मुंगेर : जयप्रकाश उद्यान की सुरम्य वादियों में कवियों का मन-भ्रमर शब्द-पराग का रसपान कर बुधवार को बेकाबू हो रहा था। अवसर था
होली मिलन समारोह का। अध्यक्षता कर रहे छंदराज ने शब्द लालित्य से सरसाया-पूरवा में तनवा घसियाये फागुन में, पछिया में मनवा भसियाये फागुन में..सुना
कर श्रोताओं को बौरा दिया।

आयोजक शिव कुमार रुंगटा ने आरंभ में रंगीन टोपी पहना कर कवियों का स्वागत किया। वहीं कार्यक्रम में सभी धर्मो के लोग शामिल होकर आपसी भाईचारा का
पैगाम दिया। धन्यवाद ज्ञापन समाजसेवी अतिथि निरंजन शर्मा ने ऐसे आयोजन से युवा व बुजुर्गो के ऐसे समयोजन से जीवन में माधुर्य भरने वाला और स्वास्थ्य
व‌र्द्धक बताया। कहा कि आगे भी प्राकृतिक सुषमा के बीच ऐसे कार्यक्रम चलाना काफी लाभप्रद बताया तो श्री रुंगटा ने ऐसी कोशिश करने का यकीन दिलाया।
संचालन करते हुए शिवनंदन सलिल ने वसीम उद्दीन को इंगित करते हुए कहा कि शादी के रोज साहब थे कुरमुरे हुए, बरसी भी हो न पाई झुरझुरे हुए हास्य कविता
सुनाई। । अंगिका कवि विजेता मुद्गलपुरी की मुकरियां औरों से अलग थीं- बड़ मीठ लागे मीठी नानी की बोली.. व अंगिका रामायण के पकवान का स्वाद घोला।
मधुसूदन ने घर बरसाना बन जाएगा शीर्षक कविता सुनाई तो फैयाज रश्क ने हर तरफ है निखार होली में.। लल्लू बाबू, विमल मिश्रा, तारीक मतीन, एहतेशाम
आलम, कौशल पाठक, सत्येन्द्र मिश्र, अशोक आलोक, गुरुदयाल त्रिविक्रम, कुंदन कुमार, विकास आदि ने भी सुनाई।

इस अवसर पर सेंट जोसेफ, महफूज आलम, नारायण शर्मा, विजय मोदी, प्रेम कुमार वर्मा, संतोष कुमार, सुजीत मिश्रा, अजफर शमशी थे।

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