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बौंसी (बांका) : बौंसी चौक स्थित बिषहरी स्थान में मैना बिषहरी की प्रतिमा स्थापित कर शुक्रवार को वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजन कार्य शुरू हो गया। देवी विषहरी की पूजा अर्चना के बीच शनिवार को बाला बिहुला का विवाह धूमधाम से किया जाएगा। बौंसी के पाठक टोला समीप बुढ़िया विषहरी मंदिर में, दलिया,साढ़मोह आदि गांव में विषहरी पूजा के अवसर पर मंजूषा पूजा किया जाता है।

जानकारी के अनुसार चांद सौदागर नामक व्यापारी को विषहरी को मेढक खाते देख घृणा हो जाती है। जबकि सर्प की देवी विषहरी ने चांदो सौदागर को उसकी पूजा करने की बात कही। परंतु चांदो सौदागर द्वारा अग्नि पूजा नहीं देने की बात पर विषहरी ने उसके छह पुत्रों सहित जहाज को समुद्र में विलीन कर दिया। इसके बावजूद व्यापारी ने पूजा नहीं दी।

सातवें पुत्र बाल लखेन्द्र की शादी बिहुला के साथ तय होने के उपरांत विषहरी द्वारा विवाह की रात्रि पुत्र को मार देने की घोषणा की। इस पर चांदो सौदागर द्वारा अपने पुत्र एवं पुत्रवधु की सुरक्षा के लिए लोहे का घर का निर्माण कराया गया। लेकिन विषहरी के हिदायत पर लौह गृह निर्माण में लगे विश्वकर्मा द्वारा एक छिद्र छोड़ दिए जाने के कारण तक्षक नाग द्वारा दंश कर लेने पर बाला लखेंन्द्र की मृत्यु विवाह की रात्रि हो गई।

सती बिहुला ने कठिन तपस्या के बल पर पति बाला को पुनर्जीवित ही नहीं किया अपितु अन्य छह भाइयों को भी जीवित करने का वरदान प्राप्त किया। अंत में चांदो सौदागर ने विषहरी देवी की पूजा की। जानकारी के अनुसार भागलपुर के चंपानगर में विषहरी मंदिर के साथ लौह का घर आज भी इसके प्रमाण है। बिहुला के गीत भजन के रूप में अंगिका भाषा में किए जाने की परंपरा काफी पुराना है।

भागलपुर / मुंगेर/बरियारपुर (मुंगेर), जाटी : बिहुला-विषहरी की पूजा को लेकर जिले के विभिन्न मंदिरों के पूजा समितियों द्वारा तैयारी जोरों पर होने के पश्चात आज16 अगस्त से पूजा प्रारंभ हो गई.

कल तक मुंगेर शहर के गुलजार पोखर, बड़ी बाजार, लल्लू पोखर सहित अन्य स्थानों पर बिहुला-विषहरी पूजा को लेकर तैयारी जोरों पर थी. गुलजार पोखर में नया मंदिर बनने के कारण इस बार पंडाल लगा कर पूजा अर्चना की जा रही है. वहीं नौवागढ़ी के भगतचौकी में पूजा को लेकर काफी उत्साह है। श्रीश्री 108 बिहुला-विषहरी पूजा समिति के अध्यक्ष रामचरित्र पासवान एवं सचिव सुरेश दास ने बताया कि पूजा का शुभारंभ 16 अगस्त से शुरू हो गया है. तीन दिन दिवसीय मेला में बिहुला-विषहरी आधारित नाटक का आयोजन किया जाएगा।

वहीं बरियारपुर के बंगाली टोला, नयाछावनी, नीरपुर एवं अन्य स्थानों पर बिहुला-विषहरी की प्रतिमा स्थापित की गयी है. त्रिवेणी दास, गुरुदेव मंडल सहित अन्य ने बताया कि प्रखंड में बिहुला-विषहरी पर्व मनाने की परंपरा सदियों पुरानी है.

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