PATNA : पटना लिटरेचर फेस्टिवल की शानदार शुरुआत शुक्रवार से पटना म्यूजियम में हुई. देशभर के लिटरेचर से जुड़ी बड़ी हस्तियों ने विभिन्न मुद्दों पर खुलकर बात की. इनमें सबसे प्रमुख बात थी लिटरेचर एक चेंजिंग एजेंट के रूप में कितने व्यापक रूप में रोल प्ले करता है, जिसमें इंडियन लैंग्वेजेज का एक बड़ा रोल है. इसमें उर्दू, मगही, भोजपुरी, ब्रज और अंगिका जैसी भाषा इंपॉर्टेट है. नवरस स्कूल ऑफ परफॉर्मिग आ‌र्ट्स के फाउंडर डायरेक्टर डॉ अजीत प्रधान ने बताया कि ऐसे फेस्टिवल इंडिया के कई हिस्सों में होते हैं, पर इस फेस्ट की खात बात यह है कि इसमें इंडियन लैंग्वेजेज पर कई सेशन रखे गए हैं, जिसमें बिहार की भाषा पर खास फोकस है. इससे लोगों को ऐसी भाषाओं से जुड़े रहने पर बल मिलेगा.14_02_2014-Picture_551_patna_literature

किसी दायरे में नहीं है साहित्य

गुलजार, बेबी हलधर, लीला सेठ, चन्द्रकिशोर झा, ओम थानवी, रवीश कुमार, त्रिपुरारी शरण, नमिता गोखले, आलोक धनवा सहित साहित्य की कई बड़ी हस्तियों ने विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखी. मौके पर मौजूद सईद नकवी ने शायरी के सफर में कई शायरी पढ़कर पटना से जुड़ी अपनी यादें शेयर की. उन्होंने बताया कि साहित्यकार किसी दायरे में बंधा हुआ नहीं होता है.

..तब भगवान बन जाता है

सईद नकवी ने कहा कि जब शायर क्रिएटिविटी में होता है, तो भगवान हो जाता है. वह किसी नियम या बंधन के दायरे में नहीं जकड़ा होता है. चाहे वह काजी नसरूल इस्लाम हों या फिर अब्दुल रहीम खानखाना. एक सामाजिक परिवर्तन की बात करता है, तो दूसरा राम की भक्ति की बात. जिसे जो दिल को छू गया, वही लोंगों के बीच वे उतार आए. उन्होंने हाल के कुछ उदाहरण देते हुए कहा कि इंडियन सोसाइटी में टॉलरेंस और रेवरेंस की एक ट्रेडिशन रही है, पर अब ऐसा नहीं दिखता. लोग तुरंत और गलत तरीके से रिएक्ट करने लगते हैं.

सुनाई गई दस देवियों की कहानी

‘शक्तप्रामोध’, जिसे मधु खन्ना ने एडिट किया है. अंग्रेजी में अवेलेबल है. यह दस देवियों जिन्हें इस बुक में ‘टेन सुप्रीम पावर्स’ कहा गया है के बारे में हैं. इसमें काली, दुर्गा, भुवनेश्वरी और धुमावती जैसी दस देवियों की डिस्क्रीप्शन है. इसमें तंत्र, रिच्युअल आदि के बारे में खास जानकारी दी गई है. बिहार गवर्नमेंट में कल्चरल एडवाइजर पवन वर्मा ने बुक रिलीज की. वहीं, दूसरी बुक ‘द एक्सट्राऑर्डिनरी लाइफ स्टोरी ऑफ एन अननोन हीरो’, जिसे शशिभूषण सहाय ने लिखी है. इसके अलावा बियोंड आइडेंटिटीज, बेबी फॉम ए मेड टू ए बेस्टसेलिंग ऑर्थर, ओपन डिस्कशन और माई साइड स्टोरी फिल्म दिखाई गई.

कई चेंजेज फेस कर रहा है देश

लिटरेचर फेस्ट के फ‌र्स्ट डे ‘द ग्लोबल इंडिया’ सब्जेक्ट पर एक खास सेशन रखा गया, जिसमें इंडिया के सामने मौजूदा कई प्रॉब्लम जैसे पॉलिटिक्स, गवर्नेस और इंस्टीट्यूशनल रिफॉर्म के बारे में बे्रन स्टार्मिग टॉक हुई. राज्यसभा से एमपी एनके सिंह ने कहा कि इंडिया के सामने कई बेसिक चैलेंजेज हैं, जिन पर अभी फोकस नहीं किया गया तो फिर आने वाले समय में स्थिति बहुत खराब होने वाली है. इसमें गवर्नेस का इश्यू खास है. इसके लिए एक डायनेमिक एप्रोच और पावर के डिसेंट्रलाइजेंशन पर खास फोकस होनी चाहिए. बिना सोशल स्ट्रक्चर के इकोनामिक स्ट्रक्चर की बात पूरी नहीं हो सकती है. इससे पहले पवन वर्मा ने कहा कि अभी बहुत सुधार की जरूरत है, चाहे वह गवर्नेस की बात हो या फिर इंस्टीट्यूशनल रिर्फाम की. इसमें टॉप लेवल पर जब तक बड़े फैसले नहीं लिए जाते, कोई बड़ा चेंज नहीं हो सकता है. इस सेशन में शैबाल गुप्ता और सुमंत्रा बोस भी मौजूद थे.

(Source: http://inextlive.jagran.com/patna-literaute-festival-starts-on-friday-at-patna-museum-11216)

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