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खारघर, नवी मुंबई, 30 सितंबर,2012. समाज में मूलभूत बदलाव की क्रांतिकारी सोच रखने और उसके अनुरूप अपने जीवन को ढालने वाले तथा आजीवन भ्रष्टाचार के विरूद्ध संघर्षरत रहने वाले जुझारू गोरे लाल मनीषी अब नहीं रहे.[wzslider autoplay=”true”]

जीवन को अपनी मौलिकता की अप्रतिम शैली के साथ जीने वाले और किसी भी विषम परिस्थिति से हार ना मानने वाले लाखों लोगों के प्यारे अभियंता और अंगिका के प्रसिद्ध साहित्यकार गोरे लाल मनीषी का रविवार, 30 सितंबर, 2012 , तङके साढे सात बजे नवी मुंबई के फोर्टिज हिरानंदानी अस्पताल में निधन हो गया.

गोरे लाल मनीषी 69 वर्ष के थे. वे 2008 ई. से प्रोस्टेट कैंसर से ग्रस्त थे. कैंसर से उबरने के लिये वे लगातार अथक प्रयास करते रहे, परंतु कैंसर को पराजित नहीं कर पाये. उनका इलाज मुंबई के विभिन्न अस्पतालों – टाटा मेमोरियल अस्पताल, लीलीवती अस्पताल, जसलोक अस्पताल, तथा नवी मुंबई के फोर्टिज हिरानंदानी अस्पताल में हुआ. उनके परिवार में उनकी धर्मपत्नी के अलावा दो बेटियाँ और चार बेटे हैं.

नवी मुंबई के खारघर स्थित श्मशान भूमि में उनका आज अंतिम संस्कार सम्पन्न हुआ जहाँ उनके ज्येष्ठ पुत्र, कुंदन अमिताभ ने उन्हें मुखाग्नि दी. उन्होंने मृत्यु के बाद अपनी आँखों को दान करने का फ़ैसला किया था, परन्तु चूँकि उनका देहांत कैंसर की वजह से हआ, इसलिये यह संभव ना हो सका.

उनका खुद का जीवन, उनका लेखन और सामाजिक कार्यों में उनकी भागीदारी, इमानदारी, राष्ट्रीयता, भ्रष्टाचार उन्मूलन और समाज के उत्थान के लिए समर्पित था. महात्मा गाँधी, राम मनोहर लोहिया और अरविंद घोष के वे सच्चे अनुयायी थे. सरकारी तंत्र में कार्यरत रहते हुये भी उन्हें इमानदारी से कोई डिगा नहीं पाया और सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार के विरूद्ध सदा आवाज बुलंद करते रहे.

सरल स्वभाव और क्रांतिकारी सोच वाले श्री गोरे लाल मनीषी का जन्म सन 1944 ई. में बिहार के भागलपुर ज़िले के छोटे से गाँव खानपुर में हुआ था. उनके माता-पिता उनके जन्म के ठीक पहले बगल के भीखनपुर गाँव से खानपुर गाँव में आ बसे थे जहाँ वे पले – बढ़े. जब दो बरस के थे, पिता का देहांत हो गया. अपनी माता के संरक्षण में वे पले-बढ़े और अपने कैरियर के उच्चतम शिखर तक पहँचे. उनकी माता मुंदरी देवी एक अशिक्षित परन्तु प्रबंधन कुशल महिला थीं जो अपने समय में ग्रामीण और कृषि प्रबंधन कौशलता के लिये बहुत मशहूर थीं .

गोरे लाल मनीषी की स्कूल की पढ़ाई निकटवर्ती गाँवों, इंगलिश खानपुर तथा करहरिया में हुई. भागलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज से स्नातक इंजीनियरिंग की डिग्री लेने
के पश्चात कानुन की डिग्री भी ली. तत्पश्चात बिहार अभियंत्रण सेवा में नौकरी की और स्वेच्छा से सेवा निवृति ले ली.

वे बिहार अभियंत्रण सेवा के अध्यक्ष भी रहे. वे आजादी बचाओ आंदोलन, RTI Campaign Bihar, BGVS आदि कई एक संस्थाओ के सक्रिय सद्स्य थे. वे Kosi Bund Erosion Judicial Enquiry Commission के board member थे. उनका श्राद्ध-कर्म 11 सितंबर, 2012 को पटना स्थित उनके आवास पर संपन्न होगा.

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