भारत केरॊ मंगलयान के ‘मेन लिक्विड इंजिन’ सोमवार कॆ चार सेकंड लेली स्टार्ट करला के सफल परीक्षण के साथ ही मंगल मिशन केरॊ निर्णायक पल करीब आबी गेलॊ छै.

सोमवार के दोपहर इसरो ने ट्वीट करी कॆ कहलकै कि इंजिन कॆ चलाबै के परीक्षण सफल रहलै. एकरॊ मकसद मंगलयान केरॊ गति कॆ धीमा करना छै ताकि इ मंगल ग्रह केरॊ गुरुत्वाकर्षण मॆं खिंचलॊ चललॊ जाय आरू ओकरॊ कक्षा मॆं स्थापित हुऎ सकॆ. खबर छै कि एकरॊ साथ ही महत्वाकांक्षी मंगलयान मंगल केरॊ गुरूत्वाकर्षण क्षेत्र मॆं पहुंची गेलॊ छै. एकरॊ साथ-साथ जन मानस केरॊ उत्साह आरू उत्सुकता कॆ भी पंख लगी गेलॊ छै.

भारत केरॊ मंगलयान मिशन केरॊ निर्णायक पल करीब

भारत केरॊ मंगलयान मिशन केरॊ निर्णायक पल करीब

 

बुधवार सुबह जबॆ वैज्ञानिक मंगल ग्रह केरॊ कक्षा में मंगलयान कॆ स्थापित करै के कोशिश करतै, तॆ इ भारत के मंगल अभियान केरॊ निर्णायक पल होतै. मंगल अभियान के अंतिम चरण सॆं जुड़लॊ कार्य के तहत बुधवार सुबह सात बजी कॆ 17 मिनट 32 सेंकेड मॆं एलएएम के साथ आठ छोटॊ तरल इंजन कॆ करीब 24 मिनट लेली प्रणोदित करलॊ जैतै. मंगल के कक्षा मॆं स्थापित करै लेली यान केरॊ इंजन चालू करी कॆ धीमा करलॊ जैतै ताकि यान कॆ मंगल केरॊ कक्षा मॆं सुरक्षित तरीका सॆं स्थापित करलॊ जाबॆ सकॆ.

पिछला कईक महीना सॆं वैज्ञानिक जोन घड़ी के इंतज़ार करी रहलॊ छै वू आबै वाला छै. मंगल सॆं 5.8 लाख किलोमीटर दूर सॆं ओकरॊ गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र शुरू होय जाय छै. दस महीना सॆं सुषुप्त पड़लॊ मंगलयान के इंजन कॆ सोमवार के दोपहर करीब चार सेकंड लेली चालू करलॊ गेलै. मंगलयान 24 सितंबर कॆ मंगल के कक्षा मॆं प्रवेश करतै आरू इ ऐतिहासिक पल के गवाह बनै लेली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी बेंगलूर मॆं इसरो के केंद्र मॆं मौजूद रहै के संभावना छै. भारत अगर आपनॊ मिशन मॆं कामयाब रहै छै तॆ वू मंगल पर सफल मिशन भेजै वाला एशिया के पहला आरू दुनिया के चौथा देश होतै. मंगलयान कॆ पिछला साल पांच नवंबर कॆ प्रक्षेपित करलॊ गेलॊ रहै.

इ अभियान नॆ दुनिया भर के ध्यान आकर्षित करनॆ छै. इ लेली, भारत के अंतरिक्ष उद्योग मॆं ऐकरॊ सफलता के की मानॆ होतै. 60 करोड़ किलोमीटर के यात्रा के बाद, लाल ग्रह पर जीवन केरॊ संकेत तलाशै लॆ निकललॊ इ यान अबॆ मंगल के कक्षा मॆं प्रवेश करै वाला छै. इ अभियान कॆ सफल बनाबै लेली पिछला दस महीना सॆं 200 वैज्ञानिक रात-दिन काम करी रहलॊ छै आरू यान के हर गतिविधि पर नज़र टिकैनॆ छै. अबॆ वू मिशन केरॊ सफलता सॆं चंद क्षण ही दूर छै. इ ऐन्हॊ समय छै जे केवल इ विशेषज्ञॊ के टीम लेली ही नै, बल्कि भारत केरॊ पूरा अंतरिक्ष उद्योग लेली ही अहम साबित होय वाला छै. इ अभियान के लागत 7.3 करोड़ डॉलर (क़रीब 450 करोड़ रुपया) छै, जे कि नासा केरॊ मंगल अभियान केरॊ दसवां हिस्सा छेकै, आरू चर्चित हॉलीवुड फ़िल्म ग्रैविटी की लागत सॆं भी सस्ता छै.

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