घटा घनघोर

— कुंदन अमिताभ —

घटा घनघोर घटा घनघोर
छैलॊ छै घटा घनघोर
छटा हर ओर छटा हर ओर
अनुपम छै छटा हर ओर

गमक हर ओर गमक हर ओर
फूलॊ के गमक हर ओर
झनक हर ओर झनक हर ओर
झींगुरॊ के झनक हर ओर

ठनक हर ओर ठनक हर ओर
ठनका के ठनक हर ओर
खनक हर ओर खनक हर ओर
चूड़ी के खनक हर ओर

चमक हर ओर चमक हर ओर
बिजुरी के चमक हर ओर
चनक हर ओर चनक हर ओर
बयारॊ के चनक हर ओर

धमस हर ओर धमस हर ओर
दुलहन के धमस हर ओर
हुलस हर ओर हुलस हर ओर
जोड़ा के हुलस हर ओर

घमा घमजोर घमा घमजोर
रोपनी सब घमा घमजोर
नाचै मनमोर नाचै मनमोर
किसानॊ के नाचै मनमोर

बहस हर ओर बहस हर ओर
बूहॊ के बहस हर ओर
तरस हर ओर तरस हर ओर
रौदा लॆ तरस हर ओर

Angika Poetry : Ghata Ghanghor
Poetry from Angika Poetry Book : Sarang
Poet : Kundan Amitabh

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