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चाँद पर विक्रम लैंडर के ठेकानौ के लगलै पता, पर अखनी नै हुअय सकलौ छै संपर्क | ISRO found Vikram on surface of moon, yet to communicate | Chandrayaan 2 | News in Angika
2 weeks ago
अंगिका महोत्सव -२०२० के आयोजक समिति के भेलै गठन । Angika Mahotsav-2020 Organizing Committee Constituted| News in Angika
2 weeks ago
सुलतानगंज केरौ श्रावणी मेला मँ जमा होलौ सिक्का के गिनती सँ परेशानी के माहौल
3 weeks ago
फरवरी केरौ पहलौ सप्ताह मँ ही आयोजित होतै अंगिका महोत्सव -२०२० । Angika Mahotsav to be organised in first week of February-2020 | News in Angika
4 weeks ago
अंगिका क भारतीय संविधान केरौ आठमौ अनुसूची मँ शामिल करवावै लेली 5 दिसम्बर क जन्‍तर-मन्‍तर प धरना आरू 6 दिसम्बर क राज घाट पर आमरण-अनसन सह सत्‍याग्रह । Dharna at  Jantar Mantar on 5 December and fasting on 6 March at Raj Ghat planned to include Angika in the Eighth Schedule of the Indian Constitution  | News in Angika

बांका : राज्य सरकार अंग-अंगिका का हक मार रही है। सरकार के दोहरे मापदंडों के खिलाफ अंग क्षेत्र की जनता कमर कस चुकी है। अंगिका भाषियों के सब्र का
बांध टूट चुका है। अब इसके लिए निर्णायक संघर्ष की शुरुआत होगी।

यह बातें अंग उत्थान आंदोलन समिति बिहार-झारखंड के प्रधान संरक्षक दिवाकर चंद्र दुबे ने धंवन्तरी देवी विवाह भवन बांका में आयोजित प्रेस वार्ता में कही।
उन्होंने कहा कि अंगिका भाषा के हक हेतु 23 नवंबर को अधिकार सह सम्मान रैली का आयोजन होगा। इस दौरान समिति के जिला प्रभारी राजू तिवारी, उपाध्यक्ष
नीतीश कुमार मिश्रा, बुलबुल चौधरी, नीरज साह आदि भी मौजूद थे। श्री दूबे ने कहा कि बुद्धिजीवियों की सहभागिता के बगैर कोई भी क्रांति संभव नहीं है। समिति
का यह सौभाग्य है कि अंग क्षेत्र के बुद्धिजीवियों का सहयोग व सहभागिता दोनों प्राप्त है। उन्होंने कहा कि समिति के नेतृत्व में आयोजित अधिकार सह सम्मान
रैली ऐतिहासिक होगी जो अंगिका की उपेक्षा करने वालों की नींद उड़ाने का काम करेगी। यह रैली 23 नवंबर से 15 जिलों में सभा व सम्मेलन करते हुए तीन
दिसंबर को पटना पहुंचेगी। 14 दिसंबर को मांग पत्र सौंपकर महामहिम राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के समक्ष क्रांति का शंखनाद करते हुए पुन: भागलपुर लौटेगी।
उन्होंने बताया कि जिस तरह बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 10.5 करोड़ लोगों की आवाज बनकर बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने हेतु संघर्षरत है। उसी
तरह समिति अंगिका भाषी बिहार-झारखंड के पांच करोड़ लोगों के अस्तित्व व अस्मिता की लड़ाई निरंतर कई वर्षो से लड़ रही है। किंतु राज्य सरकार द्वारा
अंग-अंगिका के प्रति उदासीनता के बदौलत अंगिका अपने सम्मान व अधिकार से वंचित है। उन्होंने सभी अंगिका भाषियों से चार दिसंबर को पटना के गांधी मैदान
पहुंचने का आग्रह किया।

Source : http://www.jagran.com/bihar/banka-9813332.html

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