2 months ago
उधाडीह गाँव मँ मनैलौ गेलै शौर्य चक्रधारी अंग गौरव शहीद निलेश कुमार नयन केरौ शहादत दिवस | New in Angika
2 months ago
गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड मँ जग्घौ बनाबै लेली आय 122 भाषा के गाना कार्यक्रम मँ अंगिका मँ भी गैतै पुणे केरौ मंजुश्री ओक | News in Angika
3 months ago
अंगिका भाषा क आठमौ अनुसूची मँ दर्ज कराबै लेली दिसम्बर मँ दिल्ली मँ होय वाला आन्‍दोलन क सफल बनाबै के करलौ गेलै आह्वान | News in Angika
3 months ago
अंगिका आरू हिन्दी केरौ वरिष्ठ कवि व गीतकार, कविरत्न महेन्द्र प्र.”निशाकर” “दिनकर सम्मान” सँ सम्मानित  | News in Angika Angika
3 months ago
चाँद पर विक्रम लैंडर के ठेकानौ के लगलै पता, पर अखनी नै हुअय सकलौ छै संपर्क | ISRO found Vikram on surface of moon, yet to communicate | Chandrayaan 2 | News in Angika

गोड्डा : झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा में क्षेत्रीय भाषा अंगिका के पाठयक्रम को लेकर सोमवार को अंगिका साहित्य मंच की बैठक असनबनी में कैयूम अंसारी की
अध्यक्षता में संपन्न हुई। मंच के प्रदेश अध्यक्ष श्री अंसारी ने कहा कि परीक्षा में अंगिका के पाठ्यक्रम निर्धारित नहीं करके बहु-वैकल्पिक प्रश्नों का पूछा जाना
सरासर गलत है। प्रदेश महासचिव डॉ. प्रदीप प्रभात ने कहा कि अंगिका का साहित्य संसार काफी बड़ा है। ऐसे में मानव संसाधन विकास विभाग में बैठे अधिकारियों
को चाहिए कि विज्ञापन के माध्यम से अंगिका भाषा के साहित्यकारों की एक बैठक कर अंगिका के पाठ्यक्रम को निर्धारित किया जाए। उन्होंने कहा कि इस भाषा
में करीब पांच सौ अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है। ऐसे में शिक्षक पात्रता परीक्षा में परीक्षार्थी कौन-सी पुस्तक का अध्ययन करेंगे। इस भाषा की पढ़ाई ना तो
प्राथमिक कक्षा और ना ही उच्च वर्गों में हो रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में 18 जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाएं हैं। जिसमें पांच जनजातीय और दो क्षेत्रीय भाषा की
पुस्तकें उपलब्ध है। बची हुए ग्यारह भाषाओं के लिए पाठ्यक्रम तैयार किया जाना चाहिए। उसके बाद ही परीक्षा में इसे शामिल किया जाए। साहित्यकार धीरेन्द्र ने
कहा कि वर्ष 2011 में अधिविद्य परिषद द्वारा आयोजित पात्रता परीक्षा में अंगिका के लिए वैसे व्यक्तियों द्वारा प्रश्नपत्र तैयार किया गया था जिन्हें भाषा की
कोई जानकारी नहीं थी। जिसका खामियाजा भाषा-भाषी परीथार्थी को भोगना पड़ा था। इस बार भी परीक्षा में ऐसा होने का संदेह है। सरकार के पास न तो भाषा के
डिग्रीधारियों की सूची है और ना ही भाषाविदें की। बैठक में अमरेन्द्र, अरूण अनुपम, बिन्दु कुमारी, नवीन कुमार, शंभू नाथ राम व राधेश्याम चौधरी आदि मौजूद थे।

Source : http://www.jagran.com/jharkhand/godda-9932817.html

Comments are closed.

error: Content is protected !!