भागलपुर : अंगिका केरऽ विकास वास्तें योजना तैयार होय गेलऽ छै. अंग जनपद में रहै वाला लोगऽ सिनी, सभ्भै केरऽ सहयोग चाहियऽ । बिना सहयोग केरऽ विकास संभव नाय छै. उक्त बात बिहार अंगिका अकादमी के अध्यक्ष प्रो लखनलाल सिंह आरोही न॑ अपनऽ सम्मान में आयोजित समारोह में  कहलकै ।

समारोह के आयोजन लोकहित जागरण संघ के ओर सें कला केंद्र में करलऽ गेल रहै । एकरऽ पहल॑ बिहार-झारखंड के अंग क्षेत्र अंतर्गत विभिन्न जिला के साहित्यकारऽ, बुद्धिजीवियऽ, सामाजिक कार्यकर्ता व समाजसेवी आरन्हि न॑ बुके द॑ करी व माला पहनाय क॑ सम्मानित करलकै । समारोह के दौरान स्वागताध्यक्ष डॉ विधानचंद्र यादव, संयोजक सूरज प्रभात, अध्यक्ष अधिवक्ता निशित मिश्रा, प्रवीण झा, संदीप झा, संयोजिका कमला कोमल न॑ बुके देलकै ।
मानस सद्भावना सम्मेलन के प्रधान संरक्षक दिवाकर चंद्र दुबे न॑ कहलकै कि अंगिका वास्तें सभ्भे क॑ आगू आबै ल॑ पड़तै ।  भजन गायक कपिलदेव कृपाला न॑ स्वागत गान गैलकै । कला केंद्र के प्राचार्य रामलखन सिंह गुरुजी, विश्व शांति सेवा समिति के अध्यक्ष कुसुम शर्मा, सुनीता सिंह, अनीता लोहिया न॑ अंग-अंगिका लेली होय रहलऽ प्रयास के सराहना करलकै. वरीय चिकित्सक डा डीपी सिंह न॑ कहलकै कि प्रो आरोही स्कूली जीवन मं॑ गुरु रही चुकलऽ छै । हुनिये साहित्य के दीक्षा देलकै, तभिये आय साहित्य पर भी पकड़ छै ।
अंगिका लेखक नंदलाल यादव  रचित गजल के पुस्तक सारस्वत वाणी के लोकार्पण प्रो आरोही, डॉ डीपी सिंह, दिवाकर चंद्र दुबे, डॉ विधानचंद्र यादव, कुसुम शर्मा, पारस कुंज आरन्हि करलकै ।  सम्मान समारोह मं॑ गनगनिया के साहित्यकार सुरेश सूर्य, इंद्रदेव, वरुण कुमार, मुंगेर के विजेता मुदगलपुरी, बांका के प्रो नवीन निकुंज, प्रभाष चंद्र राव आदि शामिल होलै ।
पटना म॑ बनतै अंगिका भवन
बिहार अंगिका अकादमी के अध्यक्ष प्रो आरोही न॑ कहलकै कि कहा कि पटना म॑ अंगिका भवन निर्माण लेली प्रयास चली रहलऽ छै । ऐसनऽ पांडुलिपि,  जे कि श्रेष्ठ होतै, ओकरऽ प्रकाशन लेली लेखकऽ क॑ पाण्डुलिपि अनुदान  देलऽ जैतै ।
कला केंद्र के विकास लेली मांगलऽ गेलै मदद
कला केंद्र के तरफऽ सं॑ रविवार क॑ केंद्र के प्राचार्य रामलखन सिंह गुरुजी न॑ बिहार अंगिका अकादमी अध्यक्ष प्रो लखन लाल सिंह आरोही सं॑ मुलाकात करलकै आरो कला केंद्र के विकास क॑ ल॑ करी क॑ मदद मांगलकै । श्री सिंह न॑ आपनऽ स्वनिर्मित मंजूषा पेंटिंग भेंट करलकै । इस मौका प॑ परिधि के निदेशक उदय भी मौजूद रहै ।

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