2 months ago
उधाडीह गाँव मँ मनैलौ गेलै शौर्य चक्रधारी अंग गौरव शहीद निलेश कुमार नयन केरौ शहादत दिवस | New in Angika
2 months ago
गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड मँ जग्घौ बनाबै लेली आय 122 भाषा के गाना कार्यक्रम मँ अंगिका मँ भी गैतै पुणे केरौ मंजुश्री ओक | News in Angika
2 months ago
अंगिका भाषा क आठमौ अनुसूची मँ दर्ज कराबै लेली दिसम्बर मँ दिल्ली मँ होय वाला आन्‍दोलन क सफल बनाबै के करलौ गेलै आह्वान | News in Angika
2 months ago
अंगिका आरू हिन्दी केरौ वरिष्ठ कवि व गीतकार, कविरत्न महेन्द्र प्र.”निशाकर” “दिनकर सम्मान” सँ सम्मानित  | News in Angika Angika
3 months ago
चाँद पर विक्रम लैंडर के ठेकानौ के लगलै पता, पर अखनी नै हुअय सकलौ छै संपर्क | ISRO found Vikram on surface of moon, yet to communicate | Chandrayaan 2 | News in Angika

एगो चिरैयां जे बनलै जापानी बुलेट ट्रेन के हुलिया बदलै के वजह ।

लंदन । 7 अप्रैल, 2019 । की मछली बहुल इलाका मँ पानी मँ धोंस मारी क मछली के शिकार लेली नद्दी या पोखर लगाँकरौ कोनो गाछी प ध्यानस्थ मुद्रा मँ बैठलौ दिखी जाय वाली नीलकंठ या रमचिरैयां भी आधुनिक युगौ के जापानी बुलेट ट्रेन के हुलिया बदलै के वजह बनै सकै छै ?

बी बी सी मँ छपलौ एगो प्रजेंटेसन के हिसाब सँ 30 साल पहलें जापान केरौ बुलेट ट्रेन एगो तकनीकी मुश्किल मँ फंसी गेलौ रहै । बुलेट ट्रेन क बचाबै मँ किंगफ़िशर यानि कि नीलकंठ या रामचिरैंयां के अहम भूमिका छेलै ।

नीलकंठ

दरअसल तीस साल पहलें ई महसूस करलौ गेलै कि सुरंग सँ गुजरै घड़ियाँ बुलेट ट्रेन बहुत तेज आवाज करै लगै छेलै । एकरा सँ मोसाफिर क त दिक्कत होथै छेलै, आसपास रहै वाला जानवर आरू निवासी सब क भी बहुत दिक्कत होय छेलै।

आखिर की होय रहलौ छेलै ?

दरअसल बुलेट ट्रेन के सुरंग मँ घुसै घड़ियाँ सामने सँ हवा के दबाब बनी जाय छेलै । आरू यहै कम्प्रेस्ड हवा एगो ध्वनि तरंग यानि आवाज के लहर बनाय दै छेलै । जबै ट्रेन सुरंग सँ निकलै छेलै त जोरदार आवाज बनी क उभरी जाय छेलै । ई आवाज ऐसनौ रहै छेलै, जेना कि कोनो गोली चललौ हुवौ । ई कम्प्रेस्ड हवा के चलतें ट्रेन के रफ्तार भी कम होय जाय छेलै । जेना कि ट्रेन पानी मँ उतरी क चली रहलौ हुए ।

ऐन्झैं नीलकंठ केरौ चोंच काम ऐलै । नीलकंठ केरौ चोंच देखी क आइडिया ऐलै । कैन्हें कि नीलकंठ केरौ चोंच ओकरा पानी मँ प्रवेश करै मँ बड्डी मदद करै छै । ओकरौ चोच लंबा, सीधा आरू पतला होय छै । चोंच केरौ अंतिम सिरा सँ ल करी क सिर दन्नें बढ़ते हुअ एकरौ व्यास चौड़ौ होय छै।

यहै वजह सँ जबै नीलकंठ पानी मँ दाखिल होय छै, त ओकरा चोट नै लगै छै । सभसें पहिनै ओकरौ चोंच पानी मँ जाय छै । आरू पानी ओकरा सँ टकराबै के बजाय चोंच के दोनो तरफ छूतें हुअ निकली जाय छै । ठीक ऐसने बुलेट ट्रेन नै करै पाबी रहलौ छेलै।

ट्रेन सँ जुड़लौ टीम नँ नीलकंठ के चोंचौ के अध्ययन करलकै । हुनी पैलकै कि नीलकंठ के चोंच दू त्रिभुज सँ मिली क बनलौ छै जेकरौ किनारा गोल छै । त्रिभुज आरू गोल मिली क चोंच क डायमंड यानि हीरा के आकार प्रदान करै छै।

ई तरह सँ नीलकंठ केरौ चोंच नँ जापानी चीम क बुलेट ट्रेन केरौ आगू के हिस्सा डिजायन करै मँ मदद करलकै।

जबै ई प्रकार सँ डिजायन करलौ गेलौ बुलेट ट्रेन क टेस्ट करलौ गेलै, त पैलौ गेलै कि बुलेट ट्रेन जादा शांत, तेज आरू कहीं जादा ताकतवर बनी गेलौ छेलै । हवा के दबाब भी ३० प्रतिशत कम होय गेलौ रहै ।

English Content & Sketch Source : https://www.bbc.com/hindi/media-47852888
Photo Source : Wikipedia.org

Comments are closed.

error: Content is protected !!