भागलपुर। बिहार अंगिका अकादमी आरू अखिल भारतीय अंगिका सम्मेलन केरऽ संयुक्त तत्वावधान मं॑ ३० जून – २०१६ ई. क॑ स्थानीय कला केंद्र म॑ अंगिका दिवस एगो भव्य समारोह के आयोजन करी क॑ मनैलऽ गेलै। जेकरऽ उदघाटन बिहार अंगिका अकादमी के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) लखन लाल सिंह आरोही न॑ करलकै । उदघाटन करतं॑ डॉ. आरोही न॑ कहलकै कि पिछला साल ३० जून क॑ ही बिहार सरकार न॑ अंगिका भाषा व साहित्य केरऽ अहमियत व ताकत क॑ समझतं॑ हुअ॑ अंगिका अकादमी केरऽ गठन लेली अधिसूचना जारी करन॑ छेलै। ई लेली जेना हर साल १४ सितंबर क॑ ‘हिंदी दिवस’ मनैलऽ जाय छै ओह॑ तरह सं॑ अकादमी तरफऽ स॑ ३० जून क॑ प्रत्येक वर्ष पूरा बिहार म॑ अंगिका दिवस मनाबै के निर्णय लेलऽ गेलऽ छै । हुनी कहलकै कि ई सिलसिला मं॑ एक स॑ १५ जुलाई तलक बिहार राज्य सहित देश आरो विदेश मं॑ अंगिका पखवाड़ा भी मनैलऽ जैतै । जेकरा मं॑ अंगिका के साहित्यकार व संस्कृतिकर्मी विद्वान सिनी अंगिका भाषा-भाषी लोगऽ के बीच अंगिका दिवस, अंगिका भाषा, साहित्य, कला आरो संस्कृति केरऽ महत्व प॑ प्रकाश डालत॑। जेकरा अनतरगत सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होतै। हुनी कहलकै कि अंगिका अकादमी तरफऽ स॑ उच्च शिक्षा विभाग केरऽ निदेशक क॑ ११ सूत्री स्मारपत्र लगभग १० महीना पहल॑ सौंपलऽ गेलऽ छै। जेकरा मं॑ अंगिका साहित्यकारऽ सिनी क॑ पुरस्कृत करै व अंगिका केरऽ महत्वपूर्ण पांडुलिपियऽ सिनी के प्रकाशन जैसनऽ मांग शामिल छै। विभाग स॑ राशि के आवंटन होला प॑ ही एकरा प॑ अमल करलऽ जैतै । हुनी कहलकै कि अकादमी तरफऽ स॑ निकट भविष्य म॑ एक समृद्ध पत्रिका के प्रकाशन भी करलऽ जैतै । ई लेली सब्भे विधा मं॑ स्तरीय रचना आमंत्रित करलऽ गेलऽ छै ।

         बिहार अंगिका अकादमी केरऽ अध्यक्ष न॑ आपनऽ संबोधन मं॑ आरू अंगिका.कॉम स॑ फोन प॑ बात करतं॑ हुअ॑ विस्तार सं॑ बतैलकै कि बिहार अंगिका अकादमी क॑ अखनी तलक कार्यालय नै मिलै के पीछू की वजह छै । हुनी कहलकै कि अंगिका अकादमी केरऽ निदेशक के नियुक्ति होय गेलऽ छै । डॉ. आरोही न॑ कहलकै कि हुनका सं॑ कहलऽ गेलऽ छै कि कोनो निजी मकान भाड़ा प॑ ल॑ करी क॑ अकादमी कार्यालय के रूप मं॑ उपयोग करलऽ जाय । हुनी ई दिशा मं॑ प्रयास रत छै कि आपनऽ खर्चा प॑ ही सही अंगिका अकादमी क॑ आपनऽ कार्यालय मिली जाय । हुनी कहलकै कि अंगिका दिवस समारोह केरऽ आयोजन हुनी आपनऽ खरचा स॑ करी रहलऽ छै जेकरा सं॑ अंगिका भाषा लेली ई महत्वपूर्ण आयोजन सं॑ अंगिका भाषा भाषी के बीच जागरूकता के संचार हुअ॑ ।

            एकरऽ पहल॑ अंगिका दिवस के आरंभ अंगिका मं॑ गैलऽ बिहार गीत स॑ करलऽ गेलै । समारोह केरऽ समापन भी अंगिका म॑ गैलऽ अंगिका गीत स॑ होलै । ई अवसर पर भव्य अंगिका कवि सम्मेलन भी होलै। जेकरा मं॑ भाग लै वाला अंगिका विद्वानऽ मं॑ शामिल छेलै – सांत्वना साह, हीरा हरेंद्र, डॉ. आमोद कुमार मिश्र, रामावतार राही, राजकुमार, डॉ. रमेश मोहन आत्मविश्वास, रामकिशोर, विकास कुमार सिंह गुलटी , दिनेश तपन, अभय कुमार भारती, बिजेता मुदगलपुरी, नवीन निकुंज, उमाकांत अंशुमाली, भानू प्रलय, डॉ. प्रेमचंद पांडेय आदि । इसमें भागलपुर सहित बांका, मुंगेर, जमुई, कटिहार, मधेपुरा आदि कई जिलों के साहित्यकारों ने शिरकत की।

           कार्यक्रम म॑ इंडियन मेडिकल एसोसिएशन केरऽ प्रदेश अध्यक्ष डॉ. डीपी सिंह व शिक्षाविद् राजीव कांत मिश्र भी मौजूद रहै । डॉ. डीपी सिंह न॑ सभा क॑ संबोधित करतं॑ हुअ॑ कहलकै कि मातृभाषा केरऽ सम्मान करला स॑ ही अपना सब क॑ गौरव हासिल होतै । राजीव कांत मिश्र न॑ कहलकै कि ऐन्हऽ कार्यक्रम बार-बार होना चाहियऽ ।

            कार्यक्रम केरऽ अध्यक्षता डॉ. रमेश मोहन शर्मा आत्मविश्वास न॑ आरू मंच संचालन प्रो. नवीन निकुंज न॑ करलकै ।

          अंगिका.कॉम केरऽ कुंदन अमिताभ न॑ बिहार अंगिका अकादमी केरऽ अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) लखनलाल सिंह आरोही क॑ अंगिका भाषा के महत्व क॑ हर क्षेत्र मं॑ प्रतिपादित करै लेली हिन्दी दिवस के तर्ज पर अंगिका दिवस व अंगिका पखवाड़ा मनाबै लेली बधाय व शुभकामना देतं॑ आशा व्यक्त करन॑ छै कि ऐन्हऽ आयोजन सं॑ आबै वाला पीढ़ी मं॑ अंगिका भाषा के संरक्षण व संवर्द्धन के प्रति जागरूकता पैदा करै मं॑ सफलता मिलतै । ज्ञातव्य छै कि  १४ सितंबर १९४९ क॑ संविधान सभा न॑ एक मत स॑ ई निर्णय लेन॑ छेलै कि हिन्दी ही भारत के राजभाषा होतै। ओकरऽ बाद सन् १९५३ स॑ संपूर्ण भारत मं॑ १४ सितंबर क॑ प्रतिवर्ष हिन्दी-दिवस के रूप म॑ मनैलऽ जाय छै ।

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