स॑ फिल्म केरऽ फिल्मांकन देश केरऽ उत्तरी क्षेत्र के कोनो गाँव म॑ करना छेलै । ई लेली अंग क्षेत्र के चयन करलऽ गेलै । वास्कतविकता मे॑ भी ई कहानी अंग क्षेत्र केरऽ पृष्ठ भूमि प॑ ही लिखलऽ गेलऽ रहै ।

निर्देशक अविनाश दास न॑ फिल्‍म केरऽ फर्स्‍टलुक शेयर करत॑ हुअ॑ मेकर्स क॑ फिल्‍म लेली बधाई देन॑ छै । फनटाइम एंटरटेन्मेन्ट के बैनर तले बनलऽ ई फिल्म के निर्माता युवा व्यवसायी अनिल सोमानी, अनूप तोदी तथा प्रमोद गोयल छेकै । रेणु जी केरऽ पुत्र सह पूर्व विधायक पदम पराग राय वेणु केरऽ पूरा सहयोग फिल्म निरमान यूनिट क॑ देलऽ गेलऽ छै ।

फिल्म म॑ बॉलीवुड के चर्चित अभिनेता पंकज त्रिपाठी के अलावा ,अमितोष नागपाल, राजेश शर्मा,,ब्रिजेन्द्र काला, वीरेन्द्र सक्सेना, प्रणय नारायण, इकबाल सुलतान, सुब्रत दत्त, ललित परीमू, अनुराधा मुखर्जी, अरूप जागीरदार, कल्पना झा, मालिनी सेनगुप्ता, पुण्यदर्शन गुप्ता के अहम भूमिका छै ।

कहानी ‘पंचलाइट’ बिहार केरऽ अंग क्षेत्र केरऽ ग्रामीण परिवेश पर आधारित छै । ई कहानी म॑ एगो युवक गोधन केरऽ मुनरी नाम केरऽ एगो लड़की स॑ प्रेमसंबंध होय छै । ई कारण स॑ गाँव के लोग ओकरऽ बहिष्कार करी दै छै । एक दिन मेला स॑ गांव वालां सार्वजनिक उपयोग के वास्तें पेटोमैक्स खरीदी क॑ लानै छै । जेकरा लोगें पंचलाइट कहै छै । सौसे गाँव ओकरा देखै लेली जौरऽ होय जाय छै । लेकिन गांववाला क॑ पंचलाइट जलाबै ल॑ नै आबै छै । स्थिति हास्यास्पद हो. जाय छै । दोसरऽ गाँव वाला मजाक उड़ाब॑ लगै छै । मुनरी गाँव वाला क॑ बताबै छै कि ओकरऽ प्रेमी गोधन क॑ पंचलाइट जलाय ल॑ आबै छै । तब॑ गाँव वाला बेइज्जती स॑ बचै लेली स॑ गोधन स॑ पंचलाइट जलवाबै छै । ई प्रकरण के बाद दूनू क॑ माफ करी देलऽ जाय छै ।

ई कहानी प॑ बनलऽ फिल्म के बारे म॑ बतैलऽ जाय रहलऽ छै कि रेणु जी केरऽ साहित्य जोन तरह के आंचलिकता के सौंदर्य स॑ ओतप्रोत दिखै छै , ओकरा फ़िल्म म॑ भी वैसने बनैलऽ रखै के प्रयास करलऽ गेलऽ छै । जे कि दर्शकऽ लेली एगो अलग तरह के अनुभव रहतै । गौरतलब छै कि रेणु जी के कहानी ‘मारे गये गुलफाम’ प॑ बॉलीवुड न॑ ‘तीसरी कसम’ फिल्म १९६६ म॑ बनैल॑ छेलै, जे शुरूआत म॑ फ्लॉप रहला के बाद, बाद म॑ एतना लोकप्रिय होलै कि हिंदी सिनेमा केरऽ सर्वश्रेष्ठ फिल्मऽ म॑ शामिल करलऽ गेलऽ रहै ।

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