भागलपुर : अंग देश केरऽ रेशमी शहर भागलपुर केरऽ सैंडिस कंपाउंड स्टेडियम मं॑ सद्भावना कप केरऽ आयोजन केरऽ डेढ़ दशक बाद बड़ऽ स्तर के क्रिकेट केरऽ आयोजन ई साल अंगिका कप के रूप मं॑ होलै । जेकरा प॑ कब्जा करी क॑ जमशेदपुर चैम्पियन बनलै ।

सद्भावना कप केरऽ आयोजन केरऽ दौरान एमएस धौनी केरऽ चौका व छक्का के याद शहरवासियऽ के दिलऽ म॑ अब भी ताजा छै। सैंडिस म॑ पांच जून-२०१६ स॑ फिर बड़ऽ खिलाड़ी सिनी दर्शक स॑ रुबरू होंलै। तकरीबन 12 वर्ष बाद भागलपुर के सैंडिस कंपाउंड म॑ होलऽ किक्रेट के बड़ऽ टूर्नामेंट अंगिका कप के जोरदार समापन बुधवार क॑ होय गेलै । ई  टूर्नामेंट पूरा तरह स॑ आइपीएल खिलाड़ी सौरभ तिवारी केरऽ इर्द-गिर्द घूमत॑ रहलै । सौरभ न॑ टूर्नामेंट म॑ जहां बल्लेबाजी म॑ छैलऽ  रहलै, गेंदबाजी म॑ भी हुनी अच्छा हाथ देखैलकै ।

जमशेदपुर टीम से कई नामचीन खिलाड़ी सैंडिस कंपाउंड के क्रिकेट मैदान में उतरे। अंडर 19 भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान ईशांत किशन, झारखंड रणजी के कप्तान देवव्रत, झारखंड से रणजी खेलने वाले बासुकीनाथ मिश्रा, कौशल सिंह, एसपी गौतम, आशीष जैसे खिलाड़ी इसमें शामिल हैं, पर मैदान पर जोर रहा सौरभ का ही। वह टीम के वन मैन शो बने रहे। उन्होंने पहले मैच में भागलपुर के खिलाफ 133, दूसरे मैच में चितरंजन के खिलाफ 82, तीसरे मैच में पटना के खिलाफ नाबाद 75 एवं बुधवार को फाइनल में नाबाद 71 रन बनाए। इसके लिए उन्हें बेस्ट बल्लेबाज, मैन ऑफ द सीरीज, सबसे अधिक छक्का मारने वाले बल्लेबाज के पुरस्कार से नवाजा भी गया।

दूसरी ओर इस टीम से आए अन्य नामचीनों की उपस्थिति उतनी प्रभावी नहीं रही। ईशांत किशन सैंडिस में चल नहीं पाए। शुरु के तीन मैचों में वे सस्ते में निपटे और फाइनल में उनके उतरने से पहले ही टीम जीत गई। बासुकीनाथ मिश्रा भी अपने होम ग्राउंड पर कुछ विशेष नहीं कर पाए। हां देवव्रत ने पहले मैच में सैकड़ा जड़कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था और झारखंड के जहीर खान के रूप में जाने जा रहे आशीष ने पटना के खिलाफ पांच विकेट लिया।
टूर्नामेंट के दौरान उद्घोषक ने बार-बार कहा कि इस आयोजन में भी पर्दे के पीछे सौरभ तिवारी की बड़ी भूमिका रही है। सौरभ ने खुद भी कहा कि वे भागलपुर में क्रिकेट को एक मुकाम देने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष से अंगिका कप का आयोजन और भी जोरदार तरीके से होगा। उसमें और बड़े-बड़े खिलाड़ी आएंगे।

तीन दिनों से तीखी धूप में खड़े होकर मैच का आनंद उठाने वाले दर्शकों को आसमान में छाये बादलों ने थोड़ी राहत दी। वैसे उमस कम नहीं थी, पर सीधी धूप नहीं होने लोगों ने सुकून से मैच देखा।

फाइनल का आनंद उठाने के लिए मानों पूरे भागलपुर के युवा उमड़ गए थे। स्टेडियम चारों ओर खचाखच भर गया था। पेड़ों पर चढ़कर मैच का आनंद उठाने वाले दर्शक यहां भी थे। करीब दस हजार लोग जुट गए थे। सभी संयमित थे।

 मैच के बाद दर्शकों में स्टार खिलाड़ियों से हाथ मिलाने की होड़ सी मच गई। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए दर्शकों को लाठियां भी पटकनी पड़ी। दरअसल जमशेदपुर के स्टार खिलाड़ी मैच जीतने के बाद मैदान में घूमकर दर्शकों का आभार जता रहे थे। इसी दौरान वे अपने से करीब दर्शकों से हाथ भी मिलाते-हिलाते बढ़ रहे थे। इसी क्रम में दर्शक उनसे और सटने की कोशिश करते तो पुलिस और प्रशासन के लोगों को सख्ती करनी पड़ी।

स्टेडियम की खास्ताहाल स्थिति को लेकर आयोजक काफी डरे हुए थे कि कहीं कोई दुर्घटना न हो जाए, पर उनके इस अच्छे आयोजन पर ऊपरवाला भी मेहरबान था। स्टेडियम पर भारी भीड़ थी। डर यह था कि इतने लोगों के वजन यह उठा नहीं पाएगा। उद्घोषक बार-बार अपनी दांयी ओर स्टेडियम के क्षतिग्रस्त हिस्से से लोगों को हटने का आग्रह करते, पर दर्शक हटे नहीं।

मैच के बाद सैंडिस के गेट पर जाम लग गया। स्थिति यह कि मैदान के अंदर पुरस्कार वितरण समारोह में भाग लेने जा रहे एसएसपी को पैदल ही अंदर जाना पड़ा। उनकी गाड़ी काफी देर तक सैंडिस के गेट से दूर ही फंसी रही। दरअसल कम स्कोरिंग मैच होने के कारण यह निर्धारित समय से करीब एक घंटा पूर्व (चार बजे) समाप्त हो गया। इसी वक्त एसएसपी मैदान में आ रहे थे। दूसरी ओर दर्शक वापस जा रहे थे। सैंडिस गेट पर लोगों की भीड़ के मद्देनजर ट्रैफिक को संभालने के लिए यहां कोई व्यवस्था नहीं की गई थी। फुटपाथ पर आम की दुकानें सजी हुई थीं। इधर-उधर से निकलने की जल्दी में गाड़ियों की कतारें बढ़ती गई और पूर्व में सर्किट हाउस और पश्चिम में आइजी आवास तक गाड़ियों की कतारें लग गई।

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